फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   पोस्टमार्टम हाऊस का बदला था नजारा, गमगीन थे लोग, आंखों में आंसू

पोस्टमार्टम हाऊस का बदला था नजारा, गमगीन थे लोग, आंखों में आंसू

Fri, 03 Nov 2017 12:20 AM IST
Updated Fri, 03 Nov 2017 12:20 AM IST
विज्ञापन
पोस्टमार्टम हाऊस का बदला था नजारा, गमगीन थे लोग, आंखों में आंसू
आए थे रुपया कमाने और जिंदगी से हाथ धो बैठे सगे भाई
विज्ञापन

रायबरेली। जगदीशपुर गांव स्थित पोस्टमार्टम हाउस का नजारा गुरुवार को बदला सा था। वहां पर मौजूद लोग गमगीन थे तो उनके आंखों में आंसू दिख रहे थे। हर किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि अपने अब उनके बीच नहीं रहे। दो सगे भाइयों की मौत से सरफुल्ला खान बेहद गमगीन थे। कभी रोने लगते तो कभी हाथ से छाती पीटने लगते। कहते हैं कि भाई यहां पैसा कमाने आए थे, लेकिन उनकी तो अर्थी उठ गई है। यह गम सिर्फ सरफुल्ला खान का नहीं था, बल्कि एनटीपीसी हादसे में मरने वाले श्रमिकों के हर परिवारीजनों का था।
छत्तीसगढ़ के जिला बलरामपुर के चुमरा गांव के रहने वाले सरफुल्ला खान पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। बिलख रहे सरफुल्ला खान ने बताया कि उनके दो भाई हबीउल्ला व फैजुल्ला यहां दो साल से एनटीपीसी ऊंचाहार में काम करने आए थे। सबकुछ ठीकठाक चल रहा था। पर अचानक खुदा ने उनकी खुशियां छीन ली। वे पांच भाई थे। अब तीन भाई बचे हैं। टीवी पर खबर देखी थी। इसके बाद यहां बस से आया तो भाइयों की मौत की जानकारी मिली। अब भाइयों के बजाय उनके शव घर पहुंचेंगे।
विज्ञापन

झारखंड के गड़वा जिले के प्रतापपुर निवासी जकीउल्ला (26) भी एनपीटीसी हादसे में अपनी जान गंवा दी। दामाद की मौत से ससुर शेर अली के आंसू नहीं थम रहे थे। कहते हैं कि दामाद यहां पर कई साल से मजदूरी कर रहा था। अब क्या होगा, कुछ सूझ नहीं रहा है। ऊंचाहार क्षेत्र के छिपिया मजरे इटौरा बुजुर्ग गांव के बालकृष्ण शुक्ला की एनटीपीसी हादसे में मौत हो गई। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे बड़े भाई गंगाधर शुक्ला के आंसू नहीं थम रहे थे। महोबा जिले के सियावन अजनर निवासी ओम प्रकाश भी एनटीपीसी में मजदूरी करता था। उसकी भी हादसे में मौत हो गई। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे पिता रतीराम, चाचा कल्लू, प्रताप, भाई कैलाश के आंसू नहीं थम रहे थे। पिता का कहना था कि बेटा इतनी दूर चला जाएगा उन्हें पता नहीं था, वरना उसे यहां पर मजदूरी करने न आने देता।
विज्ञापन
विज्ञापन

मध्य प्रदेश प्रांत के जिला कटरी गांव भदौरा नंबर दो के रहने वाले रामरतन की भी मौत हो गई। उसके भाई रामभजन, पिता कमलेश पटेल, मां फूलबाई दहाड़े मारकर रो पड़ रहे थे। सबको एहसास ही नहीं हो रहा था कि रामरतन अब इस दुनिया में नहीं रहा। बिहार प्रांत के अजनिइया मेला औरंगाबाद के रहने वाले पंचम मेहता की भी मौत हो गई। पंचम की मौत की सूचना पर उसका ममेरा भाई जितेंद्र कुमार मेहता यहां पर पहुंचा और उसके आंसू नहीं थम रहे थे। मध्य प्रदेश प्रांत के भदौरा जिला कटनी निवासी नरेश की भी हादसे में मौत हो गई। सूचना पर पिता मिठाईलाल यहां पर पहुंचे। बेटे की मौत से पिता के आंसू नहीं थम रहे थे। साथ ही भाई पितई और विशेषर व साला नरेश भी यहां पहुंचे और बिलख रहे थे। गुरुवार को पोस्टमार्टम हाऊस का नजारा गमगीन था। वहां पर मौजूद हर किसी के चेहरे पर उदासी और हादसे को लेकर गम था तो अपनोें से बिछुड़ने का गहरा अफसोस था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed