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बच्चों के स्वास्थ्य का दु:श्मन है पेट के कीडें, सीएमओ
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रामपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अर्न्तगत राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर जनपद के लक्षित आठ लाख से ज्यादा 1 वर्ष से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को एल्बेंडाजोल दवाई खिलाई गई।
सीएमओ डा सुबोध कुमार शर्मा ने कहा कि पेट के कीडे शरीर के पोषक तत्वों को खा जाते है। जिससे शरीर कुपोषित रह जाता है। कुपोषण के कारण बच्चे कई तरह के रोगों से ग्रसित हो जाते है और कमजोरी के कारण राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान देने में पिछड़ जाते है। इसलिए सभी अभिभावकों से अनुरोध है कि अपने बच्चों को कीडे़ की दवा अवश्य खिलवाएं। नोडल अधिकारी राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान डॉ. राकेश चंद्रा ने कहा कि जिले के सभी स्कूलों मदरसों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों के माध्यम से कीड़ों की दवाएं खिलाई जा रही है। एक मार्च को बच्चों को भी कृमि मुक्ति की दवा खिला कर पेट के कीड़ों से मुक्ति प्रदान कर कुपोषण से बचाने का एक कदम बढ़ाया जाएगा। डा0 चंद्रा एवं डीसीपीएम प्रभात कुमार ने विद्यालयों में भ्रमण कर बच्चों को कृमि मुक्ति दवा के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पेट में उत्पन्न होने वाले कीडे़ भोजन को चट कर जाते हैं। इस कारण भोजन से मिलने वाला पोषण हमें नहीं मिल पाता जिसके कारण हमारा दिमाग कमजोर होने लगता है ।पढ़ाई में क्षमता नहीं लगा पाते है। इसलिए पेट के कीड़ों को मारना जरूरी है।
सीएमओ डा सुबोध कुमार शर्मा ने कहा कि पेट के कीडे शरीर के पोषक तत्वों को खा जाते है। जिससे शरीर कुपोषित रह जाता है। कुपोषण के कारण बच्चे कई तरह के रोगों से ग्रसित हो जाते है और कमजोरी के कारण राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान देने में पिछड़ जाते है। इसलिए सभी अभिभावकों से अनुरोध है कि अपने बच्चों को कीडे़ की दवा अवश्य खिलवाएं। नोडल अधिकारी राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान डॉ. राकेश चंद्रा ने कहा कि जिले के सभी स्कूलों मदरसों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों के माध्यम से कीड़ों की दवाएं खिलाई जा रही है। एक मार्च को बच्चों को भी कृमि मुक्ति की दवा खिला कर पेट के कीड़ों से मुक्ति प्रदान कर कुपोषण से बचाने का एक कदम बढ़ाया जाएगा। डा0 चंद्रा एवं डीसीपीएम प्रभात कुमार ने विद्यालयों में भ्रमण कर बच्चों को कृमि मुक्ति दवा के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पेट में उत्पन्न होने वाले कीडे़ भोजन को चट कर जाते हैं। इस कारण भोजन से मिलने वाला पोषण हमें नहीं मिल पाता जिसके कारण हमारा दिमाग कमजोर होने लगता है ।पढ़ाई में क्षमता नहीं लगा पाते है। इसलिए पेट के कीड़ों को मारना जरूरी है।
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