Azam-Abdullah: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आजम और अब्दुल्ला ने की तारीफ, आकाश सक्सेना ने भी कहा जिंदाबाद
कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने जौहर विवि में सील किए गए भवन से सील हटाने के आदेश दिए थे। इस पर सपा नेता आजम खां के बेटे एवं स्वार सीट से विधायक अब्दुल्ला आजम ने अपने ट्विटर हैँडल पर सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद लिखा था तो आजम खां ने भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट इतिहास रच रहा है।
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सपा नेता आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम और भाजपा नेता आकाश सक्सेना भले ही सियासत के मैदान से लेकर मुकदमेबाजी को लेकर एक-दूसरे के धुर विरोधी हों लेकिन, इन दिनों तीनों सुप्रीम कोर्ट को लेकर एक सुर में बोल रहे हैँ।
कभी अब्दुल्ला आजम अपने ट्विटर हैंडल पर सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद लिखते हैं तो कभी आजम खां कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने इतिहास रच रखा है और अब भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने भी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद कहा है।
कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने जौहर विवि में सील किए गए भवन से सील हटाने के आदेश दिए थे। इस पर सपा नेता आजम खां के बेटे एवं स्वार सीट से विधायक अब्दुल्ला आजम ने अपने ट्विटर हैँडल पर सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद लिखा था तो आजम खां ने भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट इतिहास रच रहा है।
वहीं जून माह में जब आजम खां को जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कार्रवाई पर टिप्पणी की थी उस वक्त भी अब्दुल्ला आजम ने अपने ट्विटर हैँडल पर सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद लिखा था। लेकिन, अब आजम खां के विरोधी भाजपा नेता आकश सक्सेना भी सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद बोल रहे हैं। ये अलग बात है कि उनके सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद कहने के पीछे वजह अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला है।
गौरतलब है कि आजम खां इस मुकदमे की कार्रवाई को समाप्त कराने के लिए पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट गए थे। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी है। भाजपा नेता ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं और सुप्रीम कोर्ट जिंदाबाद है।
वहीं आजम खां भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अपने पक्ष में बताते हैं और कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने स्टे देने से भले ही इंकार कर दिया है लेकिन, हमारी हाईकोर्ट के फैसले को लेकर जो अपील थी उस पर हमें राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट का वो फैसला लोअर कोर्ट पर बाध्यकारी नहीं होगा। लोअर कोर्ट स्वतंत्र रूप से अपना केस सुनेगी।
उन्होंने कहा कि हमारी ये मांग थी कि लोअर कोर्ट में सुनवाई के दौरान किसी तरह का दवाब न हो। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हमें राहत देते हुए निर्देश दिए हैं कि लोअर कोर्ट स्वतंत्र रूप से इस केस को सुने। इस केस में हाईकोर्ट के फैसले की कोई बाध्यता नहीं होगी। ये हमारे लिए बड़ी राहत है।