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2014 से 2016 के बीच हुआ असली खेल, जांच के दायरे में लेखपाल
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रायबरेली। रायबरेली-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग पर उफरामऊ गांव स्थित सरकारी जमीन पर किए गए फर्जीवाड़ा के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे हो रहे हैं।
जांच में पाया गया है कि जमीन से जुड़े जो भी फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए हैं, वह 2014 से लेकर वर्ष 2016 के बीच में हुए हैं। ऐसे में विवेचक अब पता लगाने में जुटे गए हैं कि उस समय कौन लेखपाल तैनात था।
हालांकि कहा जा रहा है कि सदर तहसील में तैनात एक निलंबित लेखपाल की उस समय तैनाती थी। इस लेखपाल का रतापुर क्षेत्र के एक प्रापर्टी डीलर से भी संपर्क है। यही नहीं कलेक्ट्रेट के भी दो लोगों की भी जमीन फर्जीवाड़ा में भूमिका की बात सामने आ रही है। पुलिस जल्द मामले में और गिरप्तारी करने की तैयारी में जुटी है।
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रायबरेली-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उफरामऊ गांव स्थित करीब चार बीघा बंजर जमीन में फर्जी वाड़ा किया गया था। मामले में तत्कालीन अभिलेखपाल राजस्व व संप्रति प्रशासनिक अधिकारी मंजूलता दीक्षित, कलेक्ट्रेट के एआरके देही अभिलेखागार राजस्व महादेव, तहसील कर्मी अभिलेखागार जमुना प्रसाद के अलावा उफरामऊ निवासी विद्याकांत, रमाकांत, श्रीकांत, गीता, विष्णुकांत, शिवाकांत, सोनल, पूवी अवस्थी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
मामले में नामजद आरोपी रमाकांत को बीते दिन पुलिस ने जेल भेज दिया है, लेकिन अन्य आरोपी अभी खुली हवा में सांस ले रहे हैं। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर सवाल उठ रहे हैं।
विवेचक अरुण कुमार अवस्थी का कहना है कि घटना की हर बिंदु पर पड़ताल कराई जा रही है। 2014 से वर्ष 2016 के बीच में ही जमीन से जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी की गई थी। जल्द उस समय तैनात लेखपाल से प्रकरण में पूछताछ की जाएगी।
कलेक्ट्रेट के दो अन्य लोगों का भी जमीन फर्जीवाड़ा में हाथ शामिल होने की बात सामने आई है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास चल रहा है। जल्द मामले में सभी को जेल भेजा जाएगा। जमीन फर्जीवाड़ा के मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
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जांच में पाया गया है कि जमीन से जुड़े जो भी फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए हैं, वह 2014 से लेकर वर्ष 2016 के बीच में हुए हैं। ऐसे में विवेचक अब पता लगाने में जुटे गए हैं कि उस समय कौन लेखपाल तैनात था।
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हालांकि कहा जा रहा है कि सदर तहसील में तैनात एक निलंबित लेखपाल की उस समय तैनाती थी। इस लेखपाल का रतापुर क्षेत्र के एक प्रापर्टी डीलर से भी संपर्क है। यही नहीं कलेक्ट्रेट के भी दो लोगों की भी जमीन फर्जीवाड़ा में भूमिका की बात सामने आ रही है। पुलिस जल्द मामले में और गिरप्तारी करने की तैयारी में जुटी है।
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रायबरेली-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उफरामऊ गांव स्थित करीब चार बीघा बंजर जमीन में फर्जी वाड़ा किया गया था। मामले में तत्कालीन अभिलेखपाल राजस्व व संप्रति प्रशासनिक अधिकारी मंजूलता दीक्षित, कलेक्ट्रेट के एआरके देही अभिलेखागार राजस्व महादेव, तहसील कर्मी अभिलेखागार जमुना प्रसाद के अलावा उफरामऊ निवासी विद्याकांत, रमाकांत, श्रीकांत, गीता, विष्णुकांत, शिवाकांत, सोनल, पूवी अवस्थी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
मामले में नामजद आरोपी रमाकांत को बीते दिन पुलिस ने जेल भेज दिया है, लेकिन अन्य आरोपी अभी खुली हवा में सांस ले रहे हैं। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर सवाल उठ रहे हैं।
विवेचक अरुण कुमार अवस्थी का कहना है कि घटना की हर बिंदु पर पड़ताल कराई जा रही है। 2014 से वर्ष 2016 के बीच में ही जमीन से जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी की गई थी। जल्द उस समय तैनात लेखपाल से प्रकरण में पूछताछ की जाएगी।
कलेक्ट्रेट के दो अन्य लोगों का भी जमीन फर्जीवाड़ा में हाथ शामिल होने की बात सामने आई है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास चल रहा है। जल्द मामले में सभी को जेल भेजा जाएगा। जमीन फर्जीवाड़ा के मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा।