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शिवोहम में समाहित है अखंड आनंद: डॉ. वासंतेय
Updated Wed, 15 Aug 2018 01:21 AM IST
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रामपुर। श्री जितेंद्र चंद्र भारतीय महायोग शोध संस्थान एवं श्री त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ में शिव जी की उपासना की गई। इस दौरान संस्थापक आचार्य डॉ. राधेश्याम शर्मा वासंतेय ने कहा कि भगवान शिव की सत्ता सर्वव्यापी है। जब हमें इस परम सत्य का आभास हो जाता कि सभी में शिव तत्व है और हम सब शिव तत्व से जुड़े हुए है। तो यह भाव शिवोहम का है। शिवोहम यानी सब शिव है। प्रत्येक आत्मा में शिव का निवास है।
उन्होंने कहा कि शिव तत्व में रूद्र तत्व विद्यमान है। रू का अर्थ है दुख और द्र का अर्थ है द्रवित करना या हटाना। इसलिए भगवान शिव दुख को हटाने वाले देवता है। शिव ही दाता हैं और शिव ही भोक्ता हैं। जो दिखाई पड रहा है यह सब शिव है। शिव का अर्थ है, जिसे सब चाहते हैं और सभी अखंड आनंद को चाहते हैं। शिव आनंद, परम मंगल और परम कल्याण स्वरूप हैं। वेदों में वर्णित है कि मैं शिव तू शिव सब कुछ शिवमय है। उन्होंने बताया कि तो सृष्टि में है वही पिंड में है, यथा पिण्डे तथा ब्रम्हाण्डे। समस्त शरीरों का अंतिम आधार एक परम आध्यात्मिक शक्ति ही है। यह शक्ति पिण्ड में कुण्डलिनी के रूप में स्थित है। शिव का रूप साकार और निराकार दोनो है। शिव तत्व में जीवन का सार समाहित है। प्रत्येक क्षण उन्हीं का रूप प्रतीत होता है। कहा कि आने वाली शिवरात्रि को शिव साधना में लीन रहे और शिव कृपा प्राप्त करें। शिव भक्ति के भाव को आत्मसात करने से व्यवहार में मानवता आती है। वास्तविकता का ज्ञान होने से संसार की माया में मन नहीं फंसता। इस दौरान लोगों ने शिव पूजन किया। तमाम भक्त उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि शिव तत्व में रूद्र तत्व विद्यमान है। रू का अर्थ है दुख और द्र का अर्थ है द्रवित करना या हटाना। इसलिए भगवान शिव दुख को हटाने वाले देवता है। शिव ही दाता हैं और शिव ही भोक्ता हैं। जो दिखाई पड रहा है यह सब शिव है। शिव का अर्थ है, जिसे सब चाहते हैं और सभी अखंड आनंद को चाहते हैं। शिव आनंद, परम मंगल और परम कल्याण स्वरूप हैं। वेदों में वर्णित है कि मैं शिव तू शिव सब कुछ शिवमय है। उन्होंने बताया कि तो सृष्टि में है वही पिंड में है, यथा पिण्डे तथा ब्रम्हाण्डे। समस्त शरीरों का अंतिम आधार एक परम आध्यात्मिक शक्ति ही है। यह शक्ति पिण्ड में कुण्डलिनी के रूप में स्थित है। शिव का रूप साकार और निराकार दोनो है। शिव तत्व में जीवन का सार समाहित है। प्रत्येक क्षण उन्हीं का रूप प्रतीत होता है। कहा कि आने वाली शिवरात्रि को शिव साधना में लीन रहे और शिव कृपा प्राप्त करें। शिव भक्ति के भाव को आत्मसात करने से व्यवहार में मानवता आती है। वास्तविकता का ज्ञान होने से संसार की माया में मन नहीं फंसता। इस दौरान लोगों ने शिव पूजन किया। तमाम भक्त उपस्थित रहे।
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