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महिलाओं को मिले सुरक्षा व विकास में भागीदारी
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Dec 2015 11:52 PM IST
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महिलाओं की माने तो नए वर्ष में सबसे पहले ऐसा कानून बने कि निर्भया जैसी पीड़ा समाज की किसी अन्य बेटी को न सहनी पड़े। महिलाओं को सुरक्षा मिले।
साथ ही विकास में पुरुषों के बराबर की भागीदारी हो। कानून व्यवस्था के साथ शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए। ताकि सबको अधिकार मिल सकें। हर किसी की अपेक्षा कि नया साल महिलाओं के लिए नया सबेरा साबित हो।
समाजसेवी डॉ. अमिता खुबेले का कहना है कि वर्ष 2015 में निर्भयाकांड ने समाज को झकझोर दिया। वर्तमान सरकार की ओर से नाबालिग की सजा के कानून में फेरबदल देर से उठाया गया अच्छा कदम है। नए साल में जिले में महिलाओं को रोजगार, सुरक्षा मिले। इसके लिए शासन और प्रशासन स्तर पर पहल होनी चाहिए।
सेवानिवृत्त सीएमएस डॉ. शांति सिंह ने कहा कि समाज में बेटियां असुरक्षित होती जा रही हैं। नए वर्ष में बेटियों को सुरक्षित करने के लिए अधिक सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
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बेटी बचाने के लिए अभियान तो चला, लेकिन भ्रूण हत्या जैसी घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पाया। समाज में बेटियों को हक मिले। नया वर्ष नारी समाज के लिए सुरक्षा भरा हो।
एफजी कॉलेज की रिटायर्ड हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. चंपा श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा हो या फिर राजनीतिक क्षेत्र महिलाओं के लिए काफी अच्छा रहा है।
महत्वपूर्ण परीक्षाओं में बेटियों ने बाजी मारी। नए साल में अब जरूरत है उनके ऊर्जा को समाज हित में लाने की। समाज में महिलाओं को शिक्षा के साथ ही आगे बढ़ने के लिए रोजगार भी मिले।
समान भागीदारी होने से समाज में विषमता दूर होगी। सरकारी कर्मचारी चंदा गुप्ता बोलीं कि महिलाओं की समाज में और अधिक भागीदारी होनी चाहिए।
खासतौर पर सरकारी नौकरी में महिलाओं को आगे लाने के लिए अवसर मिलने चाहिए। अभी भी कई ऐसे विभाग हैं, जहां पर महिलाओं की संख्या कम है।
इन विभागों में महिलाओं को मौका मिलना चाहिए। इससे समाज में अधिक सशक्त होंगी। उम्मीद है कि नए साल में ऐसा ही होगा।
गृहणी नीलू का कहना है कि यह वर्ष गृहणियों के लिए काफी निराशाजनक रहा। दाल से लेकर प्याज और टमाटर तक के दाम ने आसमान छुआ। ऐसे में रसोई बड़ी मुश्किल से चल सकी।
नए वर्ष में महंगाई पर अंकुश लगाने की जरूरत है, ताकि हर परिवार को भरपेट भोजन मिल सके। उम्मीद है कि केंद्र और प्रदेश सरकारें इस दिशा में कड़े कदम उठाएंगी।
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साथ ही विकास में पुरुषों के बराबर की भागीदारी हो। कानून व्यवस्था के साथ शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए। ताकि सबको अधिकार मिल सकें। हर किसी की अपेक्षा कि नया साल महिलाओं के लिए नया सबेरा साबित हो।
समाजसेवी डॉ. अमिता खुबेले का कहना है कि वर्ष 2015 में निर्भयाकांड ने समाज को झकझोर दिया। वर्तमान सरकार की ओर से नाबालिग की सजा के कानून में फेरबदल देर से उठाया गया अच्छा कदम है। नए साल में जिले में महिलाओं को रोजगार, सुरक्षा मिले। इसके लिए शासन और प्रशासन स्तर पर पहल होनी चाहिए।
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सेवानिवृत्त सीएमएस डॉ. शांति सिंह ने कहा कि समाज में बेटियां असुरक्षित होती जा रही हैं। नए वर्ष में बेटियों को सुरक्षित करने के लिए अधिक सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
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बेटी बचाने के लिए अभियान तो चला, लेकिन भ्रूण हत्या जैसी घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पाया। समाज में बेटियों को हक मिले। नया वर्ष नारी समाज के लिए सुरक्षा भरा हो।
एफजी कॉलेज की रिटायर्ड हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. चंपा श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा हो या फिर राजनीतिक क्षेत्र महिलाओं के लिए काफी अच्छा रहा है।
महत्वपूर्ण परीक्षाओं में बेटियों ने बाजी मारी। नए साल में अब जरूरत है उनके ऊर्जा को समाज हित में लाने की। समाज में महिलाओं को शिक्षा के साथ ही आगे बढ़ने के लिए रोजगार भी मिले।
समान भागीदारी होने से समाज में विषमता दूर होगी। सरकारी कर्मचारी चंदा गुप्ता बोलीं कि महिलाओं की समाज में और अधिक भागीदारी होनी चाहिए।
खासतौर पर सरकारी नौकरी में महिलाओं को आगे लाने के लिए अवसर मिलने चाहिए। अभी भी कई ऐसे विभाग हैं, जहां पर महिलाओं की संख्या कम है।
इन विभागों में महिलाओं को मौका मिलना चाहिए। इससे समाज में अधिक सशक्त होंगी। उम्मीद है कि नए साल में ऐसा ही होगा।
गृहणी नीलू का कहना है कि यह वर्ष गृहणियों के लिए काफी निराशाजनक रहा। दाल से लेकर प्याज और टमाटर तक के दाम ने आसमान छुआ। ऐसे में रसोई बड़ी मुश्किल से चल सकी।
नए वर्ष में महंगाई पर अंकुश लगाने की जरूरत है, ताकि हर परिवार को भरपेट भोजन मिल सके। उम्मीद है कि केंद्र और प्रदेश सरकारें इस दिशा में कड़े कदम उठाएंगी।