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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   Council are not enrolled in school children, reduced to 12 thousand Sapling

परिषदीय स्कूलों में दाखिला नहीं ले रहे बच्चे, घटे 12 हजार नौनिहाल

Tue, 05 Jan 2016 11:34 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 05 Jan 2016 11:34 PM IST
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लेकिन बच्चों की संख्या बढ़ने का नाम नहीं ले रही है। परिषदीय स्कूलों में एक साल में 12 हजार बच्चे गत वर्ष की तुलना में कम हो गए। घट रही बच्चों की संख्या से अधिकारी व कर्मचारी भी बेचैन है।
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अधिकारी संख्या घटने का कारण पता लगाने में जुटे हैं। जिले में सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक बच्चों का दाखिला परिषदीय स्कूलों में कराने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
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हर कक्षाओं में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। जबकि जिले में पिछले साल 30 हजार से अधिक प्रसव हुए है। सवाल यह है कि जिले में प्रसव अधिक हो रहे हैं तो सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या क्यों कम हो रही है।
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जबकि एमडीएम में एक अरब से अधिक धनराशि हर साल खर्च की जाती है। 80 करोड़ रुपये से अधिक की निशुल्क किताबों का वितरण भी बच्चों में किया जाता है।

11 करोड़ रुपये खर्च करके बच्चों को ड्रेस दी जाती है। इसके बाद भी शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है। वर्ष 2014-15 में परिषदीय स्कूलों बच्चों की संख्या 2 लाख 79 हजार 888 थी।

जो वर्ष 2015-16 में घटकर 2 लाख 67 हजार 685 रह गई। यानी पिछले शिक्षा सत्र की तुलना में इस शिक्षा सत्र में 12 हजार 203 बच्चों ने दाखिला नहीं लिया।

आंकडे़ सामने आने के बाद अधिकारियों की बेचैनी बढ़ गई है। संख्या कम होने के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं परिषदीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिरता ही जा रहा है। ऐसे मामले अधिकारियों के निरीक्षण में सामने भी आ रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए निजी स्कूलों का सहारा लेते हैं।


भले ही अधिक रुपये लग जाते हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई अच्छी हो जाती है। सरकारी स्कूलों में शिक्षक एमडीएम, ड्रेस वितरण व अन्य कार्यों तक ही सिमट कर रह गए हैं। उन्हें पढ़ाने का समय ही नहीं मिल पाता है।

बीएसए रामसागर पति त्रिपाठी ने बताया कि पिछले कई शिक्षासत्र में स्कूलों में बच्चों की संख्या कम हुई है। हालांकि इसका कारण पता लगाया जा रहा है।

स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर करने का काम किया जा रहा है। कमियों को दूर कराकर शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाया जाएगा।
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