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करोड़ों खर्चं के बावजूद प्यासी 10 लाख आबादी
Updated Wed, 13 Dec 2017 11:46 PM IST
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शुद्ध पेयजल से वंचित 10 लाख आबादी
रायबरेली। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन ग्रामीणों की प्यास बुझा पाने में नाकाम है। बजट के अभाव में 26 पेयजल योजनाएं पानी नहीं उगल पा रही हैं। ऐसी स्थिति में 10 लाख से अधिक आबादी को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। जल निगम को पेयजल इकाइयों को पूरा कराने के साथ ही पुरानी इकाइयों के रखरखाव के लिए 121 करोड़ रुपये मिले तो ग्रामीणों का प्यास बुझाने में परियोजनाएं काम कर सकें। जल निगम बजट का इंतजार कर रहा है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए 88 पेयजल योजनाएं पहले से निर्मित हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन के तहत जिले में 57 नई परियोजनाओं की स्थापना का काम शुरू हुआ। इसमें 31 एकल पेयजल योजनाएं हैं। पूरा बजट न मिल पाने के कारण 26 परियोजनाएं लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही हैं। पेयजल योजनाओं का काम 70 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है, लेकिन पूरा बजट न मिल पाने के कारण ग्रामीणों तक शुद्ध पीने का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। पेयजल इकाइयों को पूरा कराने के लिए मात्र साढे़ सात करोड़ की दरकार है। इसके अलावा पुरानी इकाइयों के रखरखाव और उनके पुनर्गठन के लिए भी करीब 113 करोड़ रुपयों की दरकार है। शासन से बजट न मिल पाने के कारण समस्या आ रही है।
जगतपुर में पुनर्गठन को 27 करोड़ में मात्र सवा करोड़ ही मिले
जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र के 48 से अधिक गांवों में शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए पहले से स्थापित पेयजल इकाई के पुनर्गठन की तैयारी है। इसके लिए जल निगम को 27.60 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन अब तक मात्र 1.38 करोड़ रुपये ही मिले हैं। ऐसी स्थिति में पेयजल इकाई लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही है। इसके अलावा अन्य परियोजनाओं के पुनर्गठन के लिए भी बजट नहीं मिल पा रहा है, जिससे लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है।
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बजट के अभाव में ये परियोजनाएं अटकी
शासन से बजट न मिल पाने के कारण जिले की 26 पेयजल परियोजनाओं से पानी लक्ष्य के सापेक्ष लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। इसमें पेजयल योजना राही, रसूलपुर, तेरुखा, कोरिहर, जोहवाशर्की, सेमरी, इटौरा, खरौली, बेलाभेला, ऊंचाहार देहात, बेहटाकला, गंधवी, कोटरा बहादुरपुर, जगदीशपुर, बकुलिहा, बेलाखारा, गौराहरदो, पाहो, हरचंदपुर, डलमऊ, अमावां आदि इकाइयों का काम पूरा नहीं हो पा रहा है। जल निगम को बजट का इंतजार है। बजट मिले तो इनका काम पूरा कराया जाए।
गांवों में शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए 57 पेयजल इकाइयों का लक्ष्य है। इसमेें 31 का काम पूरा हो चुका है। बजट के अभाव में 26 इकाइयों का काम पूरा नहीं हो पा रहा है। इकाइयों को पूरा कराने के साथ ही पुरानी इकाइयों के रखरखाव और पुनर्गठन के लिए करीब 121 करोड़ की जरूरत है। बजट मिलते ही काम को पूरा कराया जाएगा।- जर्नादन सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम
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रायबरेली। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन ग्रामीणों की प्यास बुझा पाने में नाकाम है। बजट के अभाव में 26 पेयजल योजनाएं पानी नहीं उगल पा रही हैं। ऐसी स्थिति में 10 लाख से अधिक आबादी को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। जल निगम को पेयजल इकाइयों को पूरा कराने के साथ ही पुरानी इकाइयों के रखरखाव के लिए 121 करोड़ रुपये मिले तो ग्रामीणों का प्यास बुझाने में परियोजनाएं काम कर सकें। जल निगम बजट का इंतजार कर रहा है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए 88 पेयजल योजनाएं पहले से निर्मित हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन के तहत जिले में 57 नई परियोजनाओं की स्थापना का काम शुरू हुआ। इसमें 31 एकल पेयजल योजनाएं हैं। पूरा बजट न मिल पाने के कारण 26 परियोजनाएं लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही हैं। पेयजल योजनाओं का काम 70 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है, लेकिन पूरा बजट न मिल पाने के कारण ग्रामीणों तक शुद्ध पीने का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। पेयजल इकाइयों को पूरा कराने के लिए मात्र साढे़ सात करोड़ की दरकार है। इसके अलावा पुरानी इकाइयों के रखरखाव और उनके पुनर्गठन के लिए भी करीब 113 करोड़ रुपयों की दरकार है। शासन से बजट न मिल पाने के कारण समस्या आ रही है।
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जगतपुर में पुनर्गठन को 27 करोड़ में मात्र सवा करोड़ ही मिले
जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र के 48 से अधिक गांवों में शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए पहले से स्थापित पेयजल इकाई के पुनर्गठन की तैयारी है। इसके लिए जल निगम को 27.60 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन अब तक मात्र 1.38 करोड़ रुपये ही मिले हैं। ऐसी स्थिति में पेयजल इकाई लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही है। इसके अलावा अन्य परियोजनाओं के पुनर्गठन के लिए भी बजट नहीं मिल पा रहा है, जिससे लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है।
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बजट के अभाव में ये परियोजनाएं अटकी
शासन से बजट न मिल पाने के कारण जिले की 26 पेयजल परियोजनाओं से पानी लक्ष्य के सापेक्ष लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। इसमें पेजयल योजना राही, रसूलपुर, तेरुखा, कोरिहर, जोहवाशर्की, सेमरी, इटौरा, खरौली, बेलाभेला, ऊंचाहार देहात, बेहटाकला, गंधवी, कोटरा बहादुरपुर, जगदीशपुर, बकुलिहा, बेलाखारा, गौराहरदो, पाहो, हरचंदपुर, डलमऊ, अमावां आदि इकाइयों का काम पूरा नहीं हो पा रहा है। जल निगम को बजट का इंतजार है। बजट मिले तो इनका काम पूरा कराया जाए।
गांवों में शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए 57 पेयजल इकाइयों का लक्ष्य है। इसमेें 31 का काम पूरा हो चुका है। बजट के अभाव में 26 इकाइयों का काम पूरा नहीं हो पा रहा है। इकाइयों को पूरा कराने के साथ ही पुरानी इकाइयों के रखरखाव और पुनर्गठन के लिए करीब 121 करोड़ की जरूरत है। बजट मिलते ही काम को पूरा कराया जाएगा।- जर्नादन सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम