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Raebareli News: सिंचाई के संकट से जूझ रहे पांच लाख से ज्यादा किसान
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रायबरेली। जिले में लगे 373 राजकीय नलकूप में 360 संचालित होने का दावा किया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि इनमें से 50 फीसदी नलकूप खराब हैं। इतना ही नहीं जो नलकूप चल रहे हैं। उनसे पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पा रही है।
जबकि एक नलकूप से 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई होनी चाहिए। नालियां ध्वस्त होने की वजह से 10 से 15 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही पानी पहुंच रहा है। इस वजह से करीब पांच लाख किसान निजी नलकूप से सिंचाई करने को मजबूर हैं। इसके लिए किसानों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
शासन से प्रति राजकीय नलकूप के रख रखाव के लिए 50 हजार रुपये मिलते हैं। यह धन राशि उन्हीं नलकूपों के लिए दी जाती है, जो चालू होते है। विभाग इस बजट को हड़पने के लिए नलकूपों को कागजों पर चालू दिखा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत पर बड़ी संख्या में नलकूप बंद हैं। खास बात यह है कि विभाग के पास कौन-कौन राजकीय नलकूप बंद है, इसकी सूची तक नहीं है।
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जिले में 373 राजकीय नलकूप लगे हैं। इसमें 13 नलकूप खराब हैं। शेष नलकूप चल रहे हैं। यदि कहीं कोई दिक्कत आती है तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा। हमारी कोशिश है कि किसानों को सिंचाई की समस्या से जूझना न पड़े।
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जबकि एक नलकूप से 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई होनी चाहिए। नालियां ध्वस्त होने की वजह से 10 से 15 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही पानी पहुंच रहा है। इस वजह से करीब पांच लाख किसान निजी नलकूप से सिंचाई करने को मजबूर हैं। इसके लिए किसानों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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शासन से प्रति राजकीय नलकूप के रख रखाव के लिए 50 हजार रुपये मिलते हैं। यह धन राशि उन्हीं नलकूपों के लिए दी जाती है, जो चालू होते है। विभाग इस बजट को हड़पने के लिए नलकूपों को कागजों पर चालू दिखा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत पर बड़ी संख्या में नलकूप बंद हैं। खास बात यह है कि विभाग के पास कौन-कौन राजकीय नलकूप बंद है, इसकी सूची तक नहीं है।
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जिले में 373 राजकीय नलकूप लगे हैं। इसमें 13 नलकूप खराब हैं। शेष नलकूप चल रहे हैं। यदि कहीं कोई दिक्कत आती है तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा। हमारी कोशिश है कि किसानों को सिंचाई की समस्या से जूझना न पड़े।