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मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है: पं. झिलमिल जी महाराज
Updated Mon, 12 Jun 2017 03:03 AM IST
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मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण
-बाल्हेश्वर मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ
अमर उजाला ब्यूरो
लालगंज (रायबरेली)। क्षेत्र के बाल्हेमऊ गांव स्थित बाबा बाल्हेश्वर मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ में रविवार को कथा वाचक मंदिर के पुजारी पं. झिलमिल जी महाराज ने कहा कि मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है। कथा में भगवान कृष्ण की लीलाओं का गुणगान करते हुए गोबर्धन पूजा व इंद्र के मानमर्दन का विस्तार पूर्वक वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अहंकारी कभी नहीं होना चाहिए। अहंकार करने से मनुष्य का पतन शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि रावण जैसे विद्वान का अहंकार भी चकनाचूर हो गया था। भगवान की भक्ति में जो सुख मिलता है वह दूसरी जगह कहीं नहीं मिल सकता है। इस संसार में जो मनुष्य को सुख मिलता है वह कुछ ही देर के लिए होता है। क्योंकि उस सुख के बाद दुख आता है। लेकिन ईश्वर की भक्ति करने से मिलने वाले सुख में दुख नहीं मिलता है। भगवान अपने भक्तों की हमेशा रक्षा करते हैं। इस मौके पर भीषम सिंह भदौरिया, वासुदेव सिंह, अतुल सिंह, मुकेश सिंह, शिवबरन सिंह मौजूद रहे।
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-बाल्हेश्वर मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ
अमर उजाला ब्यूरो
लालगंज (रायबरेली)। क्षेत्र के बाल्हेमऊ गांव स्थित बाबा बाल्हेश्वर मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ में रविवार को कथा वाचक मंदिर के पुजारी पं. झिलमिल जी महाराज ने कहा कि मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है। कथा में भगवान कृष्ण की लीलाओं का गुणगान करते हुए गोबर्धन पूजा व इंद्र के मानमर्दन का विस्तार पूर्वक वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अहंकारी कभी नहीं होना चाहिए। अहंकार करने से मनुष्य का पतन शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि रावण जैसे विद्वान का अहंकार भी चकनाचूर हो गया था। भगवान की भक्ति में जो सुख मिलता है वह दूसरी जगह कहीं नहीं मिल सकता है। इस संसार में जो मनुष्य को सुख मिलता है वह कुछ ही देर के लिए होता है। क्योंकि उस सुख के बाद दुख आता है। लेकिन ईश्वर की भक्ति करने से मिलने वाले सुख में दुख नहीं मिलता है। भगवान अपने भक्तों की हमेशा रक्षा करते हैं। इस मौके पर भीषम सिंह भदौरिया, वासुदेव सिंह, अतुल सिंह, मुकेश सिंह, शिवबरन सिंह मौजूद रहे।
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