{"_id":"602c111a8ebc3ee9383223a3","slug":"road-raibaraily-news-lko565189659","type":"story","status":"publish","title_hn":"टोल प्लाजा पर कोई फर्राटा भरते निकला, तो कोई जाम के झाम से रहा बेहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टोल प्लाजा पर कोई फर्राटा भरते निकला, तो कोई जाम के झाम से रहा बेहाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जायस-बछरावां। राष्ट्रीय राजमार्गों पर एनएचएआई की ओर से मंगलवार को पूरी तरह से फास्टैग अनिवार्य कर दिया गया है। बिना फास्टैग वाले वाहन चालकों से दोगुना टोल शुल्क वसूल किया गया। यही नहीं जाम की समस्या से भी दो चार होना पड़ा।
ज्यादा रुपये वसूलने की बात को लेकर हर जगह अफरातफरी का माहौल रहा। कुछ लोगों को इसकी जानकारी नहीं होने पर कहासुनी की नौबत आई। खास बात यह रही कि जिन वाहन चालकों के पास फास्टैग की सुविधा थी, वह कुछ सेकेंड में टोल पार करके गंतव्य को निकल गए, लेकिन बिना फास्टैग वाहन चालक को जाम के झाम से परेशानी उठानी पड़ी।
जिले से होकर लखनऊ-प्रयागराज हाईवे, रायबरेली सुल्तानपुर हाईवे, रायबरेली-जौनपुर हाईवे, रायबरेली-बांदा हाईवे निकले हैं। इन हाईवे पर बने टोल प्लाजा पर सोमवार रात 12 बजे से फास्टैग अनिवार्य कर दिया गया। इसके बाद बिना फास्टैग के निकलने वाहन चालकों से दोगुना शुल्क वसूल किया गया।
विज्ञापन
रायबरेली-सुल्तानपुर हाईवे पर गांधीनगर स्थित एधी टोल प्लाजा पर बिना फास्टैग के निकलने वाले वाहनों से दोगुना शुल्क वसूला गया। ज्यादा वसूली होने से कुछ लोगों ने विरोध किया, लेकिन बाद में उन्हें दोगुना शुल्क देकर ही निकना पड़ा। इस बात को लेकर काफी अफरातफरी रही।
वहीं कुछ बिना फास्टैग वाले वाहन चालक टोल पार करने का नया रास्ता खोजते रहे। वाहन चालक जुबेर अख्तर, छेदीलाल अग्रहरि, रमेश सिंह ने बताया कि फास्टैग सुविधा अच्छी है। इस सुविधा के बाद सेकेंडों में टोल टैक्स ऑनलाइन कट जाता है। इससे समय के साथ ईंधन की भी बचत होती है। टोल प्लाजा मैनेजर राकेश सिंह ने बताया कि अधिकतर लोग फास्टैग लगवा कर निकले हैं। इसके लिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
इसी तरह लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर सबसे ज्यादा भीड़ रही। बछरावां के निकट दखिना टोल प्लाजा पर कैशलेस से निकलने वाले वाहन चालकों को ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ी। टोल मैनेजर अनुरोध सिंह ने बताया कि फास्टैग को पूरी तरीके से अनिवार्य कर दिया गया है। सभी फास्ट टैग लाइन अच्छी तरीके से काम कर रही हैं। जो लोग फास्ट टैग नहीं लगवाए हैं। उन्हें कैशलेस से निकाला गया, लेकिन उनसे दोगुना चार्ज लिया गया। देर शाम तक दो हजार वाहन चालक बिना फास्टैग के निकले।
रायबरेली से लखनऊ जा रहे अमन सिंह ने बताया कि वाहन में फास्टैग लगा होने से टोल से निकलने में कुछ सेकेंड लगते हैं। इसी तरह लखनऊ से बछरावां आ रहे सुनील सागर ने बताया कि फास्टैग से बहुत सहूलियत मिलती है।
14 दिनों तक दिया जाएगा मुफ्त फास्टैग
वाहन चालकों के प्रोत्साहन के लिए एनएचएआई की ओर से मुफ्त फास्टैग मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा फास्टैग बैंग, ऑनलाइन भी मंगवाया जा सकता है। एनएचएआई अपनी तरफ से 14 दिनों तक वाहन चालकों को फास्टैग देगा। यह सुविधा हर टोल प्लाजा पर उपलब्ध कराई गई है, ताकि लोगों को आसानी से फास्टैग मिल सके।
फास्टैग अपनाएं, जाम से पाए मुक्ति
वाहन चालक फास्टैग की सुविधा लेकर जाम से राहत पा सकते हैं। खास बात यह है कि फास्टैग वाले वाहनों को टोल से गुजरने में कुछ मिनट लगते हैं, जबकि कैश लेन से 10 से 15 मिनट का समय लग जाता है। ऐसे में जाम की समस्या बनी रहती है। कैशलेन में अधिक टोल टैक्स वसूलने की शिकायतें रहती है, लेकिन फास्टैग में इस तरह की शिकायतें नहीं मिलेंगी। क्योंकि सुविधा ऑनलाइन होती है। इसमें बिचौलिए को कोई काम नहीं रहता है। बैंकों के अलावा ऑनलाइन भी फास्टैग खरीदे जा सकते हैं।
-कर्नल आरबी सिंह, पीडी, एनएचएआई, रायबरेली
विज्ञापन
ज्यादा रुपये वसूलने की बात को लेकर हर जगह अफरातफरी का माहौल रहा। कुछ लोगों को इसकी जानकारी नहीं होने पर कहासुनी की नौबत आई। खास बात यह रही कि जिन वाहन चालकों के पास फास्टैग की सुविधा थी, वह कुछ सेकेंड में टोल पार करके गंतव्य को निकल गए, लेकिन बिना फास्टैग वाहन चालक को जाम के झाम से परेशानी उठानी पड़ी।
विज्ञापन
जिले से होकर लखनऊ-प्रयागराज हाईवे, रायबरेली सुल्तानपुर हाईवे, रायबरेली-जौनपुर हाईवे, रायबरेली-बांदा हाईवे निकले हैं। इन हाईवे पर बने टोल प्लाजा पर सोमवार रात 12 बजे से फास्टैग अनिवार्य कर दिया गया। इसके बाद बिना फास्टैग के निकलने वाहन चालकों से दोगुना शुल्क वसूल किया गया।
विज्ञापन
रायबरेली-सुल्तानपुर हाईवे पर गांधीनगर स्थित एधी टोल प्लाजा पर बिना फास्टैग के निकलने वाले वाहनों से दोगुना शुल्क वसूला गया। ज्यादा वसूली होने से कुछ लोगों ने विरोध किया, लेकिन बाद में उन्हें दोगुना शुल्क देकर ही निकना पड़ा। इस बात को लेकर काफी अफरातफरी रही।
वहीं कुछ बिना फास्टैग वाले वाहन चालक टोल पार करने का नया रास्ता खोजते रहे। वाहन चालक जुबेर अख्तर, छेदीलाल अग्रहरि, रमेश सिंह ने बताया कि फास्टैग सुविधा अच्छी है। इस सुविधा के बाद सेकेंडों में टोल टैक्स ऑनलाइन कट जाता है। इससे समय के साथ ईंधन की भी बचत होती है। टोल प्लाजा मैनेजर राकेश सिंह ने बताया कि अधिकतर लोग फास्टैग लगवा कर निकले हैं। इसके लिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
इसी तरह लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर सबसे ज्यादा भीड़ रही। बछरावां के निकट दखिना टोल प्लाजा पर कैशलेस से निकलने वाले वाहन चालकों को ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ी। टोल मैनेजर अनुरोध सिंह ने बताया कि फास्टैग को पूरी तरीके से अनिवार्य कर दिया गया है। सभी फास्ट टैग लाइन अच्छी तरीके से काम कर रही हैं। जो लोग फास्ट टैग नहीं लगवाए हैं। उन्हें कैशलेस से निकाला गया, लेकिन उनसे दोगुना चार्ज लिया गया। देर शाम तक दो हजार वाहन चालक बिना फास्टैग के निकले।
रायबरेली से लखनऊ जा रहे अमन सिंह ने बताया कि वाहन में फास्टैग लगा होने से टोल से निकलने में कुछ सेकेंड लगते हैं। इसी तरह लखनऊ से बछरावां आ रहे सुनील सागर ने बताया कि फास्टैग से बहुत सहूलियत मिलती है।
14 दिनों तक दिया जाएगा मुफ्त फास्टैग
वाहन चालकों के प्रोत्साहन के लिए एनएचएआई की ओर से मुफ्त फास्टैग मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा फास्टैग बैंग, ऑनलाइन भी मंगवाया जा सकता है। एनएचएआई अपनी तरफ से 14 दिनों तक वाहन चालकों को फास्टैग देगा। यह सुविधा हर टोल प्लाजा पर उपलब्ध कराई गई है, ताकि लोगों को आसानी से फास्टैग मिल सके।
फास्टैग अपनाएं, जाम से पाए मुक्ति
वाहन चालक फास्टैग की सुविधा लेकर जाम से राहत पा सकते हैं। खास बात यह है कि फास्टैग वाले वाहनों को टोल से गुजरने में कुछ मिनट लगते हैं, जबकि कैश लेन से 10 से 15 मिनट का समय लग जाता है। ऐसे में जाम की समस्या बनी रहती है। कैशलेन में अधिक टोल टैक्स वसूलने की शिकायतें रहती है, लेकिन फास्टैग में इस तरह की शिकायतें नहीं मिलेंगी। क्योंकि सुविधा ऑनलाइन होती है। इसमें बिचौलिए को कोई काम नहीं रहता है। बैंकों के अलावा ऑनलाइन भी फास्टैग खरीदे जा सकते हैं।
-कर्नल आरबी सिंह, पीडी, एनएचएआई, रायबरेली