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Raebareli News: भाई की हत्या में किशोरी की जमानत अपील निरस्त
Mon, 21 Sep 2026 01:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 21 Sep 2026 01:13 AM IST
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रायबरेली। बाल न्यायालय ने भाई की हत्या की आरोपी किशोरी की जमानत अपील निरस्त कर दी है। न्यायालय ने किशोर न्याय बोर्ड, रायबरेली की ओर से जमानत निरस्त किए जाने के आदेश को सही ठहराया है।
किशोरी पर आरोप है कि उसने पांच सितंबर 2025 की रात अपने 20 वर्षीय भाई हिमांशु की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी। जिला प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, किशोरी का एक युवक से प्रेम प्रसंग था। उसका भाई हिमांशु उसे बाहर जाने से रोकता था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद और मारपीट होती थी। घटना की रात भी दोनों के बीच विवाद हुआ था।
रिपोर्ट के अनुसार, किशोरी ने अपने बयान में स्वीकार किया कि उसने गुस्से में सोते हुए भाई पर कुल्हाड़ी से हमला किया था। उसकी नानी ने भी पुलिस को दिए बयान में बताया था कि किशोरी ने खुद उन्हें हत्या की जानकारी दी थी।
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किशोरी की नानी ने संरक्षिका के रूप में जमानत अपील दायर की थी। उन्होंने पुलिस पर किशोरी को गलत तरीके से फंसाने का आरोप लगाया था। न्यायालय ने कहा कि किशोरी के माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है और उसकी बुजुर्ग नानी उसे उचित संरक्षण देने में सक्षम नहीं हैं। जमानत मिलने पर किशोरी के दोबारा किसी अपराध में शामिल होने की आशंका को देखते हुए न्यायालय ने अपील निरस्त कर दी।
एक लाख रुपये के बंधपत्र पर मिली जमानत
रायबरेली। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट की अदालत ने कुंवरजीत पटेल को एक लाख रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि के दो प्रतिभू दाखिल करने पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने 14 सितंबर 2026 को कुंवरजीत पटेल की जमानत याचिका स्वीकार की थी। इसके बाद पटेल के अधिवक्ता ने जमानत धनराशि निर्धारित करने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश का सत्यापन कराया। सत्यापन के बाद उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन पटेल को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया गया। कुंवरजीत पटेल के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है।
कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
रायबरेली। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार सप्तम की अदालत ने बृजेश कुमार पांडेय और अन्य की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपियों ने न्यायिक हिरासत के दौरान रिमांड के लिए अदालत में पेश न किए जाने को आधार बनाकर जमानत की मांग की थी। आरोपियों की ओर से तर्क दिया गया कि 21 अप्रैल से न्यायिक हिरासत के दौरान उन्हें रिमांड के लिए अदालत में पेश नहीं किया गया, जो अवैध है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों की जमानत सत्र न्यायालय से पहले ही खारिज हो चुकी है। अदालत ने पाया कि मामले में आरोपपत्र 90 दिनों की अवधि के भीतर चार अप्रैल 2026 को दाखिल किया जा चुका था। ऐसे में अनिवार्य जमानत का कोई वैध आधार नहीं बनता है। अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि हिरासत की प्रक्रिया में हुई त्रुटि को न्यायालय सुधार सकता है, लेकिन यह जमानत का आधार नहीं है। इन आधारों पर अदालत ने जमानत याचिका निरस्त कर दी।
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किशोरी पर आरोप है कि उसने पांच सितंबर 2025 की रात अपने 20 वर्षीय भाई हिमांशु की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी। जिला प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, किशोरी का एक युवक से प्रेम प्रसंग था। उसका भाई हिमांशु उसे बाहर जाने से रोकता था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद और मारपीट होती थी। घटना की रात भी दोनों के बीच विवाद हुआ था।
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रिपोर्ट के अनुसार, किशोरी ने अपने बयान में स्वीकार किया कि उसने गुस्से में सोते हुए भाई पर कुल्हाड़ी से हमला किया था। उसकी नानी ने भी पुलिस को दिए बयान में बताया था कि किशोरी ने खुद उन्हें हत्या की जानकारी दी थी।
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किशोरी की नानी ने संरक्षिका के रूप में जमानत अपील दायर की थी। उन्होंने पुलिस पर किशोरी को गलत तरीके से फंसाने का आरोप लगाया था। न्यायालय ने कहा कि किशोरी के माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है और उसकी बुजुर्ग नानी उसे उचित संरक्षण देने में सक्षम नहीं हैं। जमानत मिलने पर किशोरी के दोबारा किसी अपराध में शामिल होने की आशंका को देखते हुए न्यायालय ने अपील निरस्त कर दी।
एक लाख रुपये के बंधपत्र पर मिली जमानत
रायबरेली। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट की अदालत ने कुंवरजीत पटेल को एक लाख रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि के दो प्रतिभू दाखिल करने पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने 14 सितंबर 2026 को कुंवरजीत पटेल की जमानत याचिका स्वीकार की थी। इसके बाद पटेल के अधिवक्ता ने जमानत धनराशि निर्धारित करने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश का सत्यापन कराया। सत्यापन के बाद उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन पटेल को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया गया। कुंवरजीत पटेल के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है।
कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
रायबरेली। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार सप्तम की अदालत ने बृजेश कुमार पांडेय और अन्य की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपियों ने न्यायिक हिरासत के दौरान रिमांड के लिए अदालत में पेश न किए जाने को आधार बनाकर जमानत की मांग की थी। आरोपियों की ओर से तर्क दिया गया कि 21 अप्रैल से न्यायिक हिरासत के दौरान उन्हें रिमांड के लिए अदालत में पेश नहीं किया गया, जो अवैध है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों की जमानत सत्र न्यायालय से पहले ही खारिज हो चुकी है। अदालत ने पाया कि मामले में आरोपपत्र 90 दिनों की अवधि के भीतर चार अप्रैल 2026 को दाखिल किया जा चुका था। ऐसे में अनिवार्य जमानत का कोई वैध आधार नहीं बनता है। अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि हिरासत की प्रक्रिया में हुई त्रुटि को न्यायालय सुधार सकता है, लेकिन यह जमानत का आधार नहीं है। इन आधारों पर अदालत ने जमानत याचिका निरस्त कर दी।