{"_id":"59b42a854f1c1bf87f8b5608","slug":"last-farewell-to-ajaypal-with-humble-eyes","type":"story","status":"publish","title_hn":"अजयपाल को नम आंखों से दी अंतिम विदाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अजयपाल को नम आंखों से दी अंतिम विदाई
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
Updated Sat, 09 Sep 2017 11:23 PM IST
विज्ञापन
सांसद सोनिया गांधी की ओर से जवान को श्रद्धांजलि अर्पित करते कांग्रेस जिलाध्यक्ष वीके शुक्ल, मौजूद परिवारीजन व ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेना के जवान अजयपाल सिंह उर्फ कुलदीप सिंह को शनिवार को अंतिम विदाई दी गई। जवान के जज्बे को सबने सलाम किया। इस दौरान कोई अपने आंसुओं को नहीं रोक पाया। पुलिस कर्मियों ने जवान को सलामी दी। बड़े भाई ने मुुखाग्नि की रस्म निभाई। प्रभारी डीएम-सीडीओ देवेंद्र पांडेय और पुलिस अधीक्षक शिवहरि मीणा ने भी जवान को कंधा दिया तो उनकी भी आंखें भर आईं।
गांव में जहां पर चहल-पहल रहती थी, वहां चीखें गूंज रही थीं। लोगों में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा था। साथ ही उनमें अजयपाल सिंह के खोेने का गम था। सुबह आठ बजे सेना के जवान का शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। परिवारीजन ही नहीं, बल्कि पूरा गांव रो पड़ा। पत्नी लता सिंह समेत कई महिलाएं तो रोते-रोते बेहोश हो गई।
पिता श्रीराम सिंह और मां शारदा सिंह के भी आंसू नहीं थम रहे थे। बेटे को याद करते ही रो पड़ते और छाती पीटने लगते। बड़े भाई सरदार सिंह, कप्तान सिंह और प्रदीप सिंह के आंखों में भाई कुलदीप के खोने का गम साफ दिख रहा था। वे भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। जवान की भाभी भी रोते-रोते बेहोश हो जाती थी। लखनऊ-इलाहाबाद राजमार्ग स्थित बाग में अंत्येष्टि के लिए शव को ले जाया गया। बड़े भाई सरदार सिंह ने शव को मुखाग्नि दी। पूरे गांव का माहौल गमगीन था और हर कोई रो रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
गांव में जहां पर चहल-पहल रहती थी, वहां चीखें गूंज रही थीं। लोगों में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा था। साथ ही उनमें अजयपाल सिंह के खोेने का गम था। सुबह आठ बजे सेना के जवान का शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। परिवारीजन ही नहीं, बल्कि पूरा गांव रो पड़ा। पत्नी लता सिंह समेत कई महिलाएं तो रोते-रोते बेहोश हो गई।
विज्ञापन
पिता श्रीराम सिंह और मां शारदा सिंह के भी आंसू नहीं थम रहे थे। बेटे को याद करते ही रो पड़ते और छाती पीटने लगते। बड़े भाई सरदार सिंह, कप्तान सिंह और प्रदीप सिंह के आंखों में भाई कुलदीप के खोने का गम साफ दिख रहा था। वे भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। जवान की भाभी भी रोते-रोते बेहोश हो जाती थी। लखनऊ-इलाहाबाद राजमार्ग स्थित बाग में अंत्येष्टि के लिए शव को ले जाया गया। बड़े भाई सरदार सिंह ने शव को मुखाग्नि दी। पूरे गांव का माहौल गमगीन था और हर कोई रो रहा था।
विज्ञापन