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एनटीपीसी के प्रदूषण से मिलेगी राहत, जिप्सम से बनाएंगे सीमेंट
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ऊंचाहार (रायबरेली)। एनटीपीसी परियोजना में राख का सदुपयोग कर फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) सिस्टम से निकलने वाले जिप्सम से सीमेंट बनाने की योजना तैयार की गई है। एनटीपीसी ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। टेंडर होने के बाद जिप्सम की आपूर्ति शुरू की जाएगी। ऐसा होने से प्रदूषण से राहत मिलेगी। इस कार्ययोजना को लेकर ऊर्जा मंत्रालय ने खुशी जाहिर कर कहा कि एनटीपीसी नए आयाम स्थापित करेगी।
एनटीपीसी परियोजना में 210-210 मेगावाट क्षमता की पांच व छठवीं यूनिट से 500 मेगावाट विद्युत उत्पादन होता है। यूनिटों में जलने वाले कोयले से सल्फर डाई ऑक्साइड गैस निकलती है, जिससेे प्रदूषण होता है। इसे रोकने के लिए परियोजना में फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (दहन गैस निर्गंधीकरण) तकनीक अपनाई गई है। इससे सल्फर गैस को अवशोषित कर जिप्सम बनाया जा रहा है। जिप्सम को सीमेंट बनाने में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों की मानें तो जिप्सम सीमेंट बनाने वाली कंपनियों को बेचा जाएगा।
परियोजना की जनसंपर्क अधिकारी कोमल शर्मा ने बताया कि एफजीडी सिस्टम से निकाली जा रही जिप्सम का इस्तेमाल सीमेंट बनाने में करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि परियोजना की राख प्रयागराज फाफामऊ बाईपास, कानपुर प्रयागराज हाईवे, लखनऊ रिंग रोड, रायबरेली रिंग रोड व उन्नाव-लालगंज रोड निर्माण में हो रहा है। बताया कि यह सिस्टम अभी शुरू हुआ है, इसलिए बताना मुश्किल होगा कि रोजाना कितनी जिप्सम निकलेगी। सहायक जनसंपर्क अधिकारी आज्ञा शरण सिंह ने बताया कि एनटीपीसी में प्रतिमाह 500 मीट्रिक टन जिप्सम तैयार हो रहा है, योजना मार्च से शुरू होगी।
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एनटीपीसी परियोजना में 210-210 मेगावाट क्षमता की पांच व छठवीं यूनिट से 500 मेगावाट विद्युत उत्पादन होता है। यूनिटों में जलने वाले कोयले से सल्फर डाई ऑक्साइड गैस निकलती है, जिससेे प्रदूषण होता है। इसे रोकने के लिए परियोजना में फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (दहन गैस निर्गंधीकरण) तकनीक अपनाई गई है। इससे सल्फर गैस को अवशोषित कर जिप्सम बनाया जा रहा है। जिप्सम को सीमेंट बनाने में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों की मानें तो जिप्सम सीमेंट बनाने वाली कंपनियों को बेचा जाएगा।
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परियोजना की जनसंपर्क अधिकारी कोमल शर्मा ने बताया कि एफजीडी सिस्टम से निकाली जा रही जिप्सम का इस्तेमाल सीमेंट बनाने में करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि परियोजना की राख प्रयागराज फाफामऊ बाईपास, कानपुर प्रयागराज हाईवे, लखनऊ रिंग रोड, रायबरेली रिंग रोड व उन्नाव-लालगंज रोड निर्माण में हो रहा है। बताया कि यह सिस्टम अभी शुरू हुआ है, इसलिए बताना मुश्किल होगा कि रोजाना कितनी जिप्सम निकलेगी। सहायक जनसंपर्क अधिकारी आज्ञा शरण सिंह ने बताया कि एनटीपीसी में प्रतिमाह 500 मीट्रिक टन जिप्सम तैयार हो रहा है, योजना मार्च से शुरू होगी।
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