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एनटीपीसी में हादसा

Tue, 07 Nov 2017 01:19 AM IST
Updated Tue, 07 Nov 2017 01:19 AM IST
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एनटीपीसी में हादसा
एनटीपीसी हॉस्पिटल में प्लास्टिक सर्जन तक नहीं
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- करीब चार हजार लोग करते हैं आग के बीच काम
- जिला अस्पताल में भी सामान्य सर्जनों के सहारे किया जा रहा इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। एनटीपीसी में करीब चार हजार कर्मचारियों और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।यदि आग की चपेट में आकर कोई गंभीर रूप से झुलस जाए तो उसका बाहर के किसी बड़े अस्पताल में ही इलाज संभव है। एनटीपीसी के बॉयलर विस्फोट में मारे गए श्रमिकों की संख्या को कम किया जा सकता था, लेकिन एनटीपीसी अस्पताल में ही प्लास्टिक सर्जन की व्यवस्था नहीं है। यही वजह है कि हादसे के बाद ऊंचाहार से रायबरेली और फिर यहां से लखनऊ रेफर किया जाता रहा और श्रमिक मरते रहे।
एनटीपीसी के 10 किलोमीटर दायरे में न तो प्राइवेट और न ही सरकारी अस्पतालों में जले मरीजों के इलाज का कोई इंतजाम है। जिला अस्पताल में भी प्लास्टिक सर्जनों की व्यवस्था नहीं है। आग से जलने वालों का सामान्य सर्जनों के सहारे इलाज किया जा रहा है। एनटीपीसी अस्पताल में यदि बर्न यूनिट होती तो इतनी अधिक जानें न जाती। बड़ी बात यह है कि एनटीपीसी के अस्पताल में कई रोगों के स्पेशलिस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन जलने से जान बचाने के लिए प्लास्टिक सर्जनों की व्यवस्था नहीं है। एनटीपीसी सूत्रों का कहना है कि परिसर में करीब एक हजार अधिकारी और कर्मचारी, जबकि करीब तीन हजार श्रमिक काम करते हैं। यह संख्या घटती बढ़ती रहती है।
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इनसेट
बर्न केस में रेफर करना मजबूरी
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. जेके लाल का कहना है कि सामान्य रूप से झुलसे लोगों का यहां इलाज करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन जिन केसों में स्किन अधिक जल जाती है, उन पेसेंट को रेफर कर दिया जाता है। समय से इलाज शुरू हो जाने से जान बच जाती है।
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वर्जन :
बर्न केस के इलाज के लिए प्लास्टिक सर्जन की जरूरत होती है। जिले को प्लास्टिक सर्जन उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसी स्थिति में सामान्य सर्जनों के सहारे बर्न के रोगियों का बेहतर इलाज कराने का प्रयास किया जाता है।- डॉ. डीके सिंह, सीएमओ रायबरेली

वर्जन :
एनटीपीसी अस्पताल में गंभीर बर्न केस में पीड़ित लोगों को रेफर कर दिया जाता है। यहां पर बर्न के लिए सर्जन संजय शर्मा तो हैं, लेकिन प्लास्टिक सर्जन की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। थोड़ा बहुत जलने पर उनका इलाज कर दिया जाता है। गंभीर होने पर रेफर कर दिया जाता है। इस तरह का कोई हादसा कभी हुआ नहीं। प्लास्टिक सर्जन की नियुक्ति के लिए प्रबंधन से बात की जाएगी।-डॉ. एमपी सिंह, सीएमओ, एनटीपीसी अस्पताल
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