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Raebareli News: बीमाधारक को 1.10 लाख रुपये क्लेम देने का आदेश
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रायबरेली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक मुकदमे की सुनवाई करते हुए इंडस्टि्रयल एरिया वागले स्टेट राम नगर विठ्ठल मंदिर थाना वेस्ट मुंबई की एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को दोषी करार दिया है। आरोग्य प्लस बीमा पॉलिसी बेचने के बाद भी कंपनी ने इलाज के बाद बीमाधारक को क्लेम नहीं दिया। आयोग ने बीमा कंपनी को 45 दिन के अंदर 1.10 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। ऐसा न करने पर सात प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज देना होगा।
शहर के सत्य नगर निवासी परिवादी सुनील कुमार सिंह ने शहर की ही एसबीआई शाखा में बचत खाता खुलवाया था। आरोप है कि 26 जुलाई 2019 को इंडस्टि्रयल एरिया वागले स्टेट राम नगर विठ्ठल मंदिर थाना वेस्ट मुंबई की एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी से आरोग्य प्लस बीमा पालिसी ली थी। इसका प्रीमियम भी जमा कर दिया था। पॉलिसी में स्वयं व पत्नी सुमन का पांच लाख का मेडिक्लेम था। पत्नी सुमन की बच्चेदानी में समस्या होने पर 22 सितंबर 2019 को अस्पताल में भर्ती कराया और सर्जरी के बाद 23 दिसंबर 2019 को अस्पताल से डिस्चार्ज कराया।
क्लेम आईडी संख्या 2211895 के माध्यम से दवा के परचे व अन्य अभिलेख लगाकर बीमा कंपनी से क्लेम का भुगतान मांगा। आरोप है कि वर्ष 2021 तक लगातार क्लेम दिलाने की मांग की, लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम नहीं दिया। मुकदमे की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मदनलाल निगम, सदस्य प्रतिमा सिंह व सुनीता मिश्रा ने बीमा कंपनी को दोषी करार दिया। आयोग ने बीमा कंपनी को 45 दिन में 1.10 लाख रुपये बीमाधारक को अदा करने के आदेश दिए। ऐसा न करने पर सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा। मानसिक क्षतिपूर्ति में दो हजार और वाद व्यय के रूप में एक हजार भी देने होंगे।
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शहर के सत्य नगर निवासी परिवादी सुनील कुमार सिंह ने शहर की ही एसबीआई शाखा में बचत खाता खुलवाया था। आरोप है कि 26 जुलाई 2019 को इंडस्टि्रयल एरिया वागले स्टेट राम नगर विठ्ठल मंदिर थाना वेस्ट मुंबई की एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी से आरोग्य प्लस बीमा पालिसी ली थी। इसका प्रीमियम भी जमा कर दिया था। पॉलिसी में स्वयं व पत्नी सुमन का पांच लाख का मेडिक्लेम था। पत्नी सुमन की बच्चेदानी में समस्या होने पर 22 सितंबर 2019 को अस्पताल में भर्ती कराया और सर्जरी के बाद 23 दिसंबर 2019 को अस्पताल से डिस्चार्ज कराया।
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क्लेम आईडी संख्या 2211895 के माध्यम से दवा के परचे व अन्य अभिलेख लगाकर बीमा कंपनी से क्लेम का भुगतान मांगा। आरोप है कि वर्ष 2021 तक लगातार क्लेम दिलाने की मांग की, लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम नहीं दिया। मुकदमे की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मदनलाल निगम, सदस्य प्रतिमा सिंह व सुनीता मिश्रा ने बीमा कंपनी को दोषी करार दिया। आयोग ने बीमा कंपनी को 45 दिन में 1.10 लाख रुपये बीमाधारक को अदा करने के आदेश दिए। ऐसा न करने पर सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा। मानसिक क्षतिपूर्ति में दो हजार और वाद व्यय के रूप में एक हजार भी देने होंगे।
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