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रामपुर में बीता था बिरजू महाराज का बचपन, 15 साल पहले आए थे रजा लाइब्रेरी
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रामपुर। कथक सम्राट बिरजू महाराज का रामपुर से गहरा नाता रहा है। उनका बचपन रामपुर में ही बीता था। उनके पिता रामपुर में लंबे समय तक रहे थे। पिता के निधन के बाद बिरजू महाराज अपने चाचा के साथ दिल्ली चले गए। संगीत और कला के क्षेत्र में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उनके निधन से रामपुर में भी शोक की लहर है।
यूं तो बिरजू महाराज का जन्म लखनऊ में हुआ था, लेकिन उनका बचपन रामपुर में ही बीता था। दरअसल, बिरजू महाराज अपने पिता अच्छन महाराज के साथ आकर रामपुर में रहने लगे थे। उनके पिता अच्छन महाराज नवाब रजा अली खां के दरबार में बड़े कलाकारों में एक थे। बताते हैं कि बिरजू महाराज को बचपन से ही संगीत और नाचने गाने का शौक था। लिहाजा, महज छह वर्ष की आयु में बिरजू महाराज अपने पिता के साथ रामपुर के अंतिम शासक रजा अली खां के दरबार में जाते थे और नाचते थे। नवाब भी उनकी कला के बड़े प्रशंसक बन गए थे। बिरजू महाराज की बहनों का जन्म रामपुर में ही हुआ था।
बचपन की यादें और नृत्य का शौक के चलते ही बिरजू महाराज साल 2006 में रामपुर आए थे। उस वक्त रामपुर की रजा लाइब्रेरी में उनका कार्यक्रम निर्धारित था। लेकिन, जब उन्होंने मंच देखा तो उन्होंने कहा कि उनके नृत्य की तीव्रता मंच सह नहीं पाएगा, इसके बाद उन्होंने रजा लाइब्रेरी का भ्रमण किया और वापस चले गए। सोमवार को जब उनके निधन की खबर रामपुर में लगी, तो उनके प्रशंसक मायूस हो गए। तमाम लोग शोक में डूब गए। लोग बताते हैं कि संगीत व कला के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
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यूं तो बिरजू महाराज का जन्म लखनऊ में हुआ था, लेकिन उनका बचपन रामपुर में ही बीता था। दरअसल, बिरजू महाराज अपने पिता अच्छन महाराज के साथ आकर रामपुर में रहने लगे थे। उनके पिता अच्छन महाराज नवाब रजा अली खां के दरबार में बड़े कलाकारों में एक थे। बताते हैं कि बिरजू महाराज को बचपन से ही संगीत और नाचने गाने का शौक था। लिहाजा, महज छह वर्ष की आयु में बिरजू महाराज अपने पिता के साथ रामपुर के अंतिम शासक रजा अली खां के दरबार में जाते थे और नाचते थे। नवाब भी उनकी कला के बड़े प्रशंसक बन गए थे। बिरजू महाराज की बहनों का जन्म रामपुर में ही हुआ था।
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बचपन की यादें और नृत्य का शौक के चलते ही बिरजू महाराज साल 2006 में रामपुर आए थे। उस वक्त रामपुर की रजा लाइब्रेरी में उनका कार्यक्रम निर्धारित था। लेकिन, जब उन्होंने मंच देखा तो उन्होंने कहा कि उनके नृत्य की तीव्रता मंच सह नहीं पाएगा, इसके बाद उन्होंने रजा लाइब्रेरी का भ्रमण किया और वापस चले गए। सोमवार को जब उनके निधन की खबर रामपुर में लगी, तो उनके प्रशंसक मायूस हो गए। तमाम लोग शोक में डूब गए। लोग बताते हैं कि संगीत व कला के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
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