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शुद्ध हवा मिलना दुश्वार, पानी हुआ जहरीला
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Dec 2015 11:27 PM IST
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यही नहीं हर साल वाहनों की तादाद भी बढ़ती जा रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सख्त आदेश हैं कि वायु एवं पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण किया जाए, पर इसका पालन होता नहीं दिख रहा है।
हालांकि जिले में संचालित सीमेंट फैक्ट्री और एनटीपीसी में ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लगवा दिए गए हैं। लेकिन वातावरण में जहर घोल रहे प्रतिबंधित जेनरेटरों के प्रयोग पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है।
यही नहीं नदियों में प्रदूषण की निगरानी के लिए डीएम सूर्यपाल गंगवार के नेतृत्व में कमेटी का गठन तो कर दिया गया, इसका भी कोई खास असर नहीं दिख रहा है।
हालात यह हैं कि शहर में ही राजघाट के पास गंदे नाले का पानी सई नदी में गिराया जा रहा है। वहीं कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य निगरानी के नाम पर सिर्फ खानापूरी कर रहे हैं।
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यही नहीं गंगा में भी डलमऊ कस्बे के लोगों के घरों का पानी जा रहा है। इससे पानी खराब हो रहा है। जिले में प्रदूषण बढ़ने का कारण वाहनों की बढ़ती तादाद भी बन रही है।
जिले में हर साल करीब 30 हजार दो पहिया और चार पहिया वाहन खरीदे जा रहे हैं। इसमें दो पहिया वाहनों की तादाद अधिक है। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है।
यही नहीं अधिकतर पुराने चलाए जा रहे वाहनों से सबसे अधिक प्रदूषण हो रहा है। पर उन पर रोक नहीं लगाई जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. एके सिंह का कहना है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन किया जा रहा है। फैक्ट्रियों में जल प्रदूषण रोकने के लिए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लगवाए गए हैं।
नदियों में प्रदूषण की निगरानी के लिए डीएम के नेतृत्व में कमेटी गठित कर सभी सदस्यों और पदाधिकारियों को नदियों में प्रदूषण का जायजा लेकर रिपोर्ट देने को कहा है। बैठक में ये रिपोर्ट रखी जाएगी। इसके बाद कार्रवाई होगी।
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हालांकि जिले में संचालित सीमेंट फैक्ट्री और एनटीपीसी में ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लगवा दिए गए हैं। लेकिन वातावरण में जहर घोल रहे प्रतिबंधित जेनरेटरों के प्रयोग पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है।
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यही नहीं नदियों में प्रदूषण की निगरानी के लिए डीएम सूर्यपाल गंगवार के नेतृत्व में कमेटी का गठन तो कर दिया गया, इसका भी कोई खास असर नहीं दिख रहा है।
हालात यह हैं कि शहर में ही राजघाट के पास गंदे नाले का पानी सई नदी में गिराया जा रहा है। वहीं कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य निगरानी के नाम पर सिर्फ खानापूरी कर रहे हैं।
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यही नहीं गंगा में भी डलमऊ कस्बे के लोगों के घरों का पानी जा रहा है। इससे पानी खराब हो रहा है। जिले में प्रदूषण बढ़ने का कारण वाहनों की बढ़ती तादाद भी बन रही है।
जिले में हर साल करीब 30 हजार दो पहिया और चार पहिया वाहन खरीदे जा रहे हैं। इसमें दो पहिया वाहनों की तादाद अधिक है। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है।
यही नहीं अधिकतर पुराने चलाए जा रहे वाहनों से सबसे अधिक प्रदूषण हो रहा है। पर उन पर रोक नहीं लगाई जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. एके सिंह का कहना है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन किया जा रहा है। फैक्ट्रियों में जल प्रदूषण रोकने के लिए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लगवाए गए हैं।
नदियों में प्रदूषण की निगरानी के लिए डीएम के नेतृत्व में कमेटी गठित कर सभी सदस्यों और पदाधिकारियों को नदियों में प्रदूषण का जायजा लेकर रिपोर्ट देने को कहा है। बैठक में ये रिपोर्ट रखी जाएगी। इसके बाद कार्रवाई होगी।