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50 हजार टन डंप कूड़ा, बेहाल 30 हजार की आबादी

Sun, 09 Oct 2022 11:37 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 09 Oct 2022 11:37 PM IST
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Garbage
कूड़ा निस्तारण प्लांट के सामने लगा कूड़ा व बंद पड़ी मशीन। - फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। शहर क्षेत्र में ट्रोमल मशीनों के जरिए कूड़ा निस्तारण कराने का कार्य ठप हो गया है। इस वजह से कूड़ा निस्तारण प्लांट के आसपास रहने वाली करीब 30 हजार आबादी की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। इस समय हो रही बारिश में कूड़ा सड़ रहा है और दुर्गंध फैल रही है।
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इस वजह से लोगों का सांस लेना तक दुश्वार है। संक्रामक रोग फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है। जब कूड़ा सूखा होता है तब भी कम मुसीबत नहीं होती है। अक्सर इसमें आग लग जाती है जिससे यह सुलगने लगता है। इसके बाद उठने वाले धुएं से लोगों का दम घुटने लगता है।
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शहर में दो डंपिंग ग्राउंड है। एक पटेल नगर जबकि दूसरा जैतूपुर में है। दोनों ही स्थानों पर कूड़े के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हैं जिससे आए दिन आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं। इससे वायु प्रदूषण होता है। साथ ही कूड़े का निस्तारण न होने की वजह से बारिश का पानी भी प्रदूषित हो जाता है।
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शासन ने कूूड़ा निस्तारण कराने की जिम्मेदारी जलनिगम की निर्माण इकाई सीएनडीएस को दी थी। सीएनडीएस ने इस कार्य को कार्यदायी संस्था रिकॉर्ट इन्वोवेशन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा था। कूड़ा निस्तारण का काम ट्रोमल मशीन के जरिए मई, 2022 में शुरू कराया गया था। जिस समय कूूड़े का निस्तारण शुरू कराया गया था उस समय दोनों स्थानों पर करीब 80 हजार मीट्रिक टन कूड़ा डंप था।
मौजूदा समय में 50 हजार मीट्रिक टन कूड़ा डंप है। महज 30 हजार मीट्रिक टन कूूड़े का ही निस्तारण हो पाया है। अब दो माह से ट्रोमल मशीनों से कूड़ा निस्तारण का कार्य भी ठप हो गया है। इससे स्थिति फिर गंभीर हो गई है।
इससे आसपास के पीएसी, गजोधर का पुरवा, जगदीशपुर, किशन का पुरवा, तिलक नगर, जैतूपुर मोहल्ले की 30 हजार की आबादी परेशान है। दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल हैै। बीच-बीच में कूड़े में आग लगने से पैदा होने वाले धुएं की वजह से लोग और परेशान हो जाते हैं। इसके बावजूद नागरिकों की समस्या देखने वाला कोई नहीं है। अफसर दावा कर रहे हैं कि बारिश के चलते कूूड़ा निस्तारण बंद है।
हर दिन निकलता है 60 टन कूड़ा
शहर क्षेत्र के 34 मोहल्लों में प्रतिदिन 60 टन कूूड़ा निकलता है। इस कूड़े को डंपिंग स्थानों पर पहुंचाया जाता है, लेकिन वहां पर पहले से ही कूड़े के ढेर लगने से शहर का पूरा कूूड़ा उठ नहीं पा रहा है। इससे शहर की साफ-सफाई व्यवस्था भी प्रभावित है। शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए अलग से शुरू की गई डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना भी कागजों तक सीमित रह गई है।
ऑटोमैटिक है मशीन
ट्रोमल मशीन ऑटोमैटिक है जिसके माध्यम से कूड़े को छांटा जाता है। इसमें शीशा, प्लास्टिक, गलनशील कूड़ा आदि अलग-अलग हो जाता है। इसके बाद जैविक खाद तैयार होगी जो कंपनियों को बेच दी जाती है। बचा कूड़ा जमीन में दबाकर निस्तारित कर दिया जाता है।

याचिका समिति में उठाया था मामला
पूर्व मंत्री एवं ऊंचाहार विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने याचिका समिति में कूड़ा निस्तारण प्लांट बंद होने और उसके आसपास के रहने वाले नागरिकों की समस्या उठाई थी। इस पर 2 सितंबर, 2021 को उस समय के मंडलायुक्त रंजन कुमार व नगर विकास विभाग के सचिव अनुराग यादव ने यहां प्लांट का जायजा लिया था और अफसरों को फटकार लगाई थी। इसके बावजूद समस्या आज भी जस की तस है।
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