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ठंड से ठिठुरे लोग, घरों में रहे कैद, जनजीवन अस्तव्यस्त

Fri, 17 Jan 2020 12:54 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jan 2020 12:54 AM IST
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People choked with cold, imprisoned in homes, disturbed life
रायबरेली। कड़ाके की ठंड के बीच बुधवार रात से गुरुवार को दिनभर हुई बारिश से आमजन को तमाम दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। जनजीवन प्रभावित रहा। मौसम के बदले मिजाज से आनन-फानन प्रशासन ने कक्षा आठ तक के स्कूल बंद कर दिए।
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बारिश के कारण सड़कों पर सन्नाटा दिखा। नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज के मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 2.4 किमी. प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही हवा ने गलन का एहसास कराया।
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बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 22 व न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। आर्द्रता अधिकतम 93 एवं न्यूनतम 89 फीसदी रही। अगले 24 घंटे में बादल छाए रहने व हल्की वर्षा होने का अनुमान है।
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एक सप्ताह से मौसम हर दिन बदलाव देखने को मिल रहा है। बुधवार रात से शुरू बारिश गुरुवार को दिनभर रुक-रुककर होती रही। सुबह से लेकर शाम हो गई, लेकिन लोगों को धूप के दीदार नहीं हो सके।
सर्दी से लोगों को कंपकंपी छूट गई। जरूरतमंद लोग ही घरों से बाहर निकले। लोगों ने सर्दी से बचने के लिए अलाव का सहारा लिया। शहर के जिला अस्पताल चौराहा, घंटाघर, कैपरगंज, डिग्री कॉलेज चौराहा, बस स्टेशन चौैैराहा पर अक्सर भीड़भाड़ रहती है, लेकिन बारिश के कारण यहां पर सन्नाटा दिखा।
इक्का-दुक्का मौजूद लोग सर्दी से बचने के लिए अलाव के इर्द-गिर्द नजर आए। बाजार में भी सन्नाटा दिखा। विकास नगर मार्ग और पुलिस लाइंस जाने वाले मार्ग पर कीचड़ की समस्या से लोगों को जूझना पड़ा।
बेमौसम बरसात का फसलों पर मिला-जुला असर पड़ेगा। विशेषज्ञों ने फसलों की सिंचाई रोकने की सलाह दी है। बताया कि ये वर्षा अरहर, चना, मटर की फसल के लिए लाभदायक है। मगर जिन फसलों में पूर्ण रूप से फूल आ गए हैं, उन्हें थोड़ी हानि हो सकती है।
सरसों में फली बन गई है तो लाभ होगा। मगर मौसम कई दिनों तक खराब रहा तो माहू कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। ये बारिश गेहूं, गोभी, बैगन आदि के लिए लाभकारी है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र सोहांव बलिया के अध्यक्ष प्रो. रवि प्रकाश मौर्य बताते हैं कि आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग लग सकता है। इसमें पत्तियां किनारे व सिरे से झुलसना प्रारंभ होती हैं।
जिसके कारण पूरा पौधा झुलस जाता है। पौधों पर काले-काले चकत्ते दिखाई देते हैं, जो बाद में बढ़ जाते हैं। जिससे कंद भी प्रभावित होता है। बदली के मौसम एवं वातावरण में नमी होने पर ये रोग उग्र रूप धारण कर लेता है तथा दो-तीन दिन में ही फसल नष्ट हो जाती है।
जिन फसलों पर अभी तक पिछेती झुलसा बीमारी प्रकट नहीं हुई है, उन पर मैंकोजेब प्रोपीने क्लोरोथेलोनील युक्त फफूंद नाशक एक किग्रा को 400 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें।
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि जिन खेतों में बीमारी के लक्षण दिखने लगे हों, उनमें साइमोइक्सेनील 400 ग्राम़, मैनकोजेब 800 ग्राम या फेनोमेडोन 400 ग्राम़, मैनकोजेब 800 ग्राम अथवा डाईमेथामार्फ 400 ग्राम, मैनकोजेब 800 ग्राम को 400 लीटर में घोलकर 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। दलहन, तिलहन, सब्जियों में जहां ज्यादा पानी लगने की संभावना हो, वहां जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित कर पानी निकालते रहें।

फलदार वृक्ष आम में बौर आना प्रारंभ हो गया है, तो बहुत ही फायदा होगा, क्योंकि उसमें लगने वाला फुदका कीट एवं चुर्णी फफूंद लगने की संभावना कम होगी। यदि बौर खिल गया है तो नुकसान होगा। वहीं पपीता को ज्यादा पानी से नुकसान होगा। जलनिकासी की व्यवस्था करें। पपीता के नन्हें पौधों को पाला ठंड से बचाने के लिए छाया की व्यवस्था करें।
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