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चद्दर नसीब नहीं, प्रसूताओं का घर का भरोसा
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रायबरेली। जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं को बेहतर सुविधा देने का दावा हकीकत पर खरा नहीं उतर रहा है। ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में रविवार को अस्पताल की व्यवस्था पटरी से उतरी मिली।
बेड पर प्रसूताओं को चादर तक नसीब नहीं हो रहा है। मरीज घर से चादर लाने को विवश हैं। सीएमएस के निर्देश के बाद भी स्टाफ की मनमानी का खामियाजा महिलाओं को झेलना पड़ रहा है।
ऊंचाहार निवासी सुनीता को प्रसव पीड़ा होने पर एक दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें बेड पर बिछाने के लिए चादर नहीं दी गई। सुनीता का कहना था कि उन्हें घर से चादर लानी पड़ी।
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यही पीड़ा जगतपुर की प्रीती त्रिवेदी की थी। प्रीती कहती हैं कि बेहतर इलाज की कौन कहे, चादर तक नसीब नहीं है। जलालपुर की रहने वाली सरिता देवी और रूस्तमपुर की रहने वाली अनुप्रिया बताती हैं कि अस्पताल में चादर तक नहीं मिलते हैं। इसलिए घर से चादर मंगानी पड़ी।
टॉके कटवाने को करना पड़ता इंतजार
जिला महिला अस्पताल में बिजली जाने पर भले ही जनरेटर की व्यवस्था कराई गई हो, लेकिन यह शोपीस बनकर रह गया है। बिजली गुल होने पर अंधेरे में प्रसूताओं को रहना पड़ता है। रविवार को अमर उजाला की टीम महिला अस्पताल पहुंची तो अस्पताल के एग्जामिनेशन रूम में अंधेरा छाया था।
सत्य नगर की रहने वाली प्रसूता मंजू को टांका कटवाना था। मंजू कक्ष के अंदर एक घंटे तक बैठी रहीं। उसके बाद उसके कांटे कट सके। इस दौरान बिजली जाने से उसे अंधेरे में रहना पड़ा। खास बात ये है कि जनरेटर होने के बाद उसमें ताला लटक रहा था। जनरेटर चालू करने की बात कहने पर एक स्टाफ ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ा है कि एक बार जनरेटर चलाने पर डीजल बहुत खर्च हो जाता है।
साफ-सफाई रामभरोसे, शौचालय कक्ष में लटका ताला
जिला महिला अस्पताल में साफ-सफाई व्यवस्था रामभरोसे है। यह हाल तब है, जब साफ-सफाई व्यवस्था के लिए अलग से एक अधिकारी की तैनाती है। प्रसाधन कक्ष में ताला लटकता मिला। इससे लोगों में नाराजगी भी रही।
जिला महिला अस्पताल में भर्ती होने वाली प्रसूताओं को चादर की व्यवस्था कराई जाती है। यदि किसी प्रसूता को चादर नहीं दी गई तो वह शिकायत करें। यदि चादर देने में लापरवाही बरती गई है तो जांच कराई जाएगी। बिजली न रहने पर स्टाफ को जनरेटर चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ.रेनू चौधरी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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बेड पर प्रसूताओं को चादर तक नसीब नहीं हो रहा है। मरीज घर से चादर लाने को विवश हैं। सीएमएस के निर्देश के बाद भी स्टाफ की मनमानी का खामियाजा महिलाओं को झेलना पड़ रहा है।
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ऊंचाहार निवासी सुनीता को प्रसव पीड़ा होने पर एक दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें बेड पर बिछाने के लिए चादर नहीं दी गई। सुनीता का कहना था कि उन्हें घर से चादर लानी पड़ी।
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यही पीड़ा जगतपुर की प्रीती त्रिवेदी की थी। प्रीती कहती हैं कि बेहतर इलाज की कौन कहे, चादर तक नसीब नहीं है। जलालपुर की रहने वाली सरिता देवी और रूस्तमपुर की रहने वाली अनुप्रिया बताती हैं कि अस्पताल में चादर तक नहीं मिलते हैं। इसलिए घर से चादर मंगानी पड़ी।
टॉके कटवाने को करना पड़ता इंतजार
जिला महिला अस्पताल में बिजली जाने पर भले ही जनरेटर की व्यवस्था कराई गई हो, लेकिन यह शोपीस बनकर रह गया है। बिजली गुल होने पर अंधेरे में प्रसूताओं को रहना पड़ता है। रविवार को अमर उजाला की टीम महिला अस्पताल पहुंची तो अस्पताल के एग्जामिनेशन रूम में अंधेरा छाया था।
सत्य नगर की रहने वाली प्रसूता मंजू को टांका कटवाना था। मंजू कक्ष के अंदर एक घंटे तक बैठी रहीं। उसके बाद उसके कांटे कट सके। इस दौरान बिजली जाने से उसे अंधेरे में रहना पड़ा। खास बात ये है कि जनरेटर होने के बाद उसमें ताला लटक रहा था। जनरेटर चालू करने की बात कहने पर एक स्टाफ ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ा है कि एक बार जनरेटर चलाने पर डीजल बहुत खर्च हो जाता है।
साफ-सफाई रामभरोसे, शौचालय कक्ष में लटका ताला
जिला महिला अस्पताल में साफ-सफाई व्यवस्था रामभरोसे है। यह हाल तब है, जब साफ-सफाई व्यवस्था के लिए अलग से एक अधिकारी की तैनाती है। प्रसाधन कक्ष में ताला लटकता मिला। इससे लोगों में नाराजगी भी रही।
जिला महिला अस्पताल में भर्ती होने वाली प्रसूताओं को चादर की व्यवस्था कराई जाती है। यदि किसी प्रसूता को चादर नहीं दी गई तो वह शिकायत करें। यदि चादर देने में लापरवाही बरती गई है तो जांच कराई जाएगी। बिजली न रहने पर स्टाफ को जनरेटर चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ.रेनू चौधरी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल