{"_id":"5f10c0a53ad5826fc06516cf22ba11e1","slug":"rda-seal-between-the-bustle-of-the-illegal-building-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गहमागहमी के बीच आरडीए ने सील की अवैध बिल्डिंग ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गहमागहमी के बीच आरडीए ने सील की अवैध बिल्डिंग
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Jan 2016 12:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विभाग की भूमि पर हो रहे निर्माण सोमवार को सील कर दिया गया। भारी पुलिस बल
विज्ञापन
लेकर पहुंचे आरडीए अफसरों ने डिग्री कॉलेज चौराहा निकट स्थित बिल्डिंग को
सील करते हुए सूचना उच्चाधिकारियों को दी।
गौरतलब है कि इसी मामले में सिंचाई विभाग की ओर से दो लोगों के खिलाफ सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने की कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
सिंचाई विभाग के ऐशबाग माइनर पर कई महीनों से निर्माण चल रहा था। मामले में एक पक्ष ने डीएम से शिकायत की थी। डीएम के निर्देश पर सदर एसडीएम ने 3 दिसंबर 2015 को काम रोकवा दिया था।
वहीं कुछ दिन बाद फिर से निर्माण शुरू करा दिया गया। बिल्डर की मनमानी पर आरडीए उपाध्यक्ष ओपी राय ने बिल्डिंग को सील करने का आदेश जारी कर दिया।
13 जनवरी 2016 को जब आरडीए टीम मौके पर पहुंची तो महिलाओं के साथ विरोध शुरू कर दिया गया। पुलिस फोर्स नहीं मिलने पर सभी अधिकारी बैरंग लौट आए।
14 जनवरी को मामले में सिंचाई विभाग की ओर से दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। वहीं सोमवार को दोपहर बाद कोतवाली पुलिस के साथ आरडीए सहायक अभियंता एम. अहमद, विश्वनाथ, अवर अभियंता एसके दीक्षित, रबीश अग्रवाल आदि मौके पर पहुंचकर बिल्डिंग को सील कर दिया।
इस दौरान काफी गहमागहमी रही। वहीं कुछ महिलाओं ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस फोर्स होने के कारण एक नहीं चल सकी।
सिंचाई विभाग की भूमि पर निर्माण को लेकर आरडीए के एक बाबू की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। जमीन के दस्तावेज देखे बिना ही बिल्डर सेे एक लाख रुपये कंपाउंडिंग शुल्क जमा करा लिया गया।
विज्ञापन
इसका खुलासा तब हुआ, जब बिल्डर के कुछ लोगों ने सील का विरोध किया। साथ ही बताया कि जमीन जब मेरी नहीं है, तो कंपाउंडिंग शुल्क कैसे जमा करा लिया गया है।
ऐसे में बाबू की भूमिका संदिग्ध है। मामले में एक्सईएन एसके सिन्हा का कहना है कि किसके आदेश पर कंपाउंडिंग शुल्क जमा हुआ है, यह जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी।
आरडीए उपाध्यक्ष ओपी राय ने बताया कि बिना नक्शा स्वीकृत कराए निर्माण कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बिल्डरों से सांठगांठ करने वाले कर्मचारियों को भी नहीं बख्शा जाएगा। कई निर्माण और सील होने हैं।
गौरतलब है कि इसी मामले में सिंचाई विभाग की ओर से दो लोगों के खिलाफ सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने की कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
सिंचाई विभाग के ऐशबाग माइनर पर कई महीनों से निर्माण चल रहा था। मामले में एक पक्ष ने डीएम से शिकायत की थी। डीएम के निर्देश पर सदर एसडीएम ने 3 दिसंबर 2015 को काम रोकवा दिया था।
वहीं कुछ दिन बाद फिर से निर्माण शुरू करा दिया गया। बिल्डर की मनमानी पर आरडीए उपाध्यक्ष ओपी राय ने बिल्डिंग को सील करने का आदेश जारी कर दिया।
13 जनवरी 2016 को जब आरडीए टीम मौके पर पहुंची तो महिलाओं के साथ विरोध शुरू कर दिया गया। पुलिस फोर्स नहीं मिलने पर सभी अधिकारी बैरंग लौट आए।
14 जनवरी को मामले में सिंचाई विभाग की ओर से दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। वहीं सोमवार को दोपहर बाद कोतवाली पुलिस के साथ आरडीए सहायक अभियंता एम. अहमद, विश्वनाथ, अवर अभियंता एसके दीक्षित, रबीश अग्रवाल आदि मौके पर पहुंचकर बिल्डिंग को सील कर दिया।
विज्ञापन
इस दौरान काफी गहमागहमी रही। वहीं कुछ महिलाओं ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस फोर्स होने के कारण एक नहीं चल सकी।
सिंचाई विभाग की भूमि पर निर्माण को लेकर आरडीए के एक बाबू की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। जमीन के दस्तावेज देखे बिना ही बिल्डर सेे एक लाख रुपये कंपाउंडिंग शुल्क जमा करा लिया गया।
विज्ञापन
इसका खुलासा तब हुआ, जब बिल्डर के कुछ लोगों ने सील का विरोध किया। साथ ही बताया कि जमीन जब मेरी नहीं है, तो कंपाउंडिंग शुल्क कैसे जमा करा लिया गया है।
ऐसे में बाबू की भूमिका संदिग्ध है। मामले में एक्सईएन एसके सिन्हा का कहना है कि किसके आदेश पर कंपाउंडिंग शुल्क जमा हुआ है, यह जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी।
आरडीए उपाध्यक्ष ओपी राय ने बताया कि बिना नक्शा स्वीकृत कराए निर्माण कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बिल्डरों से सांठगांठ करने वाले कर्मचारियों को भी नहीं बख्शा जाएगा। कई निर्माण और सील होने हैं।