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एक माह में 20 लोगों की टूट गईं सांसें
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शिवगढ़ (रायबरेली)। गांव की सड़कें और गलियां सूनी हैं। हर तरफ सन्नाटा दिख रहा है। लोगों में दहशत और भय इस कदर है कि वह दिन में भी घर से निकलने से कतरा रहे हैं। जिन पर इलाज करने की जिम्मेदारी है, वह अब तक गांवों तक नहीं पहुंचे हैं।
इतना जरूर है कि अफसर कागजी घोड़ा जरूर दौड़ा रहे हैं। पिपरी और कुुंभी गांव में दो माह के भीतर 17 लोग जान गंवा चुके हैं। किसी की सर्दी-जुखाम-बुखार से तो किसी को सांस लेने में तकलीफ के कारण जान गंवानी पड़ी।
अधिकतर लोग बीमार हैं, जो इलाज के लिए झोलाछाप के यहां चक्कर काट रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आज तक इन गांवों में जाकर लोगों की जांच नहीं की।
शिवगढ़ ब्लॉक की 43 ग्राम पंचायतों में रहने वाली डेढ़ लाख आबादी की सेहत रामभरोसे है। यहां के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैैं। यह हाल तब है, जब कोरोना से लोग जान गंवा रहे हैं।
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लोगों में दहशत और भय का माहौल है। लोग घरों से निकलने से कतरा रहे हैं। सीएचसी शिवगढ़ में तैनात स्टाफ इलाज के नाम पर महज खानापूर्ति कर रहा है। ग्राम पंचायत पिपरी में एक माह के अंदर बाबादीन, हुबराजा, महादेव प्रसाद तिवारी, बदलू सुंदरा पलऊ समेत दस लोगों की मौतें हो चुकी हैं।
इसके बाद भी न ही ग्राम पंचायत में सैनिटाइजेशन हुआ और न ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच कराई गई। दूसरी ग्राम पंचायत कुंभी में औसान, गुरु गौतम, ज्ञानवती पांडेय, शिव प्रसाद तिवारी, वासुदेव सिंह, मौनी सिंह, राजेवती सिंह, सुंदरलाल त्रिवेदी समेत 10 लोगों की जान गई है।
इस गांव में भी स्वास्थ्य टीम लोगों की जांच करने नहीं पहुंची है। दो ग्राम पंचायतें तो बानगी भर हैं। कोरोना काल में हर गांव में लोगों की जानें गई हैं। मरने वालों की संख्या बढ़ भी रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की अंधेरगर्दी के कारण लोगों की जिंदगी खतरे में है। इलाज के नाम पर आए धन का बंदरबांट किया जा रहा है। किसी गांव में स्वास्थ्य कैंप तक नहीं लग रहे हैं।
अफसर लापरवाह, नहीं दिखती पीड़ा
पिपरी के राजकुमार शुक्ला, कुंभी के निर्मल त्रिवेदी और रामसुख मौर्य, सुखराम रावत कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग के अफसर लापरवाह हैं। उन्हें जनता की पीड़ा नहीं दिखती।
क्षेत्र में लोग जान गंवा रहे हैं। स्वास्थ्य टीम गांव जाकर लोगों की जांच तक नहीं कर रही है। इससे लोगों को मजबूरन झोलाछाप से इलाज कराना पड़ रहा है। सरकार के निर्देश के बाद भी शिवगढ़ सीएचसी में तैनात अधिकारी और कर्मचारी क्षेत्रीय जनता के इलाज में लापरवाही बरत रहे हैं।
शिवगढ़ क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में पांच लोगों की मौतें हुईं हैं। गांवों में स्वास्थ्य टीम भेजकर लोगों की जांच कराई जा रही है। दवाओं का वितरण भी किया जा रहा है। किसी तरह की कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। शिवगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एल-1 प्लस 20 बेड का अस्पताल बन रहा है। संभावित तीसरी लहर को देखते हुए तैयारी की जा रही है।
डॉ. राजेश गौतम, सीएचसी अधीक्षक
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इतना जरूर है कि अफसर कागजी घोड़ा जरूर दौड़ा रहे हैं। पिपरी और कुुंभी गांव में दो माह के भीतर 17 लोग जान गंवा चुके हैं। किसी की सर्दी-जुखाम-बुखार से तो किसी को सांस लेने में तकलीफ के कारण जान गंवानी पड़ी।
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अधिकतर लोग बीमार हैं, जो इलाज के लिए झोलाछाप के यहां चक्कर काट रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आज तक इन गांवों में जाकर लोगों की जांच नहीं की।
शिवगढ़ ब्लॉक की 43 ग्राम पंचायतों में रहने वाली डेढ़ लाख आबादी की सेहत रामभरोसे है। यहां के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैैं। यह हाल तब है, जब कोरोना से लोग जान गंवा रहे हैं।
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लोगों में दहशत और भय का माहौल है। लोग घरों से निकलने से कतरा रहे हैं। सीएचसी शिवगढ़ में तैनात स्टाफ इलाज के नाम पर महज खानापूर्ति कर रहा है। ग्राम पंचायत पिपरी में एक माह के अंदर बाबादीन, हुबराजा, महादेव प्रसाद तिवारी, बदलू सुंदरा पलऊ समेत दस लोगों की मौतें हो चुकी हैं।
इसके बाद भी न ही ग्राम पंचायत में सैनिटाइजेशन हुआ और न ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच कराई गई। दूसरी ग्राम पंचायत कुंभी में औसान, गुरु गौतम, ज्ञानवती पांडेय, शिव प्रसाद तिवारी, वासुदेव सिंह, मौनी सिंह, राजेवती सिंह, सुंदरलाल त्रिवेदी समेत 10 लोगों की जान गई है।
इस गांव में भी स्वास्थ्य टीम लोगों की जांच करने नहीं पहुंची है। दो ग्राम पंचायतें तो बानगी भर हैं। कोरोना काल में हर गांव में लोगों की जानें गई हैं। मरने वालों की संख्या बढ़ भी रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की अंधेरगर्दी के कारण लोगों की जिंदगी खतरे में है। इलाज के नाम पर आए धन का बंदरबांट किया जा रहा है। किसी गांव में स्वास्थ्य कैंप तक नहीं लग रहे हैं।
अफसर लापरवाह, नहीं दिखती पीड़ा
पिपरी के राजकुमार शुक्ला, कुंभी के निर्मल त्रिवेदी और रामसुख मौर्य, सुखराम रावत कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग के अफसर लापरवाह हैं। उन्हें जनता की पीड़ा नहीं दिखती।
क्षेत्र में लोग जान गंवा रहे हैं। स्वास्थ्य टीम गांव जाकर लोगों की जांच तक नहीं कर रही है। इससे लोगों को मजबूरन झोलाछाप से इलाज कराना पड़ रहा है। सरकार के निर्देश के बाद भी शिवगढ़ सीएचसी में तैनात अधिकारी और कर्मचारी क्षेत्रीय जनता के इलाज में लापरवाही बरत रहे हैं।
शिवगढ़ क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में पांच लोगों की मौतें हुईं हैं। गांवों में स्वास्थ्य टीम भेजकर लोगों की जांच कराई जा रही है। दवाओं का वितरण भी किया जा रहा है। किसी तरह की कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। शिवगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एल-1 प्लस 20 बेड का अस्पताल बन रहा है। संभावित तीसरी लहर को देखते हुए तैयारी की जा रही है।
डॉ. राजेश गौतम, सीएचसी अधीक्षक