{"_id":"5ae0d7544f1c1b9f098b690f","slug":"benifit-of-sewer-system-in-rampur","type":"story","status":"publish","title_hn":"करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं मिल रहा लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं मिल रहा लाभ
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
Updated Thu, 26 Apr 2018 01:00 AM IST
विज्ञापन
रामपुर में सीवेज ट्रीटमेन्ट प्लांट का फोटो। अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
शहर को गंदगी से निजात दिलाने के लिए भले ही करोड़ों रुपये खर्च हो गए हों, लेकिन जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। सिर्फ सीवर चैंबर का काम पूरा न होने की वजह से करोड़ों का सीवरेज सिस्टम प्रोजेक्ट महज शोपीस बनकर रह गया है। जबकि इसका उद्घाटन भी किया जा चुका है।
पिछली सपा सरकार में साल 2005 में रामपुर में सीवरेज सिस्टम के प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को सौंपी गई। सीएंडडीएस ने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए शहर को चार जोन में बांट कर काम किया था।
विज्ञापन
पहले जोन में नवाब गेट, मिस्टन गंज, जेल रोड, सर्राफा बाजार, तोपखाना, राजद्वारा आदि क्षेत्र शामिल थे, जबकि दूसरे जोन में शाहबाद गेट, बरेली गेट, हाथीखाना, पुराना गंज आदि क्षेत्रों को शामिल किया गया।
विज्ञापन
तीसरे जोन में में सिविल लाइंस और चौथे जोन में ज्वालानगर का क्षेत्र शामिल किया गया था। जोन वन और जोन टू के लिए अलग-अलग सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बने। पहले जोन में 65.97 किलोमीटर, जबकि दूसरे जोन में 78 किलोमीटर सीवर लाइन डाली गई।
पहले जोन का घाटमपुर और दूसरे जोन का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट केमरी रोड पर पहाड़ी गांव के पास बनाया गया। बसपा सरकार में यह काम लटक गए, इसके बाद अखिलेश सरकार में इस प्रोजेक्ट पर फिर से काम हुआ। जोन वन और टू का काम पूरा होने के बाद तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खां ने इसका उद्घाटन भी कर दिया।
करीब दो सौ करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का लाभ जनता को अब भी मिलना शुरू नहीं हो सका। दरअसल, सीवरेज सिस्टम को चालू करने के लिए लोग कनेक्शन नहीं ले रहे हैं, जिस पर आजम खां ने यह काम भी सरकारी पैसे से कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दिलाई। सीवर चैंबर बनाने के लिए करीब बीस करोड़ रुपये दिलवाए, लेकिन सीएंडडीएस अब तक सीवर चैंबर बनाने का काम नहीं कर सका है, जिसके चलते करोड़ों रुपये का प्रोजेक्ट बेकार पड़ा है।