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डेंगू के डंक का फिर मंडराया खतरा
Updated Sat, 10 Jun 2017 11:39 PM IST
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डेंगू के डंक का फिर मंडराया खतरा
- वर्ष 2016 में एक की डेंगू से हुई थी मौत, 85 लोग हुए थे बीमार
- जिले में पिछले साल चिकनगुनिया का कोई रोगी नहीं आया था सामने
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। जिले में डेंगू और चिकनगुनिया का खतरा मंडराने लगा है। बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसे रोकने के लिए उठाए जा रहे कदम नाकाफी साबित हो रहे हैं। प्रचार-प्रसार के नाम पर खानापूरी की जा रही है। हालांकि अफसरों का दावा है कि डेंगू की बीमारी का असर यहां पर रहता है, लेकिन चिकनगुनिया का असर यहां पर बिल्कुल नहीं है। पिछले साल चिकनगुनिया से कोई भी रोगी पीड़ित नहीं पाया गया।
मानसून के दस्तक देते ही मच्छर जनित बीमारी डेंगू के फैलने का खतरा मंडराने लगता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो वर्ष 2016 में 85 लोग डेंगू से पॉजिटिव पाए गए थे, जबकि एक रोगी की मौत हुई थी। वर्ष 2015 में 75 रोगी डेंगू से पॉजिटिव पाए गए थे।
स्वास्थ्य विभाग के अफसर बताते हैं कि चिकनगुनिया का कोई रोगी पिछले साल नहीं मिला था। खास बात ये है कि डेंगू के रोगी हर साल जिले में पाए जा रहे हैं, लेकिन लोगों को जागरूक करने के नाम पर खानापूरी की जा रही है। प्रचार-प्रसार नहीं किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग कागजों पर ही डेंगू से निपटने की तैयारी कर रहा है।
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इनसेट
डेंगू के लक्षण-
रोगी को काफी दिनों से बुखार आना
रोगी को काफी दिनों से खांसी आना
रोगी के शरीर में तेज दर्द होना
रोगी की सांस फूलना, मुंह व नाक से खून निकलना
इनसेट
डेंगू से बचाव-
घर के आसपास साफ-सफाई रखें
जलभराव किसी कीमत पर न होने दें
हाथ और पैर को ढककर रखा जाए
रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें
बीमार होने पर चिकित्सक को दिखाएं
इनसेट
अब तक नहीं बनाए गए अलग से वार्ड
जिला अस्पताल हो या फिर देहात क्षेत्र की सीएचसी-पीएचसी। डेंगू से बीमार रोगियों को भर्ती करने के लिए अलग से कोई वार्ड नहीं बनाया गया है। यदि कोई रोगी डेंगू की चपेट में आ जाए तो उसे भर्ती करने में दिक्कत हो सकती है। हालांकि सभी जगहों पर डेंगू की जांच की जाती है। हालत गंभीर होने पर रोगी को सीएचसी-पीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
वर्जन :
जिले में डेंगू तो फैलता है, लेकिन चिकनगुनिया बीमारी का असर यहां पर नहीं रहता है। डेंगू से निपटने के लिए पूरे इंतजाम किए जा रहे हैं। नगर पालिका और नगर पंचायत के अधिकारियों को पत्र लिखकर एंटी लार्वा का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर एएनएम व आशा बहुओं, प्रधानों को नालियों में एंटी लार्वा का छिड़काव करने की जिम्मेदारी दी गई है। जिला अस्पताल व सीएचसी-पीएचसी में अलग से वार्ड खोलने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सीएचसी-पीएचसी में सेमो फास्ट दवा उपलब्ध करा दी गई है।-डॉ. डीके सिंह, सीएमओ
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- वर्ष 2016 में एक की डेंगू से हुई थी मौत, 85 लोग हुए थे बीमार
- जिले में पिछले साल चिकनगुनिया का कोई रोगी नहीं आया था सामने
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। जिले में डेंगू और चिकनगुनिया का खतरा मंडराने लगा है। बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसे रोकने के लिए उठाए जा रहे कदम नाकाफी साबित हो रहे हैं। प्रचार-प्रसार के नाम पर खानापूरी की जा रही है। हालांकि अफसरों का दावा है कि डेंगू की बीमारी का असर यहां पर रहता है, लेकिन चिकनगुनिया का असर यहां पर बिल्कुल नहीं है। पिछले साल चिकनगुनिया से कोई भी रोगी पीड़ित नहीं पाया गया।
मानसून के दस्तक देते ही मच्छर जनित बीमारी डेंगू के फैलने का खतरा मंडराने लगता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो वर्ष 2016 में 85 लोग डेंगू से पॉजिटिव पाए गए थे, जबकि एक रोगी की मौत हुई थी। वर्ष 2015 में 75 रोगी डेंगू से पॉजिटिव पाए गए थे।
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स्वास्थ्य विभाग के अफसर बताते हैं कि चिकनगुनिया का कोई रोगी पिछले साल नहीं मिला था। खास बात ये है कि डेंगू के रोगी हर साल जिले में पाए जा रहे हैं, लेकिन लोगों को जागरूक करने के नाम पर खानापूरी की जा रही है। प्रचार-प्रसार नहीं किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग कागजों पर ही डेंगू से निपटने की तैयारी कर रहा है।
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डेंगू के लक्षण-
रोगी को काफी दिनों से बुखार आना
रोगी को काफी दिनों से खांसी आना
रोगी के शरीर में तेज दर्द होना
रोगी की सांस फूलना, मुंह व नाक से खून निकलना
इनसेट
डेंगू से बचाव-
घर के आसपास साफ-सफाई रखें
जलभराव किसी कीमत पर न होने दें
हाथ और पैर को ढककर रखा जाए
रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें
बीमार होने पर चिकित्सक को दिखाएं
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अब तक नहीं बनाए गए अलग से वार्ड
जिला अस्पताल हो या फिर देहात क्षेत्र की सीएचसी-पीएचसी। डेंगू से बीमार रोगियों को भर्ती करने के लिए अलग से कोई वार्ड नहीं बनाया गया है। यदि कोई रोगी डेंगू की चपेट में आ जाए तो उसे भर्ती करने में दिक्कत हो सकती है। हालांकि सभी जगहों पर डेंगू की जांच की जाती है। हालत गंभीर होने पर रोगी को सीएचसी-पीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
वर्जन :
जिले में डेंगू तो फैलता है, लेकिन चिकनगुनिया बीमारी का असर यहां पर नहीं रहता है। डेंगू से निपटने के लिए पूरे इंतजाम किए जा रहे हैं। नगर पालिका और नगर पंचायत के अधिकारियों को पत्र लिखकर एंटी लार्वा का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर एएनएम व आशा बहुओं, प्रधानों को नालियों में एंटी लार्वा का छिड़काव करने की जिम्मेदारी दी गई है। जिला अस्पताल व सीएचसी-पीएचसी में अलग से वार्ड खोलने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सीएचसी-पीएचसी में सेमो फास्ट दवा उपलब्ध करा दी गई है।-डॉ. डीके सिंह, सीएमओ