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सोनिया के गढ़ में दिनेश सिंह का कद बढा़कर भाजपा ने दिया मिशन 2024 की तैयारी का संदेश
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रायबरेली। एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह को योगी मंत्रिमंडल में जगह देकर भाजपा ने मिशन-2024 की तैयारी का साफ संदेश दिया है। 2022 के चुनाव में जिले की सभी सीटों पर कांग्रेस का सफाया हो चुका है।
ऐसे में अब भाजपा की नजर लोकसभा चुनाव पर है। मिशन-2024 के तहत पार्टी का अगला लक्ष्य सांसद सोनिया गांधी की कुर्सी हथियाना है।
दिनेश प्रताप सिंह कई दलों में रहे। कांग्रेस से दो बार एमएलसी रहे। भाई अवधेश प्रताप सिंह और छोटे भाई की पत्नी सुमन सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया।
2017 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर अपने भाई राकेश सिंह को हरचंदपुर सीट से विधायक बनवाया। हालांकि 2018 में दिनेश ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया।
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भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सोनिया गांधी के खिलाफ उतारा। दिनेश ने पूरे दमखम से चुनाव लड़ा और सोनिया गांधी के वोटों के ग्राफ को काफी गिरा दिया।
शायद यही वजह रही कि वह और उनके समर्थक मंत्री पद पाने के लिए बेचैन रहे, लेकिन इस बार भाजपा ने उन्हें एमएलसी का टिकट उम्मीदवार बनाया है और अब योगी मंत्रिमंडल में मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाकर दोहरी खुशी दे दी।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो अमेठी से राहुल गांधी की हार के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि अब भाजपा की नजर रायबरेली सीट पर है।
शायद यही वजह है कि योगी सरकार में दिनेश प्रताप सिंह को मंत्री बनाकर रायबरेली फतह करने की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि आने वाला वक्त बताएगा कि मंत्री बनकर वह भाजपा के लिए 2024 में क्या गुल खिलाते हैं।
मेरी हार, लेकिन मंत्री के रूप में मिला सत्कर्मों का फल त्न राकेश सिंह
हरचंदपुर विधानसभा सीट से भाजपा से 2022 का चुनाव हारे पूर्व विधायक राकेश सिंह का कहना है कि वह भले ही चुनाव हार गए हैं, लेकिन उनके सत्कर्मों का फल मंत्री के रूप में मिला है। वह और उनका परिवार राजनीति हो या फिर पूजा-पाठ, हर कार्य में तन, मन, धन से काम करता है। शायद यही वजह है कि परिवार को मंत्री के रूप में बड़ी उपलब्धि मिली है।
अदिति के मंत्री बनने की उम्मीद टूटी
रायबरेली सदर सीट से दूसरी बार विधायक बनीं अदिति सिंह को मंत्री बनाए जाने की उम्मीद थी लेकिन मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से समर्थकों में मायूसी है। उनके पिता स्व. अखिलेश सिंह पांच बार विधायक रह चुके हैं।
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ऐसे में अब भाजपा की नजर लोकसभा चुनाव पर है। मिशन-2024 के तहत पार्टी का अगला लक्ष्य सांसद सोनिया गांधी की कुर्सी हथियाना है।
दिनेश प्रताप सिंह कई दलों में रहे। कांग्रेस से दो बार एमएलसी रहे। भाई अवधेश प्रताप सिंह और छोटे भाई की पत्नी सुमन सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया।
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2017 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर अपने भाई राकेश सिंह को हरचंदपुर सीट से विधायक बनवाया। हालांकि 2018 में दिनेश ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया।
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भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सोनिया गांधी के खिलाफ उतारा। दिनेश ने पूरे दमखम से चुनाव लड़ा और सोनिया गांधी के वोटों के ग्राफ को काफी गिरा दिया।
शायद यही वजह रही कि वह और उनके समर्थक मंत्री पद पाने के लिए बेचैन रहे, लेकिन इस बार भाजपा ने उन्हें एमएलसी का टिकट उम्मीदवार बनाया है और अब योगी मंत्रिमंडल में मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाकर दोहरी खुशी दे दी।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो अमेठी से राहुल गांधी की हार के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि अब भाजपा की नजर रायबरेली सीट पर है।
शायद यही वजह है कि योगी सरकार में दिनेश प्रताप सिंह को मंत्री बनाकर रायबरेली फतह करने की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि आने वाला वक्त बताएगा कि मंत्री बनकर वह भाजपा के लिए 2024 में क्या गुल खिलाते हैं।
मेरी हार, लेकिन मंत्री के रूप में मिला सत्कर्मों का फल त्न राकेश सिंह
हरचंदपुर विधानसभा सीट से भाजपा से 2022 का चुनाव हारे पूर्व विधायक राकेश सिंह का कहना है कि वह भले ही चुनाव हार गए हैं, लेकिन उनके सत्कर्मों का फल मंत्री के रूप में मिला है। वह और उनका परिवार राजनीति हो या फिर पूजा-पाठ, हर कार्य में तन, मन, धन से काम करता है। शायद यही वजह है कि परिवार को मंत्री के रूप में बड़ी उपलब्धि मिली है।
अदिति के मंत्री बनने की उम्मीद टूटी
रायबरेली सदर सीट से दूसरी बार विधायक बनीं अदिति सिंह को मंत्री बनाए जाने की उम्मीद थी लेकिन मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से समर्थकों में मायूसी है। उनके पिता स्व. अखिलेश सिंह पांच बार विधायक रह चुके हैं।