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Azam Khan: रामपुर में आजम खां ने सपा प्रत्याशी के समर्थन में की जनसभा, जनता से अपने रिश्तों का कराया अहसास

Mon, 13 Jun 2022 01:45 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला ब्यूरो, रामपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रामपुर Published by: विजय पुंडीर Updated Mon, 13 Jun 2022 01:45 AM IST
सार

जनसभा को संबोधित करते हुए आजम खां ने कहा कि कितनी बड़ी तहरीक चलाई थी बाबरी मस्जिद की, लेकिन किसी हिंदू देवी देवता के खिलाफ तौहीन का एक लफ्ज भी नहीं कहा। यदि कहा हो तो दिखा दो, पूरे परिवार के साथ रामपुर छोड़ दूंगा और कभी शक्ल नहीं दिखाऊंगा। ऐसा क्यों किया हमने, क्योंकि मेरा दीन कहता है कि किसी दूसरे मजहब की तौहीन न करो।

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azam khan held a public meeting in support of samajwadi party candidate in rampur
आजम खां ने सपा प्रत्याशी के समर्थन में की जनसभा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रविवार रात सपा विधायक आजम खां ने किला मैदान में सपा प्रत्याशी आसिम राजा के समर्थन में जनसभा की। इस दौरान उन्होंने जहां अपने जेल के समय से लेकर कोरोना संक्रमण तक की दुश्वारियों और उन पर हुईं कानूनी कार्रवाइयों को याद दिलाया तो वहीं रामपुर में गंगा-जमुनी तहजीब कायम रखने की अपील भी की। इस दौरान उन्होंने जनता से अपने रिश्तों का भी अहसास कराया और कहा कि मैं आज भी तुम्हारी मोहब्बतों का कर्जदार हूं।

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जनसभा को संबोधित करते हुए आजम खां ने कहा कि कितनी बड़ी तहरीक चलाई थी बाबरी मस्जिद की, लेकिन किसी हिंदू देवी देवता के खिलाफ तौहीन का एक लफ्ज भी नहीं कहा। यदि कहा हो तो दिखा दो, पूरे परिवार के साथ रामपुर छोड़ दूंगा और कभी शक्ल नहीं दिखाऊंगा। ऐसा क्यों किया हमने, क्योंकि मेरा दीन कहता है कि किसी दूसरे मजहब की तौहीन न करो। हमारे नबी को क्या-क्या नहीं कहा गया, लेकिन हमारे नबी ने कभी इंतकाम लिया। हमारे नबी ने कहा कि या अल्लाह इन्हें माफ कर दे। ये नादान हैं। ये नहीं जानते। इन्हें अक्ल दे।
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आजम खां ने हुजूर की शान में गुस्ताखी को लेकर कहा कि उस बदनसीब का साथ मत दो। उसे उसके नसीब पर छोड़ दो। रसूल की शान तो बहुत बड़ी है। अपने शहर, रिश्ते को उसी तरह जोड़कर रखो, जितना 1942 से अब तक जोड़कर रखा है। यहां कभी हिंदू-मुसलमान के बीच झगड़ा नहीं हुआ। कहा कि याद करो वो वक्त जब मक्का मदीना की गलियों में लोग रोते थे और कहते थे कि आज खत्म हो गया इस्लाम। दीन खत्म हो गया, क्योंकि मोहम्मद चले गए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अपने नबी की हिफाजत वो करेगा जो सातवें आसमान में रहता है। मैं जिंदा हूं, तो जिंदा हूं और जिंदा हूं, तो आप पर आंच नहीं आने दूंगा। कैसा भयानक कोरोना हुआ था, लेकिन, मैं वापस लौटकर आया हूं, तो तुम्हारे लिए। मैं आज भी तुम्हारी मोहब्बतों का कर्जदार हूं। मुझे मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन, मेरे कत्ल का इल्जाम नहीं लेना चाहते थे। उनका मंसूबा था कि सीतापुर जेल से तीन जनाजे बाहर निकलेंगे।
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उन्होंने नवाबों और अंग्रेजों के दौर को भी याद किया। उसने हमारे साथ जो किया था वो साजिशें आज भी जारी है। तुम्हारी तबाही और बर्बादी के मंसूबे आज भी तैयार होते हैं। उन्हें कामयाब मत होने देना। अपने आप को हरगिज कमजोर मत समझना। मेरे ऊपर जब पहला मुकदमा हुआ था तो मैं भी कुछ कर सकता था। मेरे ऊपर भैंस चोर, बकरी चोर, किताब चोर, डकैती जाने कैसे कैसे इल्जाम लगा दिए। मेरा बेटा दो साल जेल काटकर आया। मेरी बीबी एक साल तक जेल में रहीं, किसकी खातिर। हां, एक गुनाह है कि तुम्हारे हाथों और बच्चों के हाथों में कलम देने की कोशिश की। हमने इसी मैदान पर कहा था कि रामपुर को दुनिया के नक्शे पर लाऊंगा। लोग हंसते थे। लेकिन, ऐसा हुआ। आप गवाह हो तालीम और जुल्म के ताल्लुख के भी। आप पर बहुत जुल्म हुआ है। उन जुल्मों को याद करते हुए आने वाली 23 तारीख को वोट जरूर करना। कोई घर में मत बैठ जाना। उन्होंने सपा प्रत्याशी को जिताने की अपील की।

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