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महिलाओं को कैसे मिले न्याय, लापता हो गए पिंक बॉक्स
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रायबरेली में सोमवार को कचहरी रोड पर एक स्कूूल के बाहर लगा लगा पिंक बाक्स।
- फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए लगवाए गए पिंक बॉक्स लापता हो गए हैं। चाहे फिर शहर के विभिन्न चौराहे हों या फिर थाने। कुछ स्थानों पर छोड़कर कहीं पर भी पिंक बॉक्स लगे नजर नहीं आ रहे हैं। यह हाल तब है, जब प्रदेश सरकार मिशन शक्ति अभियान चलाकर महिलाओं को न्याय दिलाने का काम कर रही है, लेकिन यहां के पुलिस अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। दो साल पहले जोरशोर से पिंक बॉक्स लगाने की कवायद शुरू हुई थी। मकसद था अगर किसी भी महिला के साथ गलत हो रहा है तो वह इस बॉक्स में अपनी शिकायत लिखकर डाल सकती थी। इसके लिए स्कूलों-कॉलेजों समेत शहर में करीब 66 जगह चुनी गई थी, लेकिन अफसोस दो साल बाद कुछ स्थानों को छोड़कर पब्लिक प्लेस पर पिंक बॉक्स उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा देहात क्षेत्रों में भी पिंक बॉक्स लगवाने की योजना धरी की धरी रह गई है।
क्या है पिंक बॉक्स
शहर में कई जगहों पर शोहदे और मनचले दिनभर कोई न कोई हरकत करते हैं, लेकिन इस बारे में छात्राएं, महिलाएं और युवतियां खुलकर आवाज नहीं उठा पाती। इसलिए व्यवस्था की गई थी कि बिना नाम, पते का जिक्र किए महिलाएं पिंक बॉक्स में शोहदों की जानकारी देंगी। इसके लिए एक लेटर बॉक्स बनाकर उसे गुलाबी कलर से रंग करके पिंक बॉक्स का नाम दिया गया। तय हुआ था कि एंटी रोमियो स्क्वायड टीम गश्त के दौरान बॉक्स को खोलकर पर्ची देखेगी। इसके आधार पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी, ताकि शोहदों-मनचलों पर लगाम लगाई जा सके।
भूल के अफसर
पिंक बॉक्स लगाने की शुरुआत तो जोरशोर से हुई, लेकिन वक्त के साथ पुलिस अधिकारी इस योजना को भूल गए। फिलहाल कुछ स्कूूलों में लगे पिंक बॉक्स सुरक्षित तो है, लेकिन अन्य स्थानों पर पिंक बॉक्स लगे नहीं दिखते हैं। वैसे तो स्कूल अब बंद हो गए हैं, लेकिन अगले माह से स्कूल भी खुल जाएंगे। स्कूल के दौरान छींटाकशी की घटनाएं आम हो जाती हैं। ऐसे में पिंक बाक्स लगना जरूरी है, लेकिन अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं हैं।
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पिंक बॉक्स नहीं खुलते ताले, दब जाता इंसाफ
शहर के कुछ स्कूलों में पिंक बॉक्स लगवाए गए हैं। ये दीगर बात है कि इन पिंक बाक्स के ताले कभी नहीं खुलते। ऐसे में शिकायत करने वाली पीड़ित महिलाओं का न्याय पिंक बॉक्स में ही दबकर रह जाता है। जाहिर सी बात है कि पिंक बॉक्स लगवाने की शासन की जो मंशा थी, वह कागजों तक सीमित रह गई है।
महिलाओं के लिए एक रिपोर्टिंग पुलिस चौकी
जिले में महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए एक रिपोर्टिंग चौकी स्थापित की गई है। जिले में दूरदराज की महिलाओं को अपनी फरियाद लेकर जिला मुख्यालय पर स्थित महिला थाने में आने में दिक्कत होती थी। इसी देखते हुए लालगंज कोतवाली में ही महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकी स्थापित कराई गई है। इस महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकी की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी अपर पुलिस अधीक्षक को दी गई है।
पिंक बॉक्स कहां-कहां लगाए गए थे, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। सभी थानों, पुलिस चौकियों पर अनिवार्य रूप से पिंक बॉक्स लगवाए जाएंगे। जहां पर पिंक बॉक्स लगे हैं, उन्हें क्यों खोलकर उसमें आई शिकायतों को नहीं देखा जाता, इसको लेकर सख्त कदम उठाए जाएंगे। -आलोक प्रियदर्शी, एसपी
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क्या है पिंक बॉक्स
शहर में कई जगहों पर शोहदे और मनचले दिनभर कोई न कोई हरकत करते हैं, लेकिन इस बारे में छात्राएं, महिलाएं और युवतियां खुलकर आवाज नहीं उठा पाती। इसलिए व्यवस्था की गई थी कि बिना नाम, पते का जिक्र किए महिलाएं पिंक बॉक्स में शोहदों की जानकारी देंगी। इसके लिए एक लेटर बॉक्स बनाकर उसे गुलाबी कलर से रंग करके पिंक बॉक्स का नाम दिया गया। तय हुआ था कि एंटी रोमियो स्क्वायड टीम गश्त के दौरान बॉक्स को खोलकर पर्ची देखेगी। इसके आधार पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी, ताकि शोहदों-मनचलों पर लगाम लगाई जा सके।
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भूल के अफसर
पिंक बॉक्स लगाने की शुरुआत तो जोरशोर से हुई, लेकिन वक्त के साथ पुलिस अधिकारी इस योजना को भूल गए। फिलहाल कुछ स्कूूलों में लगे पिंक बॉक्स सुरक्षित तो है, लेकिन अन्य स्थानों पर पिंक बॉक्स लगे नहीं दिखते हैं। वैसे तो स्कूल अब बंद हो गए हैं, लेकिन अगले माह से स्कूल भी खुल जाएंगे। स्कूल के दौरान छींटाकशी की घटनाएं आम हो जाती हैं। ऐसे में पिंक बाक्स लगना जरूरी है, लेकिन अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं हैं।
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पिंक बॉक्स नहीं खुलते ताले, दब जाता इंसाफ
शहर के कुछ स्कूलों में पिंक बॉक्स लगवाए गए हैं। ये दीगर बात है कि इन पिंक बाक्स के ताले कभी नहीं खुलते। ऐसे में शिकायत करने वाली पीड़ित महिलाओं का न्याय पिंक बॉक्स में ही दबकर रह जाता है। जाहिर सी बात है कि पिंक बॉक्स लगवाने की शासन की जो मंशा थी, वह कागजों तक सीमित रह गई है।
महिलाओं के लिए एक रिपोर्टिंग पुलिस चौकी
जिले में महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए एक रिपोर्टिंग चौकी स्थापित की गई है। जिले में दूरदराज की महिलाओं को अपनी फरियाद लेकर जिला मुख्यालय पर स्थित महिला थाने में आने में दिक्कत होती थी। इसी देखते हुए लालगंज कोतवाली में ही महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकी स्थापित कराई गई है। इस महिला रिपोर्टिंग पुलिस चौकी की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी अपर पुलिस अधीक्षक को दी गई है।
पिंक बॉक्स कहां-कहां लगाए गए थे, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। सभी थानों, पुलिस चौकियों पर अनिवार्य रूप से पिंक बॉक्स लगवाए जाएंगे। जहां पर पिंक बॉक्स लगे हैं, उन्हें क्यों खोलकर उसमें आई शिकायतों को नहीं देखा जाता, इसको लेकर सख्त कदम उठाए जाएंगे। -आलोक प्रियदर्शी, एसपी