{"_id":"409b1a21c3b374312d7cfebca42a26a1","slug":"birthday-of-guru-ramdas-sahib-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रागी जत्थे ने संगत को किया निहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रागी जत्थे ने संगत को किया निहाल
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Thu, 29 Oct 2015 11:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरु रामदास साहिब का प्रकाशोत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्री सुखमनी साहिब सेवा सोसायटी ने 40वां समागम भी मनाया। प्रकाशोत्सव पर संगत को निहाल कर अटूट लंगर बरता गया। सिविल लाइंस स्थित संत भाईजी बाबा गुरुद्वारे पर 27 अक्तूबर से शुरू हुए कार्यक्रम में मंगलवार को अखंड पाठ साहिब शुरू किया गया, जोकि गुरुवार को समाप्त हुआ।
गुरुवार को कीर्तन दरबार सजा। दिल्ली से आए भाई जसप्रीत सिंह, जालंधर से आए भाई पहलवान सिंह ने कीर्तन किया। शबद-कीर्तन कर संगत को निहाल किया गया। कीर्तन दरबार के बाद दोपहर से अटूट लंगर बरता गया। साथ ही रात में रात्रि दीवान सजा। इस दौरान श्री गुरु रामदास साहिब के जीवन के बारे में भी जानकारी दी गई।
बताया गया कि गुरु रामदास का प्रकाश 1534 में लाहौर के चूना मंडी में हरदास के घर पर हुआ। गुरु रामदास के माता-पिता का निधन बालपन में ही हो गया। नानी के घर पर ही इनकी परवरिश हुई। गुरु रामदास ने जीवन में सद्गुणों अपनाने पर विशेष बल दिया था। उनका कहना था कि जिन लोगों का हृदय शुद्ध होता है, उन्हें भय नहीं सताता।
विज्ञापन
यही कारण है कि ईर्ष्या-द्वेष जैसे दुर्गुण रखने वाले व्यक्तियों के बारे में उन्होंने कहा है कि जिनके अंदर इस तरह के भाव होते हैं, उनका कभी भला नहीं होता है। गुरुजी मानवीय समता के बड़े समर्थक थे। उनका मानना था कि सभी लोग एक ही हवा और एक ही माटी के बने हैं तथा सभी में एक ही ज्योति समाई हुई है।
विज्ञापन
गुरुवार को कीर्तन दरबार सजा। दिल्ली से आए भाई जसप्रीत सिंह, जालंधर से आए भाई पहलवान सिंह ने कीर्तन किया। शबद-कीर्तन कर संगत को निहाल किया गया। कीर्तन दरबार के बाद दोपहर से अटूट लंगर बरता गया। साथ ही रात में रात्रि दीवान सजा। इस दौरान श्री गुरु रामदास साहिब के जीवन के बारे में भी जानकारी दी गई।
विज्ञापन
बताया गया कि गुरु रामदास का प्रकाश 1534 में लाहौर के चूना मंडी में हरदास के घर पर हुआ। गुरु रामदास के माता-पिता का निधन बालपन में ही हो गया। नानी के घर पर ही इनकी परवरिश हुई। गुरु रामदास ने जीवन में सद्गुणों अपनाने पर विशेष बल दिया था। उनका कहना था कि जिन लोगों का हृदय शुद्ध होता है, उन्हें भय नहीं सताता।
विज्ञापन
यही कारण है कि ईर्ष्या-द्वेष जैसे दुर्गुण रखने वाले व्यक्तियों के बारे में उन्होंने कहा है कि जिनके अंदर इस तरह के भाव होते हैं, उनका कभी भला नहीं होता है। गुरुजी मानवीय समता के बड़े समर्थक थे। उनका मानना था कि सभी लोग एक ही हवा और एक ही माटी के बने हैं तथा सभी में एक ही ज्योति समाई हुई है।