{"_id":"47-33220","slug":"Rampur-33220-47","type":"story","status":"publish","title_hn":"वक्त की कद्र और मेहनत की ताकीद ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वक्त की कद्र और मेहनत की ताकीद
Rampur
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:33 AM IST
विज्ञापन
रामपुर। मर्कजी दर्सगाहे एहले सुन्नत अलजामेअतुल इस्लामिया के तलबा को इल्मेदीन सीखने के टिप्स दिए। वक्त की कद्र और मेहनत करने की ताकीद की। हर हाल में तालीमी सफर जारी करने का मशविरा दिया।
हमदर्द यूनिवर्सिटी दिल्ली में इस्लामियत डिपार्टमेंट के हेड डा. गुलाम यहया अंजुम पुराना गंज स्थित मर्कजी दर्सगाहे एहलेसुन्नत पहुंचे। शैखुल हदीस जामेआ मुफ्ती सैयद शाहिद अली रजवी जमाली, अराकीन मदर्रिसीन और तलबा ने नारा-ए-तकबीर और रिसालत से उनका पुरजोश इस्तकबाल किया। नाजिमे आला ने उनका तआरुफ कराया। जलसे में डा. गुलाम यहया अंजुम ने बड़ी नसीहत आमेज गुफ्तगू फरमाई। उन्होंने तलबा को इल्मेदीन सीखने के गुर बताए। उन्होंने कहा कि कम खाना, कम बोलना, कम सोना और किताब से शगफ रखना तालिबे इल्म के लिए बहुत जरूरी है। तलबा वक्त की कद्र करें, मेहनत और जद्दोजहद को अपनी जिंदगी का मकसद बनाएं। ऐसे करेंगे तो कामयाबी दूर नहीं।
उन्होंने कहा कि जो लोग तकलीफों से घबराते और सुख की तलाश में रहते हैं वे कभी मंजिलें मकसूद को नहीं पा सकते। तलबा को कुछ बनने के लिए हर वक्त आजमाइशों के लिए तैयार रहना चाहिए। हर हाल में अपना तालीमी सफर जारी रखें। इसके बाद सलातो सलाम हुआ। जामेआ के नायब शैखुल हदीस मुफ्ती नजफ अली कादरी ने दुआ कराई। जलसे में सगीर अहमद अजहरी, मुफ्ती अली अहमद, मौलाना वली मोहम्मद, मुफ्ती यूनुस, मौलाना रियाज अरशद, मौलाना मुश्ताक, मुस्लिम मुईन कुरैशी, जाहिद मकसूद, बाबू जमाली, नोशे अली चिश्ती, हकीम सगीर, अहमद खां नूरी, मौलाना रफी नूरी, बरकतुल्लाह खां नक्शबंदी, सैयद जाहिद अली, कारी इदरीस अहमद भी थे। आखिर में मेहमानों को शाल पेश कर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
हमदर्द यूनिवर्सिटी दिल्ली में इस्लामियत डिपार्टमेंट के हेड डा. गुलाम यहया अंजुम पुराना गंज स्थित मर्कजी दर्सगाहे एहलेसुन्नत पहुंचे। शैखुल हदीस जामेआ मुफ्ती सैयद शाहिद अली रजवी जमाली, अराकीन मदर्रिसीन और तलबा ने नारा-ए-तकबीर और रिसालत से उनका पुरजोश इस्तकबाल किया। नाजिमे आला ने उनका तआरुफ कराया। जलसे में डा. गुलाम यहया अंजुम ने बड़ी नसीहत आमेज गुफ्तगू फरमाई। उन्होंने तलबा को इल्मेदीन सीखने के गुर बताए। उन्होंने कहा कि कम खाना, कम बोलना, कम सोना और किताब से शगफ रखना तालिबे इल्म के लिए बहुत जरूरी है। तलबा वक्त की कद्र करें, मेहनत और जद्दोजहद को अपनी जिंदगी का मकसद बनाएं। ऐसे करेंगे तो कामयाबी दूर नहीं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जो लोग तकलीफों से घबराते और सुख की तलाश में रहते हैं वे कभी मंजिलें मकसूद को नहीं पा सकते। तलबा को कुछ बनने के लिए हर वक्त आजमाइशों के लिए तैयार रहना चाहिए। हर हाल में अपना तालीमी सफर जारी रखें। इसके बाद सलातो सलाम हुआ। जामेआ के नायब शैखुल हदीस मुफ्ती नजफ अली कादरी ने दुआ कराई। जलसे में सगीर अहमद अजहरी, मुफ्ती अली अहमद, मौलाना वली मोहम्मद, मुफ्ती यूनुस, मौलाना रियाज अरशद, मौलाना मुश्ताक, मुस्लिम मुईन कुरैशी, जाहिद मकसूद, बाबू जमाली, नोशे अली चिश्ती, हकीम सगीर, अहमद खां नूरी, मौलाना रफी नूरी, बरकतुल्लाह खां नक्शबंदी, सैयद जाहिद अली, कारी इदरीस अहमद भी थे। आखिर में मेहमानों को शाल पेश कर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन