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सबसे अहम् है रबीउल अव्वल का महीना-इश्तियाक
Updated Wed, 22 Nov 2017 12:47 AM IST
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सबसे अहम है रबीउल अव्वल का महीना : इश्तियाक
रायबरेली। मौलाना मो. इश्तियाक अहमद कादरी अशरफी इन्हौनवी ने कहा कि हम लोगों के वास्ते बारह रबीउल अव्वल का महीना सबसे अहम महीना है। इस महीने की 12 तारीख हमारे प्यारे नबी (स.अ.) की पैदाइश की तारीख है। इसलिए यह दिन ईद से भी बढ़कर खुशी का दिन है, क्योंकि हम मुसलमानों को अल्लाह की तरफ से जो भी सौगात मिली है, वह नबी (स.अ.) के सदके में ही मिली है।
वह एदारा-ए-शरैय्या के नेतृत्व में आयोजित जश्न-ए-आमद-ए-मुस्तफा (स.अ.) के जलसे में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अल्लाह ने मेरे नबी को नूर बनाकर भेजा है, इसलिए मेरे नबी दुनिया में तशरीफ लाने के बाद जिहालत की तारीकी, बदकिरदारी की तारीकी, जुल्म व सितम की तारीकी, बेइंसाफी की तारीकी एवं हर तरह की तारीकी को अपने नूर की रौशनी से जिहालत को शिक्षा में, बदकिरदारी को अच्छे किरदार में, जुल्म व सितम की तारीकी को अच्छे बर्ताव में, बेइंसाफी की तारीकी को इंसाफ और आपसी भाईचारा में बदल दिया है।
उन्होंने कहा कि आज हमारे समाज में जो बेचैनी पाई जा रही है, वह इसलिए है कि हम अपने नबी के बताये हुए रास्ते से भटक गए हैं। अगर हमें सुकून व इतमेनान हासिल करना है तो हम अपने रसूल के बताये हुए रास्ते पर चलने लगे। इससे हमारे समाज की बुराइयां खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएंगी। खाली सहाट में हुए इस जलसे की अध्यक्षता कर रहे मौलाना अरबीउल अशरफ ने दुआ की। जलसे का संचालन मौलाना नासिर खां ने किया। तिलावत-ए-कुरआन पाक से जलसे की शुरूआत हुई। मौलाना मंसूर अहमद, हाफिज अब्दुल कलाम, हाफिज नूर मुहम्मद ने नबी की शान में नाते पाक पढ़ी। इस मौके पर हाफिज अबुल कलाम, मो. मुशीर, मो. इकबाल, मो. इरफान, आदि मौजूद रहे।
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रायबरेली। मौलाना मो. इश्तियाक अहमद कादरी अशरफी इन्हौनवी ने कहा कि हम लोगों के वास्ते बारह रबीउल अव्वल का महीना सबसे अहम महीना है। इस महीने की 12 तारीख हमारे प्यारे नबी (स.अ.) की पैदाइश की तारीख है। इसलिए यह दिन ईद से भी बढ़कर खुशी का दिन है, क्योंकि हम मुसलमानों को अल्लाह की तरफ से जो भी सौगात मिली है, वह नबी (स.अ.) के सदके में ही मिली है।
वह एदारा-ए-शरैय्या के नेतृत्व में आयोजित जश्न-ए-आमद-ए-मुस्तफा (स.अ.) के जलसे में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अल्लाह ने मेरे नबी को नूर बनाकर भेजा है, इसलिए मेरे नबी दुनिया में तशरीफ लाने के बाद जिहालत की तारीकी, बदकिरदारी की तारीकी, जुल्म व सितम की तारीकी, बेइंसाफी की तारीकी एवं हर तरह की तारीकी को अपने नूर की रौशनी से जिहालत को शिक्षा में, बदकिरदारी को अच्छे किरदार में, जुल्म व सितम की तारीकी को अच्छे बर्ताव में, बेइंसाफी की तारीकी को इंसाफ और आपसी भाईचारा में बदल दिया है।
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उन्होंने कहा कि आज हमारे समाज में जो बेचैनी पाई जा रही है, वह इसलिए है कि हम अपने नबी के बताये हुए रास्ते से भटक गए हैं। अगर हमें सुकून व इतमेनान हासिल करना है तो हम अपने रसूल के बताये हुए रास्ते पर चलने लगे। इससे हमारे समाज की बुराइयां खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएंगी। खाली सहाट में हुए इस जलसे की अध्यक्षता कर रहे मौलाना अरबीउल अशरफ ने दुआ की। जलसे का संचालन मौलाना नासिर खां ने किया। तिलावत-ए-कुरआन पाक से जलसे की शुरूआत हुई। मौलाना मंसूर अहमद, हाफिज अब्दुल कलाम, हाफिज नूर मुहम्मद ने नबी की शान में नाते पाक पढ़ी। इस मौके पर हाफिज अबुल कलाम, मो. मुशीर, मो. इकबाल, मो. इरफान, आदि मौजूद रहे।
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