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200 स्कूलों में फिर लटके ताले, पढ़ाई व्यवस्था चौपट
Updated Fri, 18 Aug 2017 01:06 AM IST
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200 स्कूलों में फिर लटके ताले, पढ़ाई ठप
रायबरेली। समायोजन रद्द किए जाने और सरकार से वार्ता विफल होने के बाद बृहस्पतिवार को फिर शिक्षामित्र सड़क पर आ गए। विकास भवन में एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन किया।
बीएसए कार्यालय परिसर में झाड़ू लगाकर विरोध जताया। शिक्षामित्रों की हड़ताल से 200 स्कूलों में ताले लटक गए और पढ़ाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। बच्चे स्कूल पहुंचे, लेकिन ताला लटकता देख उन्हें लौटना पड़ा।
शिक्षामित्रों ने एक स्वर में एलान किया कि मांग पूरी न किए जाने तक हड़ताल चलती रहेगी। आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह, जिला महामंत्री पुष्पेंद्र त्रिवेदी की अगुवाई में शिक्षामित्र बृहस्पतिवार को डिग्री कॉलेज चौराहे से प्रदर्शन करते हुए विकास भवन पहुंचे और यहीं पर धरने पर बैठ गए।
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हड़ताल की वजह से एकल शिक्षक वाले 200 स्कूलों के ताले नहीं खुले और बच्चों को लौटना पड़ा। जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि समायोजन रद्द कर दिए जाने से शिक्षामित्रों की रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है। सरकार भी उनकी मांगें माने को तैयार नहीं हुई है, जिसका नतीजा रहा कि हड़ताल फिर से शुरू कर दी गई है। मांगों को लेकर शिक्षामित्र चुप नहीं बैठेंगे।
इस दौरान शिक्षामित्रों ने धरना देने के साथ विरोध स्वरूप बीएसए कार्यालय परिसर में झाड़ू लगाई। जिलाध्यक्ष ने कहा कि हड़ताल से 200 स्कूलों ताला बंदी रही। धरनास्थल पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट आलोक कुमार को शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर विष्णु शरण मौैर्य, लक्ष्मी प्रताप सिंह, अजय प्रताप सिंह, अनिल कुमार मौर्य, सुमन सिंह, मीनाक्षी द्विवेदी, रश्मि, निशा मौर्या आदि मौजूद रहे।
इनसेट
10 हजार बच्चों का भविष्य फिर खतरे में
रायबरेली। शिक्षामित्रों की हड़ताल से वैसे तो हर स्कूल में पठन-पाठन का कार्य प्रभावित रहा, लेकिन 200 एकल स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से चौपट रही। पूरे मान सिंह, एकडला, मेलथुवा, पुलियापुर, मुतवल्लीपुर आदि एकल शिक्षक वाले स्कूलों में तालाबंदी होने करीब 10 हजार बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
एक तरफ इन स्कूलों में ताले लटक रहे हैैं, लेकिन पठन-पाठन का कार्य शुरू कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। यदि ताला खुल भी जाता है तो कोई शिक्षक नहीं पहुंचता है। इन स्कूलों के संचालन के लिए 200 शिक्षकों की जरूरत है। यह हाल तब है, जब पहले यहां पर शिक्षकों की कमी है।
ऐेसे में 2200 शिक्षकों की कमी को पूरा करना विभागीय अफसरों के लिए आसान नहीं है। मौजूदा समय की बात की जाए तो जिले में स्कूलों की संख्या 2600 है, जिसमें ढाई लाख से ज्यादा बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। साथ ही पांच हजार से ज्यादा शिक्षकों की तैनाती है। अफसरों का दावा रहा कि बगल वाले स्कूलों में बंद स्कूलों में तैनाती करके स्कूल चलवाए जाएंगे, लेकिन यह आदेश पहले दिन ही हवा-हवाई दिखा।
जो स्कूल बंद हैं, उनके बगल वाले स्कूल में तैनात शिक्षकों को भेजकर बंद स्कूलों में पठन-पाठन का कार्य कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द व्यवस्था सुधर जाएगी।- संजय कुमार शुक्ला, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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रायबरेली। समायोजन रद्द किए जाने और सरकार से वार्ता विफल होने के बाद बृहस्पतिवार को फिर शिक्षामित्र सड़क पर आ गए। विकास भवन में एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन किया।
बीएसए कार्यालय परिसर में झाड़ू लगाकर विरोध जताया। शिक्षामित्रों की हड़ताल से 200 स्कूलों में ताले लटक गए और पढ़ाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। बच्चे स्कूल पहुंचे, लेकिन ताला लटकता देख उन्हें लौटना पड़ा।
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शिक्षामित्रों ने एक स्वर में एलान किया कि मांग पूरी न किए जाने तक हड़ताल चलती रहेगी। आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह, जिला महामंत्री पुष्पेंद्र त्रिवेदी की अगुवाई में शिक्षामित्र बृहस्पतिवार को डिग्री कॉलेज चौराहे से प्रदर्शन करते हुए विकास भवन पहुंचे और यहीं पर धरने पर बैठ गए।
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हड़ताल की वजह से एकल शिक्षक वाले 200 स्कूलों के ताले नहीं खुले और बच्चों को लौटना पड़ा। जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि समायोजन रद्द कर दिए जाने से शिक्षामित्रों की रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है। सरकार भी उनकी मांगें माने को तैयार नहीं हुई है, जिसका नतीजा रहा कि हड़ताल फिर से शुरू कर दी गई है। मांगों को लेकर शिक्षामित्र चुप नहीं बैठेंगे।
इस दौरान शिक्षामित्रों ने धरना देने के साथ विरोध स्वरूप बीएसए कार्यालय परिसर में झाड़ू लगाई। जिलाध्यक्ष ने कहा कि हड़ताल से 200 स्कूलों ताला बंदी रही। धरनास्थल पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट आलोक कुमार को शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर विष्णु शरण मौैर्य, लक्ष्मी प्रताप सिंह, अजय प्रताप सिंह, अनिल कुमार मौर्य, सुमन सिंह, मीनाक्षी द्विवेदी, रश्मि, निशा मौर्या आदि मौजूद रहे।
इनसेट
10 हजार बच्चों का भविष्य फिर खतरे में
रायबरेली। शिक्षामित्रों की हड़ताल से वैसे तो हर स्कूल में पठन-पाठन का कार्य प्रभावित रहा, लेकिन 200 एकल स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से चौपट रही। पूरे मान सिंह, एकडला, मेलथुवा, पुलियापुर, मुतवल्लीपुर आदि एकल शिक्षक वाले स्कूलों में तालाबंदी होने करीब 10 हजार बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
एक तरफ इन स्कूलों में ताले लटक रहे हैैं, लेकिन पठन-पाठन का कार्य शुरू कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। यदि ताला खुल भी जाता है तो कोई शिक्षक नहीं पहुंचता है। इन स्कूलों के संचालन के लिए 200 शिक्षकों की जरूरत है। यह हाल तब है, जब पहले यहां पर शिक्षकों की कमी है।
ऐेसे में 2200 शिक्षकों की कमी को पूरा करना विभागीय अफसरों के लिए आसान नहीं है। मौजूदा समय की बात की जाए तो जिले में स्कूलों की संख्या 2600 है, जिसमें ढाई लाख से ज्यादा बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। साथ ही पांच हजार से ज्यादा शिक्षकों की तैनाती है। अफसरों का दावा रहा कि बगल वाले स्कूलों में बंद स्कूलों में तैनाती करके स्कूल चलवाए जाएंगे, लेकिन यह आदेश पहले दिन ही हवा-हवाई दिखा।
जो स्कूल बंद हैं, उनके बगल वाले स्कूल में तैनात शिक्षकों को भेजकर बंद स्कूलों में पठन-पाठन का कार्य कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द व्यवस्था सुधर जाएगी।- संजय कुमार शुक्ला, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी