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276 बेड क्षमता वाले चिकित्सालय में भर्ती 400 रोगी
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रायबरेली में रविवार को जिला अस्पताल में भर्ती मरीज।
- फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। बारिश और बदलते मौसम ने लोगों की मुसीबत बढ़ा दी है। लोग संक्रामक रोग की चपेट में आ रहे हैं। आलम ये है कि रोगियों की बढ़ती संख्या से जिला अस्पताल फुल हो गया। 276 बेड वाले पुरुष जिला अस्पताल में मौजूदा समय में करीब 400 रोगी भर्ती हैं। इसमें डेंगू, मलेरिया और बुखार से पीड़ित अधिक है।
डेंगू और सर्पदंश से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए बनाए गए विशेष वार्डों में रोगियों को भर्ती करना पड़ रहा है। वार्ड में भर्ती होने से पहले जिला अस्पताल की इमरजेंसी में यह पता लगाने में माथापच्ची करनी पड़ रही है कि अस्पताल के किस वार्ड में बेड खाली हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से वार्डों में ही बेडों की संख्या बढ़ाकर रोगियों का इलाज किया जा रहा है।
वहीं जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीरबल एक माह की लंबी छुट्टी पर चल गए हैं। डॉ. बीरबल सिर्फ ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 300 रोगियों का इलाज करते थे। वहीं भर्ती रोगियों को भी देखते थे। उनके छुट्टी जाने के बाद रोगियों की परेशानी और बढ़ गई। जिला अस्पताल में तैनात फिजीशियन डॉ. अशोक कुमार वर्मा का कहना है कि मौसम में बदलाव हो रहा है।
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रात के वक्त हल्की ठंडी पड़ने लगी है। इस वजह से सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी हो गया है। इस समय डेंगू, मलेरिया, बुखार की चपेट में लोग अधिक आ रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग साफ पानी पीएं। घर के आसपास की साफ-सफाई रखे। कटे फटे फलों का सेवन कतई न करे। बाहर का भोजन न करें। रात में सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करे।
बीमार होने पर अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक की सलाह लें और इलाज कराएं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी के ईएमओ डॉ. संतोष सिंह का कहना है कि रोगियों की संख्या एकाएक बढ़ गई है। रविवार को ही 70 रोगियों को अस्पताल में भर्ती किया गया। इसमें मलेरिया, डेंगू, बुखार आदि के रोगियों की संख्या अधिक है।
अस्पताल के जिस वार्ड में भी बेड खाली रहते हैं, वहां पर रोगियों को भर्ती कराया जाता है। बेड खोजने में रोगियों व उनके तीमारदारों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए इमरजेंसी में तैनात स्टाफ भी उनके साथ भेजा जाता है। सीएमएस, जिला अस्पताल डॉ. एनके श्रीवास्तव का कहना है कि बारिश और मौसम में बदलाव की वजह से जिला अस्पताल फुल हुआ है।
इसे देखते हुए रोगियों को भर्ती करके उनके इलाज के पूरे इंतजाम कर दिए गए हैं। वार्डों में ही बेड बढ़ा दिए गए हैं। विशेष वार्डों में भी रोगियों को भर्ती कराया जा रहा है। चिकित्सकों व अस्पताल के स्टाफ को सख्त हिदायत दी गई है कि रोगियों को किसी तरह की परेशानी न होने पाए। इंजेक्शन व दवाएं अस्पताल में मुहैया करा दी गई हैं।
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डेंगू और सर्पदंश से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए बनाए गए विशेष वार्डों में रोगियों को भर्ती करना पड़ रहा है। वार्ड में भर्ती होने से पहले जिला अस्पताल की इमरजेंसी में यह पता लगाने में माथापच्ची करनी पड़ रही है कि अस्पताल के किस वार्ड में बेड खाली हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से वार्डों में ही बेडों की संख्या बढ़ाकर रोगियों का इलाज किया जा रहा है।
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वहीं जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीरबल एक माह की लंबी छुट्टी पर चल गए हैं। डॉ. बीरबल सिर्फ ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 300 रोगियों का इलाज करते थे। वहीं भर्ती रोगियों को भी देखते थे। उनके छुट्टी जाने के बाद रोगियों की परेशानी और बढ़ गई। जिला अस्पताल में तैनात फिजीशियन डॉ. अशोक कुमार वर्मा का कहना है कि मौसम में बदलाव हो रहा है।
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रात के वक्त हल्की ठंडी पड़ने लगी है। इस वजह से सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी हो गया है। इस समय डेंगू, मलेरिया, बुखार की चपेट में लोग अधिक आ रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग साफ पानी पीएं। घर के आसपास की साफ-सफाई रखे। कटे फटे फलों का सेवन कतई न करे। बाहर का भोजन न करें। रात में सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करे।
बीमार होने पर अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक की सलाह लें और इलाज कराएं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी के ईएमओ डॉ. संतोष सिंह का कहना है कि रोगियों की संख्या एकाएक बढ़ गई है। रविवार को ही 70 रोगियों को अस्पताल में भर्ती किया गया। इसमें मलेरिया, डेंगू, बुखार आदि के रोगियों की संख्या अधिक है।
अस्पताल के जिस वार्ड में भी बेड खाली रहते हैं, वहां पर रोगियों को भर्ती कराया जाता है। बेड खोजने में रोगियों व उनके तीमारदारों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए इमरजेंसी में तैनात स्टाफ भी उनके साथ भेजा जाता है। सीएमएस, जिला अस्पताल डॉ. एनके श्रीवास्तव का कहना है कि बारिश और मौसम में बदलाव की वजह से जिला अस्पताल फुल हुआ है।
इसे देखते हुए रोगियों को भर्ती करके उनके इलाज के पूरे इंतजाम कर दिए गए हैं। वार्डों में ही बेड बढ़ा दिए गए हैं। विशेष वार्डों में भी रोगियों को भर्ती कराया जा रहा है। चिकित्सकों व अस्पताल के स्टाफ को सख्त हिदायत दी गई है कि रोगियों को किसी तरह की परेशानी न होने पाए। इंजेक्शन व दवाएं अस्पताल में मुहैया करा दी गई हैं।