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Raebareli News: करोड़ों खर्च फिर भी मामूली बारिश में ठप हो जाती बिजली
Wed, 13 Aug 2025 01:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Wed, 13 Aug 2025 01:05 AM IST
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विद्युत उपकेंद्र खीराें में लगे पैनल।
रायबरेली। जरा सी बारिश में ही जिले की बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है। इतना ही नहीं गर्मी में उपभोक्ता लोवोल्टेज की समस्या से जूझते रहते हैं। यह हाल तब है, जब बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर करने के करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इस साल भी अनुरक्षण के नाम पर 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन हालात जैसे पहले थे आज भी हैं।
बारिश के दौरान तेज हवा क्या चल जाती है बिजली गुल हो जाती है। गर्मी के चलते इस बार बिजली की मांग 400 मेगावाट तक पहुंची थी। बारिश हुई, तो मांग घट गई, लेकिन लाइनों में फॉल्ट के चलते बिजली ने बहुत रुलाया। पिछले दिनों बारिश और तेज हवा चलने और से पेड़ गिरने से 230 पोल टूटे। इससे लोगों को भीषण बिजली संकट झेलना पड़ा।
नलकूप चलने से बढ़ जाता लोड
सबसे ज्यादा लोड उस समय बढ़ जाता है, जब धान की रोपाई और सिंचाई के लिए पानी का कोई जरिया नहीं होता है। ऐसे में 22 हजार नलकूपों के चलने से उपकेंद्र ओवरलोड हो जाते हैं। लाइनों में अक्सर फॉल्ट बना रहता है। जर्जर तार टूटते हैं कभी इंसुलेटर दग जाते हैं। आरडीएसएस योजना के पहले चरण में 28 नलकूप फीडरों को बनाया जाना है। इनका काम अब तक पूरा हो जाना था, लेकिन फीडर अब तक बनकर तैयार नहीं हो पाए हैं। लाइनों में फॉल्ट की वजह से अक्सर बिजली गुल रहती है।
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अनुरक्षण के नाम पर होती खानापूर्ति
भले ही सरकार की ओर से अनुरक्षण के लिए करोड़ाें रुपये दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता है। उपभोक्ता शरद मेहरोत्रा, पंकज तिवारी, आशुतोष ओझा ने बताया कि जर्जर संसाधनों जब तक नहीं बदले जाएंगे, तब तक बिजली के हालात ऐसे ही रहेंगे। गर्मी हो या बारिश, हर समय बिजली गुल रहती है। सबसे खराब हालात ग्रामीण क्षेत्र के हैं। पेड़ की डालियों के बीच निकली बिजली की लाइनों में अक्सर फॉल्ट आते हैं। इससे बिजली गुल रहती है।
पहले की अपेक्षा काफी सुधार
बिजली आपूर्ति व्यवस्था पहले की अपेक्षा अब काफी बेहतर हुई है। हर उपकेंद्र में अनुरक्षण कार्य कराया गया है। जर्जर संसाधन बदले जा रहे हैं। आरडीएसएस योजना के तहत और कई काम कराए जा रहे हैं। दो साल मेंबिजली व्यवस्था को और बेहतर कर लिया जाएगा।
-रामकुमार, मुख्य अभियंता पावर कॉर्पाेरेशन
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बारिश के दौरान तेज हवा क्या चल जाती है बिजली गुल हो जाती है। गर्मी के चलते इस बार बिजली की मांग 400 मेगावाट तक पहुंची थी। बारिश हुई, तो मांग घट गई, लेकिन लाइनों में फॉल्ट के चलते बिजली ने बहुत रुलाया। पिछले दिनों बारिश और तेज हवा चलने और से पेड़ गिरने से 230 पोल टूटे। इससे लोगों को भीषण बिजली संकट झेलना पड़ा।
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नलकूप चलने से बढ़ जाता लोड
सबसे ज्यादा लोड उस समय बढ़ जाता है, जब धान की रोपाई और सिंचाई के लिए पानी का कोई जरिया नहीं होता है। ऐसे में 22 हजार नलकूपों के चलने से उपकेंद्र ओवरलोड हो जाते हैं। लाइनों में अक्सर फॉल्ट बना रहता है। जर्जर तार टूटते हैं कभी इंसुलेटर दग जाते हैं। आरडीएसएस योजना के पहले चरण में 28 नलकूप फीडरों को बनाया जाना है। इनका काम अब तक पूरा हो जाना था, लेकिन फीडर अब तक बनकर तैयार नहीं हो पाए हैं। लाइनों में फॉल्ट की वजह से अक्सर बिजली गुल रहती है।
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अनुरक्षण के नाम पर होती खानापूर्ति
भले ही सरकार की ओर से अनुरक्षण के लिए करोड़ाें रुपये दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता है। उपभोक्ता शरद मेहरोत्रा, पंकज तिवारी, आशुतोष ओझा ने बताया कि जर्जर संसाधनों जब तक नहीं बदले जाएंगे, तब तक बिजली के हालात ऐसे ही रहेंगे। गर्मी हो या बारिश, हर समय बिजली गुल रहती है। सबसे खराब हालात ग्रामीण क्षेत्र के हैं। पेड़ की डालियों के बीच निकली बिजली की लाइनों में अक्सर फॉल्ट आते हैं। इससे बिजली गुल रहती है।
पहले की अपेक्षा काफी सुधार
बिजली आपूर्ति व्यवस्था पहले की अपेक्षा अब काफी बेहतर हुई है। हर उपकेंद्र में अनुरक्षण कार्य कराया गया है। जर्जर संसाधन बदले जा रहे हैं। आरडीएसएस योजना के तहत और कई काम कराए जा रहे हैं। दो साल मेंबिजली व्यवस्था को और बेहतर कर लिया जाएगा।
-रामकुमार, मुख्य अभियंता पावर कॉर्पाेरेशन