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Raebareli News: विवेचक को दस्तावेज देने में बैंक अफसरों को छूट रहा पसीना
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हारी पार्क स्थित बीओबी की मुख्य शाखा।
- फोटो : हारी पार्क स्थित बीओबी की मुख्य शाखा।
रायबरेली। जाली दस्तावेज से बैंक आफ बड़ौदा (बीओबी) की शाखा से नौ करोड़ रुपये लोन लेने के मामले में की जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। विवेचक को मामले से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने में बैंक अफसरों के पसीने छूट रहे हैं। फर्जीवाड़ा खुलने के छह दिन बाद भी विवेचक को दस्तावेज बैंक अफसर नहीं दे पाए हैं। शुरुआती जांच मेंं बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों के अलावा बाहरी लोगों के इस फर्जीवाड़ा में शामिल होने की बात सामने आ रही है। साथ ही बैंक शाखा से क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात अफसरों, कर्मचारियों की भूमिका की जांच और तेज हो गई। मामले में जल्द बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
बैंक आफ बड़ौदा की मुख्य शाखा रायबरेली में जिस तरह लोन लेने के नाम पर 9.2 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ है। मुख्य प्रबंधक मुकेश की तरफ से मामले में 48 आवेदकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। विवेचक जितेंद्र कुमार सिंह ने मुख्य प्रबंधक से बीओबी में आवेदकों को व्यक्तिगत लोन देने की नियमावली क्या है, आवेदकों के खातों की संख्या का रिकार्ड, आवेदकों के कौन-कौन लोग गारंटर थे, वह कहां के रहने वाले हैं आदि जानकारी मांगी थी, लेकिन बैंक अफसरों ने इसे अब तक उपलब्ध नहीं कराया है। शुरुआती जांच में जिला पंचायत, परिवार कल्याण, एक ब्लॉक में तैनात कर्मियों के नाम से बैंक से ऋण लिए जाने की भी पुष्टि हुई है। विवेचक का कहना है कि बैंक अफसरों से प्रकरण जुड़े दस्तावेज मिलने के बाद जांच में और तेजी आएगी।
जांच इन पर भी होनी चाहिए
-वेतन के खाते किस बैंक में खोले गए थे।
-बैंक नियमों के अनुसार खोले गए खातों का धन्यवाद पत्र खाताधारक को भेजना चाहिए। क्या इस प्रकार का कोई पत्र डाक से भेजा गया।
-इन खातों में एटीएम व चेकबुक खाताधारकों के पते पर भेजे गए या शाखा में ही किसी को दिए गए।
-इन खातों में वेतन कहां से आता था।
-जिस खाते से वेतन ट्रांसफर किया जाता था, वह किस बैंक में था और उसमें हस्ताक्षर किसके होते थे।
इन खातों को खोलने में क्या बैंक ने केवाईसी बैंक नियमों का पालन किया था या नहीं।
-जिन खातों में वेतन आता था, उनमें नकद लेनदेन किया जाता था या ट्रांसफर से। यदि लेनदेन ट्रांसफर से होता था तो पैसा किस खाते में भेजा जाता था।
-लोन की राशि नकद निकाली गई या ट्रांसफर से। यदि ट्रांसफर से तो पैसा किस खाते में भेजा गया।
कोट-
बैंक में लोन देने के नाम पर हुए फर्जीवाड़े की पड़ताल कई बिंदुओं पर कराई जा रही है। इस कार्य में लिप्त सभी लोगों के खिलाफ जल्द कार्रवाई कराई जाएगी। यह बड़ा रैकेट है, जो जिले की बैंकों में लोन दिलाने का कार्य करता है।
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अरुण कुमार नौहवार, सीओ सदर
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बैंक आफ बड़ौदा की मुख्य शाखा रायबरेली में जिस तरह लोन लेने के नाम पर 9.2 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ है। मुख्य प्रबंधक मुकेश की तरफ से मामले में 48 आवेदकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। विवेचक जितेंद्र कुमार सिंह ने मुख्य प्रबंधक से बीओबी में आवेदकों को व्यक्तिगत लोन देने की नियमावली क्या है, आवेदकों के खातों की संख्या का रिकार्ड, आवेदकों के कौन-कौन लोग गारंटर थे, वह कहां के रहने वाले हैं आदि जानकारी मांगी थी, लेकिन बैंक अफसरों ने इसे अब तक उपलब्ध नहीं कराया है। शुरुआती जांच में जिला पंचायत, परिवार कल्याण, एक ब्लॉक में तैनात कर्मियों के नाम से बैंक से ऋण लिए जाने की भी पुष्टि हुई है। विवेचक का कहना है कि बैंक अफसरों से प्रकरण जुड़े दस्तावेज मिलने के बाद जांच में और तेजी आएगी।
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जांच इन पर भी होनी चाहिए
-वेतन के खाते किस बैंक में खोले गए थे।
-बैंक नियमों के अनुसार खोले गए खातों का धन्यवाद पत्र खाताधारक को भेजना चाहिए। क्या इस प्रकार का कोई पत्र डाक से भेजा गया।
-इन खातों में एटीएम व चेकबुक खाताधारकों के पते पर भेजे गए या शाखा में ही किसी को दिए गए।
-इन खातों में वेतन कहां से आता था।
-जिस खाते से वेतन ट्रांसफर किया जाता था, वह किस बैंक में था और उसमें हस्ताक्षर किसके होते थे।
इन खातों को खोलने में क्या बैंक ने केवाईसी बैंक नियमों का पालन किया था या नहीं।
-जिन खातों में वेतन आता था, उनमें नकद लेनदेन किया जाता था या ट्रांसफर से। यदि लेनदेन ट्रांसफर से होता था तो पैसा किस खाते में भेजा जाता था।
-लोन की राशि नकद निकाली गई या ट्रांसफर से। यदि ट्रांसफर से तो पैसा किस खाते में भेजा गया।
कोट-
बैंक में लोन देने के नाम पर हुए फर्जीवाड़े की पड़ताल कई बिंदुओं पर कराई जा रही है। इस कार्य में लिप्त सभी लोगों के खिलाफ जल्द कार्रवाई कराई जाएगी। यह बड़ा रैकेट है, जो जिले की बैंकों में लोन दिलाने का कार्य करता है।
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अरुण कुमार नौहवार, सीओ सदर