फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   Amrit yojna

शहर में नहीं दिखा बदलाव, पानी में बह गए 67 करोड़ रुपये

Sat, 24 Jul 2021 09:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jul 2021 09:54 PM IST
विज्ञापन
Amrit yojna
रायबरेली। शहर क्षेत्र की ढाई लाख आबादी को सीवर से राहत दिलाने के लिए शुरू की गई अमृत योजना शुरुआती दौर से ही कमीशनबाजी के भेंट चढ़ गई। जिस कार्यदायी संस्था घारपुरे को काम दिया गया, उस कार्यदायी संस्था ने काम न करके तोमर कंस्ट्रक्शन कंपनी को काम दे दिया।
विज्ञापन

जलनिगम से लेकर नगर पालिका के अफसरों तक मनमाने तरीके से हो रहे कार्य की शिकायतें पहुंचती रहीं, लेकिन कार्रवाई का नतीजा सिफर रहा। सीवर लाइन बिछाने में न सिर्फ घटिया किस्म की पाइपें डाली गई हैं, बल्कि सड़कों के निर्माण में घटिया गुणवत्ता का प्रयोग किया गया।
विज्ञापन

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि योजना पर पानी की तरह 67 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन व्यवस्था जस की तस है। नागरिकों को न तो सीवर की समस्या से राहत मिल पाई और न ही सड़कें चमाचम हो सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीते बुधवार को मनिका रोड पर बारिश में न सिर्फ सड़क धंसी, बल्कि उधर से गुजरने वाले लोगों की जिंदगी बच गई। शासन की मंशा थी कि अमृत योजना के तहत शहर में सीवर लाइन बिछाई जाए।
सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़कें खोद दी गई। इसके लिए 90 करोड़ रुपये का बजट दिया गया। करीब 67 करोड़ रुपये योजना पर खर्च कर दिए गए। बावजूद इसके योजना में कदम कदम पर गड़बड़झाला किया गया।
गोरा बाजार में सड़क बनाई गई, लेकिन खस्ताहाल हो गई। गिट्टियां निकल आई हैं। ग्रिबशाह का पुरवा में आधी अधूरी सड़क बनाकर छोड़ दिया। जलनिगम के अधिकारी और घारपुरे कंपनी के अधिकारियों ने कभी भी तोमर कंस्ट्रक्शन कराए गए कार्यों की पड़ताल की।
तत्कालीन नगर पालिका के ईओ बालमुकुंद मिश्रा ने कई दफा निरीक्षण के दौरान सीवर लाइन मेें बिछाई गई पाइपें घटिया किस्म के पाई हैं। काम रोकवाया गया। सड़क निर्माण में खेल मिला।
हालांकि बाद में सब कुछ ओके कर दिया गया। जलनिगम के एक्सईएन सनी सिंह ने बताया कि अमृत योजना के तहत 90 करोड़ रुपये का बजट मिला था, जिसमें से 67 करोड़ रुपये का अब तक भुगतान किया गया है।
लाखों रुपये की बेच ली गई मिट्टी
कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने न सिर्फ सीवर लाइन बिछाने और निर्माण कार्यों में गड़बड़झाला किया, बल्कि खोदाई के दौरान निकाली गई लाखों कीमत की मिट्टी तक बेच दी। जलनिगम के एक्सईएन रहें हो या फिर जेई, सब ने मानक पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि अपनी जेबें भरने में रहे। अधिकारियों की ढिलाई का नतीजा रहा कि शासन की प्रमुखता वाली अमृत योजना शहर में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।

जांच रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई : एमडी
जलनिगम के एमडी अनिल मीणा ने फोन पर अमर उजाला से बताया कि चीफ इंजीनियर संजय कुमार सिंह और अधीक्षण अभियंता जितेश कुमार को रायबरेली भेजकर मामले की जांच कराई गई है। अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि जलनिगम रायबरेली के एक्सईएन, जेई समेत अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed