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कोरोना ने सिखा दिया लोगों को हाथ धोना
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रायबरेली। हाथों में न जाने कितनी अनदेखी गंदगी छिपी होती हैं, जो किसी भी वस्तु को छूने, उसका उपयोग करने और कई तरह के रोजमर्रा के कामों के कारण होती हैं। यह गंदगी, बगैर हाथ धोए कुछ भी खाने-पीने से शरीर में पहुंच जाती हैं और कई तरह की बीमारियों को जन्म देती हैं। कोरोना के कहर ने लोगों को हाथ धुलना सिखा दिया है। हाथ धोने के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए 15 अक्तूबर को हैंड वॉशिंग दिवस मनाया जाएगा।
सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि इस साल के ग्लोबल हैंड वॉशिंग-डे की थीम भी ‘सभी के लिए स्वच्छ हाथ’ रखी गई है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ठीक तरह से हाथ धोने हैं। इससे संक्रमण के खतरे को काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ साबुन से अच्छी तरह हाथ धो लेने से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है। सबसे ज्यादा बच्चों में संक्रमण व गंभीर बीमारियों जैसे डायरिया, वायरल संक्रमण आदि का खतरा बना रहता है।
जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डीएस अस्थाना का कहना है कि कोरोना के कारण काफी हद तक हाथ की स्वच्छता बनाए रखना हमारे व्यवहार में आया है। लोगों ने इसे जिम्मेदारी समझकर अपनाया है तो कुछ लोग इसे संक्रमण के डर से अपना रहे है। द स्टेट ऑफ हैंड वॉशिंग की 2016 की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि भारत के ग्रामीण क्षेत्र में 54 प्रतिशत आबादी शौचालय के बाद हाथ धोती है। सिर्फ 13 प्रतिशत आबादी खाना बनाने से पहले और 27 प्रतिशत बच्चे ही खाना खाने से पहले हाथ धोते हैं।
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शहरी क्षेत्र में 94 प्रतिशत लोग शौचालय के बाद हाथ धोते है। 74 प्रतिशत खाना बनाने से पहले और 79 प्रतिशत बच्चे खाना खाने से पहले हाथ धुलते हैं। नित्यक्रिया के बाद, खाना बनाने व खाने से पहले, मुंह, नाक व आंखों को छूने के बाद, खांसने व छींकने के बाद, घर की साफ-सफाई करने के बाद, किसी बीमार व्यक्ति से मिलकर आने के बाद व पालतू जानवरों से खेलने के बाद हाथ जरूर धोना चाहिए।
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सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि इस साल के ग्लोबल हैंड वॉशिंग-डे की थीम भी ‘सभी के लिए स्वच्छ हाथ’ रखी गई है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ठीक तरह से हाथ धोने हैं। इससे संक्रमण के खतरे को काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ साबुन से अच्छी तरह हाथ धो लेने से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है। सबसे ज्यादा बच्चों में संक्रमण व गंभीर बीमारियों जैसे डायरिया, वायरल संक्रमण आदि का खतरा बना रहता है।
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जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डीएस अस्थाना का कहना है कि कोरोना के कारण काफी हद तक हाथ की स्वच्छता बनाए रखना हमारे व्यवहार में आया है। लोगों ने इसे जिम्मेदारी समझकर अपनाया है तो कुछ लोग इसे संक्रमण के डर से अपना रहे है। द स्टेट ऑफ हैंड वॉशिंग की 2016 की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि भारत के ग्रामीण क्षेत्र में 54 प्रतिशत आबादी शौचालय के बाद हाथ धोती है। सिर्फ 13 प्रतिशत आबादी खाना बनाने से पहले और 27 प्रतिशत बच्चे ही खाना खाने से पहले हाथ धोते हैं।
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शहरी क्षेत्र में 94 प्रतिशत लोग शौचालय के बाद हाथ धोते है। 74 प्रतिशत खाना बनाने से पहले और 79 प्रतिशत बच्चे खाना खाने से पहले हाथ धुलते हैं। नित्यक्रिया के बाद, खाना बनाने व खाने से पहले, मुंह, नाक व आंखों को छूने के बाद, खांसने व छींकने के बाद, घर की साफ-सफाई करने के बाद, किसी बीमार व्यक्ति से मिलकर आने के बाद व पालतू जानवरों से खेलने के बाद हाथ जरूर धोना चाहिए।