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रिलायंस इंश्योरेंस कंपनी 12.50 लाख का करे भुगतान
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2016 12:16 AM IST
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रिलायंस इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने बिना पूरी जांच कराए ही एक बीमा धारक की मौत के बाद उसके परिवारीजनों को मिलने वाला 12.50 लाख का क्लेम रद्द कर दिया।
मामला जिला उपभोक्ता फोरम पहुंचा। फोरम ने सुनवाई के बाद बीमा धारक के परिवारीजनों को बीमा राशि के साथ ही क्षतिपूर्ति समेत छह हजार रुपये भुगतान के निर्देश दिए हैं।
अमावां ब्लॉक क्षेत्र के गोड़धरा रसेहता मजरे पिंडारी कला निवासी एवं व्यवसायी छोटेलाल ने रिलायंस इंश्योरेंस से दिसंबर 2010 में 12.50 लाख का बीमा कराया था।
छोटेलाल की 3 जून 2011 को मौत हो गई। बीमा धारक के भाई हरिकेश का आरोप है कि उसने क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने बिना जांच कराए ही उसे रद्द कर दिया।
इस पर भुक्तभोगी ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। फोरम ने सुनवाई के दौरान पाया कि बीमाधारक की मौत बुखार और पेट दर्द से हुई थी।
जबकि कंपनी ने उसे टीबी का मरीज बताया, लेकिन इसके प्रमाण नहीं दे सकी। यही नहीं कंपनी के सर्वेयर ने व्यवसायी को बीपीएल कार्डधारक बताकर गलत ढंग से क्लेम निरस्त कर दिया।
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परिवाद की सुनवाई के बाद फोरम के अध्यक्ष लालता प्रसाद पांडेय ने कंपनी को दो माह के अंदर बीमाधारक के परिवारीजनों को 12.50 लाख रुपये भुगतान के आदेश दिए।
यही नहीं दो माह में भुगतान न करने पर आठ प्रतिशत ब्याज देने के निर्देश भी दिए हैं।
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मामला जिला उपभोक्ता फोरम पहुंचा। फोरम ने सुनवाई के बाद बीमा धारक के परिवारीजनों को बीमा राशि के साथ ही क्षतिपूर्ति समेत छह हजार रुपये भुगतान के निर्देश दिए हैं।
अमावां ब्लॉक क्षेत्र के गोड़धरा रसेहता मजरे पिंडारी कला निवासी एवं व्यवसायी छोटेलाल ने रिलायंस इंश्योरेंस से दिसंबर 2010 में 12.50 लाख का बीमा कराया था।
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छोटेलाल की 3 जून 2011 को मौत हो गई। बीमा धारक के भाई हरिकेश का आरोप है कि उसने क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने बिना जांच कराए ही उसे रद्द कर दिया।
इस पर भुक्तभोगी ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। फोरम ने सुनवाई के दौरान पाया कि बीमाधारक की मौत बुखार और पेट दर्द से हुई थी।
जबकि कंपनी ने उसे टीबी का मरीज बताया, लेकिन इसके प्रमाण नहीं दे सकी। यही नहीं कंपनी के सर्वेयर ने व्यवसायी को बीपीएल कार्डधारक बताकर गलत ढंग से क्लेम निरस्त कर दिया।
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परिवाद की सुनवाई के बाद फोरम के अध्यक्ष लालता प्रसाद पांडेय ने कंपनी को दो माह के अंदर बीमाधारक के परिवारीजनों को 12.50 लाख रुपये भुगतान के आदेश दिए।
यही नहीं दो माह में भुगतान न करने पर आठ प्रतिशत ब्याज देने के निर्देश भी दिए हैं।