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कृषि कानून वापस होने पर झूमे किसान, छोड़ी आतिशबाजी
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रामपुर। तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के साथ ही किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। किसान कहीं भांगड़े पर थिरके, तो कहीं आतिशबाजी छोड़ी। किसान का दफ्तर हो या खेत खलिहान हर तरफ खुशी का माहौल। बुजुर्ग से लेकर नौजवान तक जोश में नारेबाजी करते नजर आए। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान किया। इसके साथ रामपुर के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। किसान दोपहर को कार्यालय पर एकत्र हुए और जमकर आतिशबाजी छोड़ी। ढोल बजाकर जमकर थिरके। जिलाध्यक्ष हसीब अहमद ने कहा कि कृषि कानून वापस होना किसानों की जीत है। सरकार को पहले ही घोषणा कर देनी चाहिए थी लेकिन, सरकार ने ऐसा न करने से तमाम किसानों की मौत का कारण बन गई। कहा कि किसानों की अभी तमाम समस्याएं हैं। एमएसपी पर कानून बनना बाकी है। जब तक संसद में तीनों कानून रद्द नहीं होते, उनका आंदोलन जारी रहेगा। बाकी, समस्याओं का निस्तारण कराने के लिए किसान आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लखनऊ में होने वाली 22 नवंबर की महापंचायत में ज्यादा से ज्यादा किसान पहुंचे । इस मौके पर मोहम्मद मुस्तकीम, दरियाव सिंह, खुशीराम, साबिर अली, जुनैद, राजपाल सिंह चौधरी, ऋषि पाल सिंह, होरी लाल, मोहम्मद तालिब इरफान, रिजवान, विनोद, अमृतपाल भिंडर, संजीव बालियान, छोटेलाल, रतनलाल, लखविंदर सिंह, बग्गा सिंह, सरदार सिंह गुर्जर, रविंद्र सिंह गुर्जर, ठाकुर अजीत सिंह आदि किसान शामिल रहे।
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शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान किया। इसके साथ रामपुर के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। किसान दोपहर को कार्यालय पर एकत्र हुए और जमकर आतिशबाजी छोड़ी। ढोल बजाकर जमकर थिरके। जिलाध्यक्ष हसीब अहमद ने कहा कि कृषि कानून वापस होना किसानों की जीत है। सरकार को पहले ही घोषणा कर देनी चाहिए थी लेकिन, सरकार ने ऐसा न करने से तमाम किसानों की मौत का कारण बन गई। कहा कि किसानों की अभी तमाम समस्याएं हैं। एमएसपी पर कानून बनना बाकी है। जब तक संसद में तीनों कानून रद्द नहीं होते, उनका आंदोलन जारी रहेगा। बाकी, समस्याओं का निस्तारण कराने के लिए किसान आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लखनऊ में होने वाली 22 नवंबर की महापंचायत में ज्यादा से ज्यादा किसान पहुंचे । इस मौके पर मोहम्मद मुस्तकीम, दरियाव सिंह, खुशीराम, साबिर अली, जुनैद, राजपाल सिंह चौधरी, ऋषि पाल सिंह, होरी लाल, मोहम्मद तालिब इरफान, रिजवान, विनोद, अमृतपाल भिंडर, संजीव बालियान, छोटेलाल, रतनलाल, लखविंदर सिंह, बग्गा सिंह, सरदार सिंह गुर्जर, रविंद्र सिंह गुर्जर, ठाकुर अजीत सिंह आदि किसान शामिल रहे।
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