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अवैध निर्माण पर नोटिस तक सिमटी कार्रवाई
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2015 11:39 PM IST
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आलम यह है कि दो माह में सात निर्माण कार्य को सील करने का नोटिस जारी कर दिया गया, लेकिन कार्रवाई एक पर भी नहीं हुई। आरडीए उपाध्यक्ष और अधीक्षण अभियंता की चुप्पी से बिल्डरों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
शहर में नक्शा स्वीकृत कराए बिना चल रहे निर्माण कार्यों को रोकने की जिम्मेदारी तो आरडीए (रायबरेली विकास प्राधिकरण) की है। इसके बावजूद अवैध निमार्ण धड़ल्ले से चल रहे हैं।
निर्माणकर्ताओं को नोटिस तो जारी कर दिए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई के दौरान महज मामूली अर्थदंड लगा दिया जाता है। इसके चलते जहां विभागीय कोष में कुछ ही रुपये आते हैं, लेकिन अफसरों की जेबें जरूर गर्म हो जाती है।
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यहीं नहीं अभी तक आरडीए उपाध्यक्ष और न ही अधीक्षण अभियंता ने बिल्डरों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाना उचित समझा है। संबंधित जोन के जेई और बाबू की सांठगांठ के चलते प्राधिकरण को चपत लग रही है। महायोजना के दरकिनार कर अफसर महज अपनी ही जेब भरने में लगे हैं।
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शहर में नक्शा स्वीकृत कराए बिना चल रहे निर्माण कार्यों को रोकने की जिम्मेदारी तो आरडीए (रायबरेली विकास प्राधिकरण) की है। इसके बावजूद अवैध निमार्ण धड़ल्ले से चल रहे हैं।
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निर्माणकर्ताओं को नोटिस तो जारी कर दिए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई के दौरान महज मामूली अर्थदंड लगा दिया जाता है। इसके चलते जहां विभागीय कोष में कुछ ही रुपये आते हैं, लेकिन अफसरों की जेबें जरूर गर्म हो जाती है।
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यहीं नहीं अभी तक आरडीए उपाध्यक्ष और न ही अधीक्षण अभियंता ने बिल्डरों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाना उचित समझा है। संबंधित जोन के जेई और बाबू की सांठगांठ के चलते प्राधिकरण को चपत लग रही है। महायोजना के दरकिनार कर अफसर महज अपनी ही जेब भरने में लगे हैं।