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11 लाख आबादी की हड्डियां गला रहा पानी
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Feb 2016 11:45 PM IST
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पेयजल स्रोतों की जीपीएस आधारित मैपिंग व सेनेटरी सर्वे और जल गुणवत्ता परीक्षण में 18 ब्लॉकों की 1344 बस्तियां के पानी में फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक पाई गई है। करीब 11 लाख आबादी फ्लोराइडयुक्त पानी की चपेट में है।
फ्लोराइडयुक्त पानी लोगों की हड्डियों के साथ ही दिमाग और दांत को भी कमजोर कर रहा है। इसका खुलासा होने के बाद शासन को 1344 बस्तियों में सोलर आधारित वाटर पंप लगवाने के लिए सीडीओ ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर बजट मांगा हैं।
जिले के 18 ब्लॉकों में लगे हैंडपंपों के पानी का सैंपल जांच के लिए लिया गया था। सैंपल की जांच की जिम्मेदारी एडीसीसी इंफोकैड नागपुर की संस्था को सौंपी गई थी।
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मई 2015 में संस्था ने अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसमें 1344 बस्तियों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक पाई गई थी। इसमें अयासपुर डीही, बकवारा, बंदरामऊ, गौरा खसपरी, छोटा कटरा, चाची का पुरवा, भीख, चिचौली, भीटा, केवलपुर बरेथा, अनंदापुर, बनपुरवा, ठकुराइनखेड़ा, अजीतपुर, ननौरा, बाबूखेड़ा, दोहनहा, अटरी, बथुआखास, बांस, चंदई रघुनाथपुर, चंदवल, असहन जगतपुर, दुर्गाखेड़ा, गोपालीखेड़ा, सोमखेड़ा, रघुनाथखेड़ा, आटी नौगवां, मानपुर, चक गजराज, बंदरामऊ, दोहरी समेत 1344 बस्तियों की 11 लाख आबादी फ्लोराइड पानी की चपेट में है।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार यह पानी सेहत के लिए नुकसान देय है। फ्लोराइडयुक्त पानी का असर सबसे अधिक शरीर की हड्डियों पर पड़ता है। धीरे-धीरे हड्डियां कमजोर होने के साथ ही टेढ़ी-मेढ़ी होने लगती हैं।
इस पानी का प्रभाव दिमाग और दांतों पर भी काफी होता है। मई 2015 को इन बस्तियों में 10-10 लाख की लागत से सोलर आधारित वाटर पंप लगवाने के लिए ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अब तक सुनवाई न होने पर सीडीओ ने दोबारा पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराते हुए बजट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
सीडीओ अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 1344 बस्तियों के पानी में फ्लोराइड की अधिकता मिलने पर पहले ही शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि अब तक बजट नहीं मिला है। दोबारा पत्र भेजा गया है।
बजट मिलते ही बस्तियों में शुद्ध पानी की व्यवस्था कराई जाएगी। एक अरब 34 करोड़ 40 लाख खर्च करके बस्तियों में सौर ऊर्जा आधारित मिनी पाइप पेयजल योजनाएं स्थापित होनी है।
सोलर आधारित वाटर पंप लगने से इन बस्तियों के लोगों को शुद्ध पानी मिलेगा। डीप बोरिंग के साथ ही सोलर वाटर पंप में आरओ भी लगा रहेगा। जो दूषित पानी को शुद्ध करके लोगों को देगा।
इससे फ्लोराइड के साथ ही पानी में उपलब्ध अन्य कमियों से भी लोगों को निजात मिल सकेगी।
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फ्लोराइडयुक्त पानी लोगों की हड्डियों के साथ ही दिमाग और दांत को भी कमजोर कर रहा है। इसका खुलासा होने के बाद शासन को 1344 बस्तियों में सोलर आधारित वाटर पंप लगवाने के लिए सीडीओ ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर बजट मांगा हैं।
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जिले के 18 ब्लॉकों में लगे हैंडपंपों के पानी का सैंपल जांच के लिए लिया गया था। सैंपल की जांच की जिम्मेदारी एडीसीसी इंफोकैड नागपुर की संस्था को सौंपी गई थी।
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मई 2015 में संस्था ने अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसमें 1344 बस्तियों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक पाई गई थी। इसमें अयासपुर डीही, बकवारा, बंदरामऊ, गौरा खसपरी, छोटा कटरा, चाची का पुरवा, भीख, चिचौली, भीटा, केवलपुर बरेथा, अनंदापुर, बनपुरवा, ठकुराइनखेड़ा, अजीतपुर, ननौरा, बाबूखेड़ा, दोहनहा, अटरी, बथुआखास, बांस, चंदई रघुनाथपुर, चंदवल, असहन जगतपुर, दुर्गाखेड़ा, गोपालीखेड़ा, सोमखेड़ा, रघुनाथखेड़ा, आटी नौगवां, मानपुर, चक गजराज, बंदरामऊ, दोहरी समेत 1344 बस्तियों की 11 लाख आबादी फ्लोराइड पानी की चपेट में है।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार यह पानी सेहत के लिए नुकसान देय है। फ्लोराइडयुक्त पानी का असर सबसे अधिक शरीर की हड्डियों पर पड़ता है। धीरे-धीरे हड्डियां कमजोर होने के साथ ही टेढ़ी-मेढ़ी होने लगती हैं।
इस पानी का प्रभाव दिमाग और दांतों पर भी काफी होता है। मई 2015 को इन बस्तियों में 10-10 लाख की लागत से सोलर आधारित वाटर पंप लगवाने के लिए ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अब तक सुनवाई न होने पर सीडीओ ने दोबारा पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराते हुए बजट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
सीडीओ अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 1344 बस्तियों के पानी में फ्लोराइड की अधिकता मिलने पर पहले ही शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि अब तक बजट नहीं मिला है। दोबारा पत्र भेजा गया है।
बजट मिलते ही बस्तियों में शुद्ध पानी की व्यवस्था कराई जाएगी। एक अरब 34 करोड़ 40 लाख खर्च करके बस्तियों में सौर ऊर्जा आधारित मिनी पाइप पेयजल योजनाएं स्थापित होनी है।
सोलर आधारित वाटर पंप लगने से इन बस्तियों के लोगों को शुद्ध पानी मिलेगा। डीप बोरिंग के साथ ही सोलर वाटर पंप में आरओ भी लगा रहेगा। जो दूषित पानी को शुद्ध करके लोगों को देगा।
इससे फ्लोराइड के साथ ही पानी में उपलब्ध अन्य कमियों से भी लोगों को निजात मिल सकेगी।