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आसमान से फिर बरसी आफत, सेब को करोड़ों का नुकसान
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रामपुर बुशहर। सेब की फसल पर एक बार फिर आसमान से सफेद आफत बरपी है। क्षेत्र में हुई भारी ओलावृष्टि ने बागवानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। हालत यह है कि पहले से ही मौसम की मार झेल रहे बागवानों की इस ओलावृष्टि ने कमर तोड़कर रख दी है। रविवार दोपहर बाद हुई ओलावृष्टि से रामपुर उपमंडल के गौरा क्षेत्र में करोड़ों रुपये की सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में अब हजारों बागवानों के सामने खासा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इस क्षेत्र में लाखों सेब पेटियों का उत्पादन होता है।
रविवार दोपहर बाद करीब पौने चार बजे रामपुर उपमंडल के कई इलाकों में भारी ओलावृष्टि हुई। सबसे अधिक ओलावृष्टि धारगौरा पंचायत, पशाड़ा, कोटी कापटी और डूगड़ू सहित आसपास के क्षेत्रों में हुई है। कुछ ही देर में यहां सेब बागीचों में आसमान से कहर बनकर आए ओलों की सफेद चादर बिछ गई, जबकि सड़कों पर भी ओलों की परत जम गई। सेब बहुल इन क्षेत्रों में अधिकतर लोगों की आर्थिकी सेब उत्पादन पर ही आधारित है। ओले से सेब के फलों सहित पत्ते भी झड़कर जमीन पर आ गिरे हैं।
बागवानों की वर्ष भर की मेहनत पर जहां पूर्व में हुई बर्फबारी भारी पड़ गई थी, वहीं रविवार को हुई ओलावृष्टि से रही सही कसर भी पूरी हो गई है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में बागवानों ने एंटी हेलनेट का प्रयोग किया है। मगर क्षेत्र में अधिक बगीचे बिना एंटी हेलनेट के हैं। इस वजह से अधिकतर पौधों को ओलावृष्टि से काफी क्षति पहुंची है।
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क्षेत्र के बागवान मोहन लाल शर्मा, केसी चौहान, ललित मोहन गौतम, आनंद नेगी सहित अन्य बागवानों ने कहा कि ओलावृष्टि से वर्ष भर की मेहनत पर पानी फिर गया है। उन्होंने प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग से सेब की फसल को हुए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि आर्थिक संकट के इस दौर में उन्हें पहुंचे नुकसान की कुछ भरपाई हो सके।
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रविवार दोपहर बाद करीब पौने चार बजे रामपुर उपमंडल के कई इलाकों में भारी ओलावृष्टि हुई। सबसे अधिक ओलावृष्टि धारगौरा पंचायत, पशाड़ा, कोटी कापटी और डूगड़ू सहित आसपास के क्षेत्रों में हुई है। कुछ ही देर में यहां सेब बागीचों में आसमान से कहर बनकर आए ओलों की सफेद चादर बिछ गई, जबकि सड़कों पर भी ओलों की परत जम गई। सेब बहुल इन क्षेत्रों में अधिकतर लोगों की आर्थिकी सेब उत्पादन पर ही आधारित है। ओले से सेब के फलों सहित पत्ते भी झड़कर जमीन पर आ गिरे हैं।
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बागवानों की वर्ष भर की मेहनत पर जहां पूर्व में हुई बर्फबारी भारी पड़ गई थी, वहीं रविवार को हुई ओलावृष्टि से रही सही कसर भी पूरी हो गई है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में बागवानों ने एंटी हेलनेट का प्रयोग किया है। मगर क्षेत्र में अधिक बगीचे बिना एंटी हेलनेट के हैं। इस वजह से अधिकतर पौधों को ओलावृष्टि से काफी क्षति पहुंची है।
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क्षेत्र के बागवान मोहन लाल शर्मा, केसी चौहान, ललित मोहन गौतम, आनंद नेगी सहित अन्य बागवानों ने कहा कि ओलावृष्टि से वर्ष भर की मेहनत पर पानी फिर गया है। उन्होंने प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग से सेब की फसल को हुए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि आर्थिक संकट के इस दौर में उन्हें पहुंचे नुकसान की कुछ भरपाई हो सके।