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वायरल वीडियो में कुछ और, जांच के दौरान मिले ड्रम कुछ और ड्रम
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रायबरेली। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के मेट के प्लाट में मिले ड्रमों के वायरल वीडियो के मामले की जांच शुरू हो गई है, लेकिन इसे अब दबाने की कोशिश की जा रही है। विभाग में तैनात डामर की तस्करी करने वाले जालसाजों के आगे अधिकारी भी जांच में हकीकत पता नहीं कर पाए।
वजह अधिकारियों के जांच करने से पहले ही ड्रमों की अदली-बदली कर दी गई है। यही वजह है कि वायरल वीडियो में कुछ और, जबकि जांच के दौरान मिले ड्रम कुछ और हैं।
यही नहीं वायरल वीडियो में भरे ड्रम हैं, जबकि जांच के दौरान जो ड्रम दिखाए गए हैं, वह खाली हैं। मामला डीएम तक पहुुंचने के बाद अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं। अधिकारी पूरे प्रकरण को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं डीएम मामले में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड में तैनात एक मेट के प्लाट में कई ड्रम रखे होने का वीडियो दो मार्च को सोशल मीडिया में वायरल हुआ था।
इस वीडियो से स्पष्ट हो रहा है कि इसमें कई ड्रम रखे हैं, जो ऊपर से ढके हुुए हैं। साथ ही दो लाल रंग ड्रम हैं। मामला उस समय गरमा गया, जब जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इस मामले को संज्ञान लिया।
डीएम के निर्देश पर दो दिन बाद मुख्य विकास अधिकारी प्रभाष कुमार और लोक निर्माण के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार कुरील ने मौके पर जाकर जांच की।
दोनों अधिकारियों ने बताया कि जो ड्रम मिले हैं, वह लोक निर्माण विभाग के किसी खंड के नहीं है। यह भी बताया कि मेट ड्रम मेट के भाई के हैं, जो अन्य जनपदों में ठेकेदारी करता है।
खास बात यह है कि जो ड्रम मौके पर मिले हैं, उसका मेल सोशल मीडिया में वायरल ड्रमों से मेल नहीं खा रहा है। जांच के दौरान मिले ड्रम अधिक काले हैं, जबकि वायरल वीडियो में मिले ड्रम साफ हैं, जिसमें दो ड्रम लाल भी हैं। इससे साफ जाहिर है कि जांच के पहले ही ड्रमों की अदली बदली कर ली गई।
पहले भी पकड़ा जा चुका मामला, लेकिन दब गई जांच
यह कोई पहला मामला नहीं, जब डामर तस्करी का खेल विभाग में उजागर हुआ हो। इससे पहले भी विभाग में तैनात एक ड्राइवरकी ओर से डामर की सौदेबाजी करने का मामला उजागर हुआ था।
उस समय ड्राइवर ने सेटिंग-गेटिंग करके मामले को दबा लिया था। अधिकारियों तक मामला पहुंचा था, लेकिन उसकी जांच दब गई थी। इसी लापरवाही का नतीजा है कि अब एक और डामर तस्करी का खेल उजागर हुआ, जो अफसरों की गले की फांस बन गया है।
काफी समय से सक्रिय है गिरोह
लोक निर्माण विभाग में तैनात ड्राइवर-बाबुओं और ठेकेदारों का गठजोड़ बहुत पुराना है। यह गठजोड़ ही विभाग में डामर की सौदेबाजी का जरिया बना है।
इसके जरिए सभी हर साल करोड़ों रुपये का वारा न्यारा करते हैं। किस सड़क में कितना धन खर्च होना है, कितना डामर का प्रयोग किया जाना है, यह फाइलों में तो लिखा जाता है, लेकिन हकीकत में कुछ और ही होता है। सेटिंग-गेटिंग के कारण अधिकारी भी मामले में कार्रवाई नहीं करते।
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के मेट के प्लाट में मिले ड्रमों के वायरल वीडियो के मामले की जांच कराई जा रही है। प्रकरण की पूरी जांच के बाद ही मामले की असलियत सामने आएगी। मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
दिनेश कुमार कुरील, अधिशासी अभियंता
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वजह अधिकारियों के जांच करने से पहले ही ड्रमों की अदली-बदली कर दी गई है। यही वजह है कि वायरल वीडियो में कुछ और, जबकि जांच के दौरान मिले ड्रम कुछ और हैं।
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यही नहीं वायरल वीडियो में भरे ड्रम हैं, जबकि जांच के दौरान जो ड्रम दिखाए गए हैं, वह खाली हैं। मामला डीएम तक पहुुंचने के बाद अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं। अधिकारी पूरे प्रकरण को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं डीएम मामले में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड में तैनात एक मेट के प्लाट में कई ड्रम रखे होने का वीडियो दो मार्च को सोशल मीडिया में वायरल हुआ था।
इस वीडियो से स्पष्ट हो रहा है कि इसमें कई ड्रम रखे हैं, जो ऊपर से ढके हुुए हैं। साथ ही दो लाल रंग ड्रम हैं। मामला उस समय गरमा गया, जब जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इस मामले को संज्ञान लिया।
डीएम के निर्देश पर दो दिन बाद मुख्य विकास अधिकारी प्रभाष कुमार और लोक निर्माण के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार कुरील ने मौके पर जाकर जांच की।
दोनों अधिकारियों ने बताया कि जो ड्रम मिले हैं, वह लोक निर्माण विभाग के किसी खंड के नहीं है। यह भी बताया कि मेट ड्रम मेट के भाई के हैं, जो अन्य जनपदों में ठेकेदारी करता है।
खास बात यह है कि जो ड्रम मौके पर मिले हैं, उसका मेल सोशल मीडिया में वायरल ड्रमों से मेल नहीं खा रहा है। जांच के दौरान मिले ड्रम अधिक काले हैं, जबकि वायरल वीडियो में मिले ड्रम साफ हैं, जिसमें दो ड्रम लाल भी हैं। इससे साफ जाहिर है कि जांच के पहले ही ड्रमों की अदली बदली कर ली गई।
पहले भी पकड़ा जा चुका मामला, लेकिन दब गई जांच
यह कोई पहला मामला नहीं, जब डामर तस्करी का खेल विभाग में उजागर हुआ हो। इससे पहले भी विभाग में तैनात एक ड्राइवरकी ओर से डामर की सौदेबाजी करने का मामला उजागर हुआ था।
उस समय ड्राइवर ने सेटिंग-गेटिंग करके मामले को दबा लिया था। अधिकारियों तक मामला पहुंचा था, लेकिन उसकी जांच दब गई थी। इसी लापरवाही का नतीजा है कि अब एक और डामर तस्करी का खेल उजागर हुआ, जो अफसरों की गले की फांस बन गया है।
काफी समय से सक्रिय है गिरोह
लोक निर्माण विभाग में तैनात ड्राइवर-बाबुओं और ठेकेदारों का गठजोड़ बहुत पुराना है। यह गठजोड़ ही विभाग में डामर की सौदेबाजी का जरिया बना है।
इसके जरिए सभी हर साल करोड़ों रुपये का वारा न्यारा करते हैं। किस सड़क में कितना धन खर्च होना है, कितना डामर का प्रयोग किया जाना है, यह फाइलों में तो लिखा जाता है, लेकिन हकीकत में कुछ और ही होता है। सेटिंग-गेटिंग के कारण अधिकारी भी मामले में कार्रवाई नहीं करते।
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के मेट के प्लाट में मिले ड्रमों के वायरल वीडियो के मामले की जांच कराई जा रही है। प्रकरण की पूरी जांच के बाद ही मामले की असलियत सामने आएगी। मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
दिनेश कुमार कुरील, अधिशासी अभियंता