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वीरों की भूमि को नमन करने आया हूं : नाईक
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
Updated Sat, 07 Jan 2017 11:21 PM IST
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रायबरेली में शनिवार को फिरोज गांधी महाविद्यालय के सभागार में समारोह में बोलते हुए राज्यपाल रामनाईक।
- फोटो : अमर उजाला
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मैं वीरों की भूमि को नमन करने आया हूं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राणा बेनी माधव सिंह की प्रतिमा को देखकर छत्रपति शिवाजी की याद आ गई। अंग्रेजों के साथ जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी, उन्हें शत-शत नमन। यह उद्गार मुख्य अतिथि राज्यपाल रामनाईक ने शनिवार को एफजी कॉलेज सभागार में आयोजित समारोह में व्यक्त किए।
कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों को कुछ इतिहासकारों ने गलत तरीके से पेश किया। देश के लिए मर मिटने वालों को कुछ इतिहासकारों ने बागी और उनके संघर्ष को बगावत बताया है, जबकि वह बगावत नहीं, बल्कि अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन का आगाज था।
राज्यपाल ने इस संबंध में वीर सावरकर की एक पुस्तक का उदाहरण दिया और कहा कि सच्चाई जाननी है, तो इस पुस्तक में स्वतंत्रता संग्राम का विस्तार से वर्णन किया गया है। जिसे पढ़कर सच्चाई जानी जा सकता है। उन्होंने कहा कि रानी लक्ष्मी बाई, वीर पेशवा, राणा बेनी माधव समेत कई योद्धाओं ने जान की बाजी लगा दी।
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उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने सारे समाज को जागृत किया। जो समाज अपना इतिहास भूलता है, वह कभी भविष्य नहीं बना सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रदेश है, बल्कि इससे बडे़ विश्व में सिर्फ चार देश है। इसमें चीन, अमेरिका, ब्राजील और इंडोनेशिया है।
ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि प्रदेश को मजबूत करें। उन्होंने सभी को 100 फीसदी मतदान करने का संकल्प दिलाया। कहा अपने अधिकारों का प्रयोग करना सबका दायित्व है। राज्यपाल सबसे पहले सई नदी तट शहीद स्मारक पर पहुंचे।
यहां पर शहीद किसानों को नमन करते हुए पुष्प चक्र अर्पित किया। इसके बाद नेहरू नगर स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राणा बेनी माधव सिंह की अश्वारोही प्रतिमा की अनावरण किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने सारे समाज को जागृत किया।
जो समाज अपना इतिहास भूलता है, वह कभी भविष्य नहीं बना सकता है। 1857 से 1947 तक आजादी को लेकर संघर्ष चला है। आजादी के लिए संघर्ष करने वालों ने जाति, धर्म, क्षेत्र को भूलकर सिर्फ स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी।
लोकमान्य तिलक ने महाराष्ट्र नहीं, बल्कि 1916 में लखनऊ के कांग्रेस की राष्ट्रीय सभा में कहा था कि स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, उसे मैं पाकर ही रहूंगा। हमें अपने आप में देखना होगा कि किसमें कितनी राष्ट्र भक्ति है।
उन्होंने कहा कि जब वह पेट्रोलियम मंत्री थे, तो अंडमान गया। वहां पर अंग्रेजी हुकूमत काला पानी की सजा देकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को भेज देती थी। ऐसे में उनके संघर्ष को संजोने के लिए चारों दीवारों पर आजादी के लिए संघर्ष करने वालों के संदेश लिखाए।
इसमें वीर सावरकर, बहादुरशाह जफर, मदनलाल ढींगरा, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और भगत सिंह के संदेश लिखकर लोगों को देश हित के लिए प्रेरित करने का कार्य किया। इससे पहले एफजी कॉलेज सभागार में राज्यपाल को डीएम अनुज कुमार झा, एसपी विनय कुमार यादव ने बुकें भेंट किया।
वहीं आयोजन समिति के मुकेश सिंह, डॉ. राजीव सिंह, नगर पालिका चेयरमैन इलियास ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। एफजी कॉलेज प्रबंध सचिव ओएन भार्गव, प्राचार्य एसके पांडेय आदि ने भी राज्यपाल का स्वागत किया।जय चक्रवर्ती ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
समारोह स्थगित होने के बाबत आयोजकों से खेद जताते हुए राज्यपाल ने कहा कि 4 जनवरी को आचार संहिता लग गई थी। राज्यपाल पर चुनाव आचार संहिता लागू नहीं होती है। आयोजकों को कठिनाई न हो, ऐसे में मैने संबंधित अधिकारी को पत्र भेजकर पहले ही राय मांगी।
दिल्ली मुख्य निर्वाचन आयोग से 6 जनवरी की शाम छह बजे तक कोई सूचना नहीं मिली। कोई विवाद न हो, इसीलिए मैने आयोजकों से असमर्थता जता दी। रात 12:30 बजे मुख्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि मंच पर राजनेता नहीं होना चाहिए। साथ ही भाषा भी राजनीति से प्रेरित न हो। फिलहाल अंत भला तो सब भला है।
राज्यपाल ने अवध केसरी स्मारिका का विमोचन किया। मंच पर बैठे प्रो. ओपी सिंह ने कहा कि राणा बेनी माधव ने देश की आजादी के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया। आजादी की लड़ाई में हर धर्म, वर्ग के लोग शामिल हुए। एमएल भट्ट ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। हमारा देश उनका ऋणी है।
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कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों को कुछ इतिहासकारों ने गलत तरीके से पेश किया। देश के लिए मर मिटने वालों को कुछ इतिहासकारों ने बागी और उनके संघर्ष को बगावत बताया है, जबकि वह बगावत नहीं, बल्कि अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन का आगाज था।
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राज्यपाल ने इस संबंध में वीर सावरकर की एक पुस्तक का उदाहरण दिया और कहा कि सच्चाई जाननी है, तो इस पुस्तक में स्वतंत्रता संग्राम का विस्तार से वर्णन किया गया है। जिसे पढ़कर सच्चाई जानी जा सकता है। उन्होंने कहा कि रानी लक्ष्मी बाई, वीर पेशवा, राणा बेनी माधव समेत कई योद्धाओं ने जान की बाजी लगा दी।
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उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने सारे समाज को जागृत किया। जो समाज अपना इतिहास भूलता है, वह कभी भविष्य नहीं बना सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रदेश है, बल्कि इससे बडे़ विश्व में सिर्फ चार देश है। इसमें चीन, अमेरिका, ब्राजील और इंडोनेशिया है।
ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि प्रदेश को मजबूत करें। उन्होंने सभी को 100 फीसदी मतदान करने का संकल्प दिलाया। कहा अपने अधिकारों का प्रयोग करना सबका दायित्व है। राज्यपाल सबसे पहले सई नदी तट शहीद स्मारक पर पहुंचे।
यहां पर शहीद किसानों को नमन करते हुए पुष्प चक्र अर्पित किया। इसके बाद नेहरू नगर स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राणा बेनी माधव सिंह की अश्वारोही प्रतिमा की अनावरण किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने सारे समाज को जागृत किया।
जो समाज अपना इतिहास भूलता है, वह कभी भविष्य नहीं बना सकता है। 1857 से 1947 तक आजादी को लेकर संघर्ष चला है। आजादी के लिए संघर्ष करने वालों ने जाति, धर्म, क्षेत्र को भूलकर सिर्फ स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी।
लोकमान्य तिलक ने महाराष्ट्र नहीं, बल्कि 1916 में लखनऊ के कांग्रेस की राष्ट्रीय सभा में कहा था कि स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, उसे मैं पाकर ही रहूंगा। हमें अपने आप में देखना होगा कि किसमें कितनी राष्ट्र भक्ति है।
उन्होंने कहा कि जब वह पेट्रोलियम मंत्री थे, तो अंडमान गया। वहां पर अंग्रेजी हुकूमत काला पानी की सजा देकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को भेज देती थी। ऐसे में उनके संघर्ष को संजोने के लिए चारों दीवारों पर आजादी के लिए संघर्ष करने वालों के संदेश लिखाए।
इसमें वीर सावरकर, बहादुरशाह जफर, मदनलाल ढींगरा, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और भगत सिंह के संदेश लिखकर लोगों को देश हित के लिए प्रेरित करने का कार्य किया। इससे पहले एफजी कॉलेज सभागार में राज्यपाल को डीएम अनुज कुमार झा, एसपी विनय कुमार यादव ने बुकें भेंट किया।
वहीं आयोजन समिति के मुकेश सिंह, डॉ. राजीव सिंह, नगर पालिका चेयरमैन इलियास ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। एफजी कॉलेज प्रबंध सचिव ओएन भार्गव, प्राचार्य एसके पांडेय आदि ने भी राज्यपाल का स्वागत किया।जय चक्रवर्ती ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
समारोह स्थगित होने के बाबत आयोजकों से खेद जताते हुए राज्यपाल ने कहा कि 4 जनवरी को आचार संहिता लग गई थी। राज्यपाल पर चुनाव आचार संहिता लागू नहीं होती है। आयोजकों को कठिनाई न हो, ऐसे में मैने संबंधित अधिकारी को पत्र भेजकर पहले ही राय मांगी।
दिल्ली मुख्य निर्वाचन आयोग से 6 जनवरी की शाम छह बजे तक कोई सूचना नहीं मिली। कोई विवाद न हो, इसीलिए मैने आयोजकों से असमर्थता जता दी। रात 12:30 बजे मुख्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि मंच पर राजनेता नहीं होना चाहिए। साथ ही भाषा भी राजनीति से प्रेरित न हो। फिलहाल अंत भला तो सब भला है।
राज्यपाल ने अवध केसरी स्मारिका का विमोचन किया। मंच पर बैठे प्रो. ओपी सिंह ने कहा कि राणा बेनी माधव ने देश की आजादी के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया। आजादी की लड़ाई में हर धर्म, वर्ग के लोग शामिल हुए। एमएल भट्ट ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। हमारा देश उनका ऋणी है।