{"_id":"6251c364ad01f365276e3fb7","slug":"protest-raibaraily-news-lko6253846104","type":"story","status":"publish","title_hn":"उड़ती राख से आजिज ग्रामीणों का टूटा सब्र, एनटीपीसी के खिलाफ प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उड़ती राख से आजिज ग्रामीणों का टूटा सब्र, एनटीपीसी के खिलाफ प्रदर्शन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऊंचाहार (रायबरेली)। एनटीपीसी परियोजना के ऐश पांड की उड़ती राख से आजिज गांववालों का सब्र जवाब दे गया। नाराज ग्रामीणों ने एनटीपीसी के खिलाफ प्रदर्शन किया और ऐश पांड से ट्रकों के जरिये ले जाई जा रही राख पर रोक लगा दी।
हंगामे की जानकारी होने पर सीआईएसएफ के जवान मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की प्रबंधन से बात कराई। अधिकारियों ने समस्या से निजात दिलाने का आश्वासन दिया तो ग्रामीण मान गए।
परियोजना से निकलने वाली राख को अरखा गांव के पास बने ऐश पांड में डंप किया जाता है। जहां से राख को ट्रकों पर लादकर हाईवे व अन्य निर्माण के लिए भेजा जाता है।
विज्ञापन
गर्मी के दिनों में ऐश पांड से उड़ने वाली राख आसपास के गांव अरखा, पूरे किसुनी, भोपउरा, कोटरा आदि गांवों तक जाती है। इससे लोगों का जीना दूभर हो गया। हवा में धूल के कण होने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है। घरों में छतों पर पड़े कपड़े व अन्य सामान भी खराब हो जाता है।
एनटीपीसी परियोजना के अधिकारी शिकायत के बावजूद समस्या से निजात नहीं दिला रहे हैं। शनिवार को इससे नाराज आसपास गांवों के लोग ऐश पांड पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया।
ग्रामीणों ने राख ढोने वाले ट्रकों का चक्का जाम कर राख ढुलाई बंद करा दी और एनटीपीसी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
इसकी खबर परियोजना के अधिकारियों को मिली तो सीआईएसएफ के जवानों को मौके पर भेजा गया। सीआईएसएफ के जवानों ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी।
परियोजना की जनसंपर्क अधिकारी कोमल शर्मा से फोन पर ग्रामीणों से बात हुई और समस्या के जल्द निदान का भरोसा दिया। इसके बाद ग्रामीण मान गए।
ग्रामीण राजकुमार पांडेय, मनोज कुमार, संतलाल, मालती, धनपत, दिव्यांशू, हिमांशू ने बताया कि राख से जीना दुश्वार हो गया है। लोग सांस, टीबी जैसी बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। ऐश पांड पर पानी का छिड़काव सही तरीके से नहीं हो रहा है। परियोजना की जनसंपर्क अधिकारी कोमल शर्मा ने बताया कि मानव संसाधन विभाग ने प्रमुख ग्रामीणों को बातचीत के लिए बुलाया है। उनकी समस्या का निराकरण जल्द हो जाएगा। चक्का जाम जैसी कोई बात नहीं है।
विज्ञापन
हंगामे की जानकारी होने पर सीआईएसएफ के जवान मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की प्रबंधन से बात कराई। अधिकारियों ने समस्या से निजात दिलाने का आश्वासन दिया तो ग्रामीण मान गए।
विज्ञापन
परियोजना से निकलने वाली राख को अरखा गांव के पास बने ऐश पांड में डंप किया जाता है। जहां से राख को ट्रकों पर लादकर हाईवे व अन्य निर्माण के लिए भेजा जाता है।
विज्ञापन
गर्मी के दिनों में ऐश पांड से उड़ने वाली राख आसपास के गांव अरखा, पूरे किसुनी, भोपउरा, कोटरा आदि गांवों तक जाती है। इससे लोगों का जीना दूभर हो गया। हवा में धूल के कण होने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है। घरों में छतों पर पड़े कपड़े व अन्य सामान भी खराब हो जाता है।
एनटीपीसी परियोजना के अधिकारी शिकायत के बावजूद समस्या से निजात नहीं दिला रहे हैं। शनिवार को इससे नाराज आसपास गांवों के लोग ऐश पांड पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया।
ग्रामीणों ने राख ढोने वाले ट्रकों का चक्का जाम कर राख ढुलाई बंद करा दी और एनटीपीसी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
इसकी खबर परियोजना के अधिकारियों को मिली तो सीआईएसएफ के जवानों को मौके पर भेजा गया। सीआईएसएफ के जवानों ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी।
परियोजना की जनसंपर्क अधिकारी कोमल शर्मा से फोन पर ग्रामीणों से बात हुई और समस्या के जल्द निदान का भरोसा दिया। इसके बाद ग्रामीण मान गए।
ग्रामीण राजकुमार पांडेय, मनोज कुमार, संतलाल, मालती, धनपत, दिव्यांशू, हिमांशू ने बताया कि राख से जीना दुश्वार हो गया है। लोग सांस, टीबी जैसी बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। ऐश पांड पर पानी का छिड़काव सही तरीके से नहीं हो रहा है। परियोजना की जनसंपर्क अधिकारी कोमल शर्मा ने बताया कि मानव संसाधन विभाग ने प्रमुख ग्रामीणों को बातचीत के लिए बुलाया है। उनकी समस्या का निराकरण जल्द हो जाएगा। चक्का जाम जैसी कोई बात नहीं है।