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जीएसटी से मैंथा उद्योग पर गहराए संकट के बादल

Tue, 10 Oct 2017 01:15 AM IST
Updated Tue, 10 Oct 2017 01:15 AM IST
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जीएसटी से मैंथा उद्योग पर गहराए संकट के बादल
जीएसटी से मैंथा उद्योग पर गहराए संकट के बादल
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रामपुर। जीएसटी से मैंथा उद्योग पर संकट के बादल हैं। उद्यमियों को तीन माह से जीएसटी रिफंड वापस नहीं मिला है, जबकि सरकार ने जीएसटी आर-3 फार्म भरने के सात दिन बाद जीएसटी वापस करने का भरोसा दिया था। ऐसे में मंडल की एक्सपोर्ट यूनिटों के करीब ढाई सौ करोड़ रुपये फंसे हैं। पैसे का फ्लो न होने की वजह से यूनिटें कच्चे माल की खरीद नहीं कर पा रही हैं, जिससे मंडल की तमाम मैंथा एक्सपोर्ट यूनिटें बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं।
दुनिया में सिर्फ नेचुरल मैंथा ही वह उत्पाद है जिसका 99 फीसद उत्पादन सिर्फ भारत में होता है। इसमें भी देश का करीब 80 फीसदी मैंथा सिर्फ उत्तर प्रदेश में होता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को मैंथॉल का हब कहा जाता है। मुरादाबाद मंडल में ही रामपुर, संभल और चंदौसी में मैंथा की बड़ी-बड़ी बीस एक्सपोर्ट यूनिटें हैं। यहां से हर साल करीब ढाई से तीन हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया जाता है, लेकिन देश में जबसे जीएसटी लागू हुआ है, तब से मैंथा उद्योग बुरी तरह प्रभावित है। दरअसल, सरकार ने जीएसटी लागू करते समय कहा था कि जीएसटी रिफंड के लिए उद्यमियों को जीएसटी आर-3 फार्म भरना होगा, जिसके सात दिन बाद उद्यमियों के खाते में रिफंड पहुंच जाएगा। किन्तु, सात दिन तो दूर तीन माह से उद्यमियों को रिफंड नहीं मिल सका है।
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सिस्टम की सुस्ती का आलम यह है कि जीएसटी पोर्टल पर जीएसटी आर-3 फार्म ही उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उद्यमी जीएसटी आर-3 नहीं भर पा रहे हैं, जिस कारण उद्यमियों के रिफंड का पैसा सरकार पर फंसा हुआ है। सिर्फ मुरादाबाद मंडल की ही बीस एक्सपोर्ट यूनिटों का करीब ढाई सौ करोड़ रुपये का रिफंड फंसा हुआ है। ऐसे में पैसे का फ्लो बंद हो गया है। उद्यमी कच्चे माल की खरीद नहीं कर पा रहे हैं, जिस कारण तमाम मैंथा यूनिटें बंदी की कगार पर पहुंच गई है।
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इंडियन मिंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विष्णु कपूर बताते हैं कि सरकार ने जीएसटी तो लागू कर दिया, लेकिन व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं कीं। इसका नतीजा यह है कि आज मैंथा उद्योग तबाह हो चुका है। उन्होंने बताया की सरकार ने कहा कि था कि प्रत्येक माह के जीएसटी रिटर्न का रिफंड अगले माह जीएसटी आर-3 फार्म भरने के सात दिनों में खाते में पहुंच जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हमारे ही करीब चार करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। अब कच्चा माल खरीदने के लिए पैैसा ही नहीं होगा, तो फिर कारोबार कैसे हो जाएगा? पूरे प्रदेश में मैंथा उद्योग का यही हाल है।
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यहां से एक्सपोर्ट होते हैं ये उत्पाद
रामपुर। यहां से अमेरिका, कनाडा, नीदरलैंड, इंग्लैंड आदि देशों में मैंथॉल उत्पादों का निर्यात किया जाता है। रामपुर के मैंथॉल बोल्ड क्रिस्टल, मैंथॉन, सिस-3 हेक्जानॉल, डीएमओ, मैंथा पाइपरैटा, लीवो मैंथॉल आदि उत्पादों की विदेेशों में बड़ी मांग रहती है।

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व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हुईं
सरकार ने जीएसटी तो लागू कर दिया, लेकिन व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं कीं। इसका नतीजा यह है कि आज मैंथा उद्योग तबाह हो चुका है। जीएसटी रिटर्न का रिफंड का करीब चार करोड़ रुपया फंसा हुआ है। कच्चा माल खरीदने के लिए हमारे पास पैैसा नहीं है। कारोबार प्रभावित हो रहा है।
विष्णु कपूर, इंडियन मिंट एसोसिएशन के अध्यक्ष
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