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डायट में शिक्षकों की कमी के चलते लटका मूल्यांकन
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रामपुर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में डीएलएड 2017 द्वितीय सेमेस्टर और 2018 प्रथम सेमेस्टर की करीब बीस हजार उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होना था। लेकिन, स्टाफ की कमी की वजह से मूल्यांकन का कामकाज अब तक शुरु नहीं हो सका है। यहां तक कि निजी कालेजों ने भी अनुबंधित शिक्षकों को देने से इंकार कर दिया। इससे उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है।
शिक्षक बनने के लिए हर साल बीटीसी डीएलएड कराया जाता है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान व निजी कालेजों के जरिए संचालित इस कोर्स के बाद सेमेस्टर के अनुसार परीक्षाएं होती हैं। ऐसे में सरकार की ओर से 2017 के द्वितीय सेमेस्टर एवं 2018 के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं कराई गईं थीं। इसके बाद अब उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होना है। रामपुुर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में करीब बीस हजार उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के लिए आईं हैं। इनका मूल्यांकन 21 फरवरी से 18 मार्च तक किया जाना है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण मूल्यांकन अभी तक शुरु नहीं हो सका है। जबकि, मार्च माह की तीन तारीख भी आ चुकी है। हालांकि, डायट प्राचार्य की ओर से शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए निजी कालेजों से भी अनुबंधित शिक्षकों की मांग की थी, लेकिन निजी कालेजों ने शिक्षकों को देने से इंकार कर दिया। इसके चलते उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन लटका हुआ है। यहां तक कि अब सिर्फ पंद्रह दिन शेष हैं। ऐसे में समय से मूल्यांकन नहीं हुआ तो डीएलएड प्रशिक्षुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
शिक्षक बनने के लिए हर साल बीटीसी डीएलएड कराया जाता है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान व निजी कालेजों के जरिए संचालित इस कोर्स के बाद सेमेस्टर के अनुसार परीक्षाएं होती हैं। ऐसे में सरकार की ओर से 2017 के द्वितीय सेमेस्टर एवं 2018 के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं कराई गईं थीं। इसके बाद अब उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होना है। रामपुुर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में करीब बीस हजार उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के लिए आईं हैं। इनका मूल्यांकन 21 फरवरी से 18 मार्च तक किया जाना है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण मूल्यांकन अभी तक शुरु नहीं हो सका है। जबकि, मार्च माह की तीन तारीख भी आ चुकी है। हालांकि, डायट प्राचार्य की ओर से शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए निजी कालेजों से भी अनुबंधित शिक्षकों की मांग की थी, लेकिन निजी कालेजों ने शिक्षकों को देने से इंकार कर दिया। इसके चलते उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन लटका हुआ है। यहां तक कि अब सिर्फ पंद्रह दिन शेष हैं। ऐसे में समय से मूल्यांकन नहीं हुआ तो डीएलएड प्रशिक्षुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
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