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Raebareli News: बुद्धीलाल पासी दोबारा बने भाजपा जिलाध्यक्ष
Mon, 17 Mar 2025 12:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 17 Mar 2025 12:52 AM IST
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भाजपा कार्यालय अटल भवन मेंअध्यक्ष बुद्धीलाल पासी का स्वागत करते भाजपाई।
- फोटो : स्रोत भाजपा कार्यालय
रायबरेली। भाजपा हाईकमान ने प्रदेश के सियासी गढ़ रायबरेली में जिलाध्यक्ष की कमान एक बार फिर से बुद्धीलाल पासी को सौंप दी है। पार्टी ने लगातार दूसरी बार दलित चेहरे पर दांव लगाया है। हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके बाद भी मिशन 2027 के लिए बुद्धीलाल पासी के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी की गई है। पार्टी को उम्मीद है कि बुद्धीलाल पासी के दूसरी बार जिलाध्यक्ष बनने से पासी और दलित वोट बैंक पर पकड़ मजबूत होगी।
पिछले दो माह से भाजपा जिलाध्यक्ष पद को लेकर सरगर्मी तेज थी। कयास लग रहे थे कि पार्टी बदलाव कर सकती है और किसी पिछड़े चेहरे पर दांव लगा सकती हैं, लेकिन रणनीतिकारों ने सारे कयासों से इतर बुद्धीलाल पासी को ही जिलाध्यक्ष के लिए उपयुक्त माना। पार्टी के थिंकटैंक का मानना है कि रायबरेली की सियासत में पासी और दलित वोटबैंक का बहुत अहम रोल है।
जिधर यह वोटबैंक घूमेगा, जीत पक्की है। यही कारण रहा कि पूर्व में लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए बुद्धीलाल पासी को ही जिलाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन पार्टी जीत हासिल नहीं कर सकी थी। इसकी रिपोर्ट दिल्ली तक पहुंचाई गई थी। इसके बाद लगने लगा था कि पार्टी जिलाध्यक्ष पर किसी नए चेहरे को उतारा जा सकता है।
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जब जिलाध्यक्ष पद के चुनाव की घोषणा हुई तो अगड़ी, पिछड़ी जाति से कई कार्यकर्ताओं और मंझे हुए रणनीतिकारों ने अपना नाम पत्र भरा। इसके साथ ही सियासत के बड़े चेहरों ने हाथ भी रखा। ताकत भी लगाई गई, लेकिन हाईकमान ने जिलाध्यक्ष के पद के लिए बुद्धीलाल पासी के नाम पर मुहर लगा दी।
एक बार फिर से जिलाध्यक्ष बनने के बाद बुद्धीलाल पासी का कहना है कि लोकसभा चुनाव में कुछ कमियां थीं, जिस कारण हार का सामना करना पड़ा। 2027 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली में भाजपा का परचम लहराएगा। इस बार उन कमियों को पहले दुरुस्त किया जाएगा, जिनके कारण लोकसभा में हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी के भीतर खेमेबाजी के सवाल पर कहा कि कोई खेमेबाजी नहीं है। उनको हर किसी का समर्थन हासिल है।
बुद्धीलाल की वापसी के लिए एक माननीय ने लगाया पूरा जोर
जिलाध्यक्ष पद पर बुद्धीलाल पासी की वापसी हो, इसे लेकर एक माननीय ने पूरा जोर लगा दिया था। वहीं, दूसरा खेमा नहीं चाहता था कि माननीय का दांव कामयाब हो जाए। यहां पर हाईकमान ने रायबरेली की सियासी गणित के साथ माननीय के फीडबैक को प्रमुखता से लिया और नतीजा सामने है कि दूसरे खेमे की तमाम कोशिशों के बाद भी बुद्धीलाल पासी दोबारा जिलाध्यक्ष बनने में कामयाब रहे।
भाजपा में पिछले कई सालों में पहली बार हुआ कि किसी जिलाध्यक्ष को दोबारा पद की जिम्मेदारी दे दी गई, जबकि लोकसभा चुनाव में पार्टी हार गई थी। इससे साफ है कि थिंकटैंक जातीय समीकरणों को अधिक तवज्जो दे रहा है। आला कमान को मालूम है कि विधानसभा चुनाव का रण बिल्कुल अलग होगा और जिलाध्यक्ष का चेहरा भी अहम रोल निभाएगा।
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पिछले दो माह से भाजपा जिलाध्यक्ष पद को लेकर सरगर्मी तेज थी। कयास लग रहे थे कि पार्टी बदलाव कर सकती है और किसी पिछड़े चेहरे पर दांव लगा सकती हैं, लेकिन रणनीतिकारों ने सारे कयासों से इतर बुद्धीलाल पासी को ही जिलाध्यक्ष के लिए उपयुक्त माना। पार्टी के थिंकटैंक का मानना है कि रायबरेली की सियासत में पासी और दलित वोटबैंक का बहुत अहम रोल है।
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जिधर यह वोटबैंक घूमेगा, जीत पक्की है। यही कारण रहा कि पूर्व में लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए बुद्धीलाल पासी को ही जिलाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन पार्टी जीत हासिल नहीं कर सकी थी। इसकी रिपोर्ट दिल्ली तक पहुंचाई गई थी। इसके बाद लगने लगा था कि पार्टी जिलाध्यक्ष पर किसी नए चेहरे को उतारा जा सकता है।
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जब जिलाध्यक्ष पद के चुनाव की घोषणा हुई तो अगड़ी, पिछड़ी जाति से कई कार्यकर्ताओं और मंझे हुए रणनीतिकारों ने अपना नाम पत्र भरा। इसके साथ ही सियासत के बड़े चेहरों ने हाथ भी रखा। ताकत भी लगाई गई, लेकिन हाईकमान ने जिलाध्यक्ष के पद के लिए बुद्धीलाल पासी के नाम पर मुहर लगा दी।
एक बार फिर से जिलाध्यक्ष बनने के बाद बुद्धीलाल पासी का कहना है कि लोकसभा चुनाव में कुछ कमियां थीं, जिस कारण हार का सामना करना पड़ा। 2027 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली में भाजपा का परचम लहराएगा। इस बार उन कमियों को पहले दुरुस्त किया जाएगा, जिनके कारण लोकसभा में हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी के भीतर खेमेबाजी के सवाल पर कहा कि कोई खेमेबाजी नहीं है। उनको हर किसी का समर्थन हासिल है।
बुद्धीलाल की वापसी के लिए एक माननीय ने लगाया पूरा जोर
जिलाध्यक्ष पद पर बुद्धीलाल पासी की वापसी हो, इसे लेकर एक माननीय ने पूरा जोर लगा दिया था। वहीं, दूसरा खेमा नहीं चाहता था कि माननीय का दांव कामयाब हो जाए। यहां पर हाईकमान ने रायबरेली की सियासी गणित के साथ माननीय के फीडबैक को प्रमुखता से लिया और नतीजा सामने है कि दूसरे खेमे की तमाम कोशिशों के बाद भी बुद्धीलाल पासी दोबारा जिलाध्यक्ष बनने में कामयाब रहे।
भाजपा में पिछले कई सालों में पहली बार हुआ कि किसी जिलाध्यक्ष को दोबारा पद की जिम्मेदारी दे दी गई, जबकि लोकसभा चुनाव में पार्टी हार गई थी। इससे साफ है कि थिंकटैंक जातीय समीकरणों को अधिक तवज्जो दे रहा है। आला कमान को मालूम है कि विधानसभा चुनाव का रण बिल्कुल अलग होगा और जिलाध्यक्ष का चेहरा भी अहम रोल निभाएगा।