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अफसरों की अनदेखी, नागरिकों पर पर पड़ रही भारी

Wed, 30 Mar 2022 11:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Mar 2022 11:57 PM IST
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Ignoring the officers, heavy on the citizens
रायबरेली। नगर पालिका परिषद के नागरिकों को उम्मीद थी कि अमृत योजना से शहर का कायाकल्प होगा। नई सीवर लाइन मिलेगी और शुद्ध पानी मिलेगा, लेकिन कार्यदायी संस्था की मनमानी और निगरानी करने वाले अफसरों की अनदेखी नागरिकों पर भारी पड़ रही है। यह हाल तब है, जब एक अरब से ज्यादा पेयजल व्यवस्था पर खर्च किए गए, जबकि सीवर लाइन के लिए 242 करोड़ मिले, जिसमें से पहले चरण में 80 करोड़ खर्च किए गए। पेयजल की आपूर्ति लाइन की गुणवत्ता ठीक न होने के कारण आठ जोन को नगर पालिका ने अब तक हैंडओवर नहीं किया है। सीवर लाइन का काम अभी तक पूरा नहीं पाया है। इन कार्यों को जनवरी 2021 तक पूरा करके नागरिकों को सुविधा मुहैया कराना था, लेकिन काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
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दरअसल केंद्र सरकार ने जिले की इकलौती नगर पालिका परिषद के नागरिकों को पेयजल संकट और सीवर की समस्या से निजात दिलाने के लिए अमृत योजना को हरी झंडी दी थी। वर्ष 2016 में 1.17 करोड़ की लागत से पेयजल आपूर्ति के लिए नई पानी की टंकियां स्थापित करने और नई पाइप लाइन शहर में बिछाए जाने का काम शुरू किया गया, जबकि 242 करोड़ सीवर लाइन के लिए खर्च करना था। पाइप लाइन बिछाने और टंकियों के निर्माण का कार्य तो पूरा किया गया, लेकिन इस कार्य में भी लापरवाही और कमीशनबाजी हावी रही। नतीजतन यह काम 20 जोन में कराया गया था। नगर पालिका से सेटिंग-गेटिंग के कारण कार्यदायी संस्था जलनिगम ने 12 जोन तो नगर पालिका को हैंडओवर कर दिया, लेकिन आठ जोन को नगर पालिका हैंडओवर नहीं कर रही है। पालिका कह रही है कि पहले कमियों को दूर किया जाए।
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घटिया किस्म की पाइपें डालने की वजह से पाइपें लीकेज हैं। इससे मोहल्लों में पानी भरा रहता है। पानी की आपूर्ति नागरिकों के घरों तक नहीं हो पा रही। नगर पालिका के जलकल विभाग के जेई धीरज कहते हैं कि आठ जोन अब तक हैंडओवर नहीं हुुए हैैं। हैंडओवर किए गए 12 जोन में खामियों की वजह से पानी आपूर्ति में दिक्कत हो रही है। सवाल उठ रहा है कि सिर्फ सीवर लाइन ही नहीं, बल्कि पेयजल व्यवस्था के कार्य में भी खूब गड़बड़झाला किया गया है।
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महज 22 हजार दिए गए कनेक्शन
शहर क्षेत्र के 34 मोहल्ले में नगर पालिका के जलकल विभाग की तरफ से पानी की आपूर्ति की जाती है। अमृत योजना के तहत बिछाई गई पाइप लाइनें लीकेज हैं। इससे पानी आपूर्ति ठीक से नहीं हो पा रही है। शहर क्षेत्र के 42 हजार नागरिकों को पेयजल के लिए कनेक्शन जलनिगम के अधिकारियों की ओर से दिया जाना चाहिए था। होते करते पांच साल का समय बीत गया है, लेकिन आज तक महज 22 हजार लोगों को ही कनेक्शन मिल पाया, लेकिन इन लोगों को जैसे तैसे पानी मिल रहा है।

सीवर कनेक्शन पाने का इंतजार कर रहे लोग
अमृत योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने का कार्य 2018 में शुरू कराया गया था। अमृत योजना कार्य के लिए शासन से कार्यदायी संस्था जल निगम है, लेकिन काम कराने के लिए फर्म घारपूरे इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को नामित किया गया था। बावजूद घारपूरे कंपनी की ओर से यह कार्य तोमर कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से कराया जा रहा था। शहर क्षेत्र में करीब 18 हजार लोगों को सीवर का कनेक्शन दिया जाना है। तोमर कंस्ट्रक्शन की ओर से कराए गए कार्य के तहत लोगों को कनेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। पहले चरण के कार्य में 80 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन सीवर का लाभ अभी नागरिकों को नहीं मिल पा रहा है। दूसरे चरण के तहत कार्यदायी संस्था केके स्पाइन ने सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू कराया है। शुरुआती दौर से ही यह योजना बंदरबांट का शिकार रही। नतीजतन इस लापरवाही से दो श्रमिकों की जान चली गई।
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