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मंदिर बनाने वाले ही तारीख पूछेंगे तो मंदिर कैसे बनेगा
Updated Mon, 26 Nov 2018 12:09 AM IST
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रामपुर। शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के मंदिर बनाने की तारीख पूछने के बयान पर सपा नेता आजम खां ने कहा है कि अगर मंदिर बनाने वाले भी तारीख पूछेंगे तो फिर मंदिर कैसे बनेगा। उन्होंने कहा कि यह तो खुद तारीख बताने वाले हैं। भारत सरकार में हिस्सेदार हैं। यह तो बड़ी कमशर्मी की बात है कि जो लोग भारत सरकार में हैं और जिन्होंने मस्जिद गिराई है, वह मंदिर बनाने की तारीख पूछ रहे हैं।
रविवार को पत्रकारों से बातचीत में आजम खां ने कहा कि यह सच्ची बात है कि भाजपा ने मस्जिद नहीं गिराई थी और शिवसेना ने इस वक्त मंदिर बनाने की अगुवाई की है। इस संग्राम में मुसलमान कहीं नहीं है और हम तो एक बात और कहना चाहते हैं अपने हिंदू भाइयों से खासतौर से। जब तक छह दिसंबर 1992 नहीं आया था और मस्जिद के मिम्बर पर मूर्तियां रखीं थी वह अल्लाह के घर यानी मस्जिद का अपमान था।
वो हमें मजबूरी में सहना पड़ा, लेकिन छह दिसम्बर 1992 को कम से कम इस अपमान से हमें छुट्टी मिल गई कि वहां से मस्जिद का हर निशान मिट गया। बाकी चीजें इतिहास तय करेगा लेकिन जो मस्जिद का अपमान हो रहा था वह छह दिसंबर 1992 को खत्म हो गया। आजम खां ने कहा कि 1949 से वहां मंदिर है इमारत की शक्ल बदल जाए इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। मंदिर कब बनेगा? कब निर्माण शुरू होगा? यह भाजपा तय करेगी हम तो करेंगे नहीं।
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उन्होंने कहा कि समझ में यह आ रहा है कि यह जो जमावड़ा है यह भाजपा को डराने से ज्यादा सुप्रीम कोर्ट को डराने की कोशिश है। ताकि अदालत को यह बताया जा सके कि देश के सेंटीमेंट्स क्या हैं ये सेंटीमेंटस पूरे देश के नहीं हैं। ये सेंटीमेंट्स उन कुछ लेागों के हैं जो अभी भाजपा में आस्था रखते हैं और शिवसेना में। बाकी हिंदुस्तान अमन चाहता है चाहे हिंदू हो, मुसलमान, सिख, ईसाई जैन पारसी हों।
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बयान पर कि मंदिर बनाना भी क्या चुनावी जुमला था इस पर आजम खां ने कहा कि वहां तो राम जन्म स्थान भी चार-पांच हैं। अयोध्या में पता नहीं हिंदू भाइयों को मालूम है कि नहीं। वहां तो झगड़ा ही यही है महंतों के बीच एक कहते हैं यह है दूसरे कहते हैं यह है तीसरे कहते हैं यह है। अभी तो यह ही तय नहीं हुआ कि असल कौन सा है?
आजम खां ने कहा कि असल में यह सारी बदतमीजी अकबर बादशाह के जमाने में हुई है। अब बताओ जोधा से क्यों शादी कर ली आपने? यह बदतमीजी की बात है और उनके भाई को सिपहसालार बना दिया और वो तैयार भी गए। बदतमीजी तो तब से शुरू हुई उसको पूरा कर दिया मुख्तार अब्बास नकवी ने और शाहनवाज साहब ने। अब यह बताएं कि यह लव जेहाद है कि नहीं।
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रविवार को पत्रकारों से बातचीत में आजम खां ने कहा कि यह सच्ची बात है कि भाजपा ने मस्जिद नहीं गिराई थी और शिवसेना ने इस वक्त मंदिर बनाने की अगुवाई की है। इस संग्राम में मुसलमान कहीं नहीं है और हम तो एक बात और कहना चाहते हैं अपने हिंदू भाइयों से खासतौर से। जब तक छह दिसंबर 1992 नहीं आया था और मस्जिद के मिम्बर पर मूर्तियां रखीं थी वह अल्लाह के घर यानी मस्जिद का अपमान था।
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वो हमें मजबूरी में सहना पड़ा, लेकिन छह दिसम्बर 1992 को कम से कम इस अपमान से हमें छुट्टी मिल गई कि वहां से मस्जिद का हर निशान मिट गया। बाकी चीजें इतिहास तय करेगा लेकिन जो मस्जिद का अपमान हो रहा था वह छह दिसंबर 1992 को खत्म हो गया। आजम खां ने कहा कि 1949 से वहां मंदिर है इमारत की शक्ल बदल जाए इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। मंदिर कब बनेगा? कब निर्माण शुरू होगा? यह भाजपा तय करेगी हम तो करेंगे नहीं।
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उन्होंने कहा कि समझ में यह आ रहा है कि यह जो जमावड़ा है यह भाजपा को डराने से ज्यादा सुप्रीम कोर्ट को डराने की कोशिश है। ताकि अदालत को यह बताया जा सके कि देश के सेंटीमेंट्स क्या हैं ये सेंटीमेंटस पूरे देश के नहीं हैं। ये सेंटीमेंट्स उन कुछ लेागों के हैं जो अभी भाजपा में आस्था रखते हैं और शिवसेना में। बाकी हिंदुस्तान अमन चाहता है चाहे हिंदू हो, मुसलमान, सिख, ईसाई जैन पारसी हों।
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बयान पर कि मंदिर बनाना भी क्या चुनावी जुमला था इस पर आजम खां ने कहा कि वहां तो राम जन्म स्थान भी चार-पांच हैं। अयोध्या में पता नहीं हिंदू भाइयों को मालूम है कि नहीं। वहां तो झगड़ा ही यही है महंतों के बीच एक कहते हैं यह है दूसरे कहते हैं यह है तीसरे कहते हैं यह है। अभी तो यह ही तय नहीं हुआ कि असल कौन सा है?
आजम खां ने कहा कि असल में यह सारी बदतमीजी अकबर बादशाह के जमाने में हुई है। अब बताओ जोधा से क्यों शादी कर ली आपने? यह बदतमीजी की बात है और उनके भाई को सिपहसालार बना दिया और वो तैयार भी गए। बदतमीजी तो तब से शुरू हुई उसको पूरा कर दिया मुख्तार अब्बास नकवी ने और शाहनवाज साहब ने। अब यह बताएं कि यह लव जेहाद है कि नहीं।